एमपी के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा राम भरोसे, प्रशासन को हादसे का इंतजार!
समझें क्या है पूरा मामला...
- लखनऊ के कोचिंग संस्थान में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हुई।
- इसके बाद मध्यप्रदेश के चार बड़े शहरों में फायर सेफ्टी की जांच शुरू हुई।
- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कोचिंग संस्थान बिना फायर सेफ्टी के चल रहे हैं।
- लाखों विद्यार्थी रोजाना इन्हीं असुरक्षित इमारतों में पढ़ने जाते हैं।
- नगर निगम हर बार जांच शुरू करता है, लेकिन कुछ दिनों में अभियान ठंडा पड़ जाता है।
लखनऊ हादसे ने खोली MP की आंखें
हाल ही में लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग संस्थान में आग लगी। इस हादसे में 15 छात्रों की जान चली गई। यह खबर आते ही देशभर के शहरों में हलचल मच गई।
वहीं हम मध्यप्रदेश की बात करें तो प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर चारों शहरों में नगर निगम ने जांच की बात कही। लेकिन जमीन पर हालात बेहद चिंताजनक हैं।
भोपाल: ढाई लाख बच्चे खतरे में
राजधानी भोपाल में लगभग 300 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। इनमें लगभग ढाई लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनमें से करीब 200 बड़े कोचिंग एमपी नगर इलाके में हैं। बाकी 100 छोटे सेंटर शहर के अलग-अलग हिस्सों में हैं।
यहां की सबसे बड़ी खामियां
जानकारी के अनुसार भोपाल में लगभग 80 फीसदी कोचिंग संस्थानों में अलग से फायर एग्जिट नहीं है। लगभग 90 फीसदी संस्थानों में घुसने और निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आपात स्थिति में एकमात्र रास्ता भगदड़ और बड़े हादसे की वजह बन सकता है।
नगर निगम के अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा ने बताया कि मंगलवार 22 जून से विशेष निरीक्षण अभियान शुरू होगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि जुलाई 2024 में जिला प्रशासन ने छह कोचिंग संस्थानों के बेसमेंट में चल रही कक्षाओं को सील किया था। लेकिन बाद में इन्हीं बेसमेंट में लाइब्रेरी और दूसरे काम शुरू हो गए।
ग्वालियर: सिर्फ तीन के पास फायर एनओसी
ग्वालियर शहर में सैकड़ों कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। लेकिन इनमें से सिर्फ तीन के पास ही नगर निगम से जारी फायर एनओसी है। बाकी सभी संस्थानों में न तो फायर फाइटिंग सिस्टम लगा है और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम है।
जांच शुरू होती है, फिर बंद हो जाती है
बता दें कि हाल ही में दिल्ली के एक होटल में आग लगी थी। इसके बाद ग्वालियर में भी निगम ने जांच शुरू की थी। सिटी सेंटर की एक कोचिंग का डायरेक्टर कक्ष सील हुआ था। साथ ही कोचिंग ने एनओसी के लिए आवेदन भी किया।
वहीं 12 जून के बाद से यह जांच अभियान भी ठप पड़ा हुआ है। पिछले 10 दिनों में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
शहर के अभिभावक भी आमतौर पर कोचिंग की लोकप्रियता देखकर बच्चों का दाखिला करा देते हैं। इमारत की सुरक्षा जांचना वे जरूरी नहीं समझते।
ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने बताया कि संवेदनशील संस्थानों में जांच जारी रहेगी। उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।
इंदौर में 2,500 कोचिंग, पर जांच सिर्फ सात की
एजुकेशन हब के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में ढाई हजार से ज्यादा कोचिंग संस्थान हैं। भंवरकुआ, विजय नगर, नवलखा, पलासिया और गीता भवन जैसे घने इलाकों में दिनभर विद्यार्थियों की भीड़ रहती है।
हालात यह हैं कि इनमें से अधिकांश इमारतों में आग से बचाव का कोई इंतजाम ही नहीं है।
पिछले दो महीनों का हिसाब
जानकारी के अनुसार इंदौर नगर निगम ने पिछले दो महीनों में 102 भवन सील किए। इनमें से सिर्फ सात कोचिंग संस्थान थे।
उन सात कोचिंग को भी पहले सील किया गया, फिर बाद में खोल दिया गया। निगम की यह कार्यशैली ही सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
जबलपुर में हजार कोचिंग, रिकॉर्ड में सिर्फ 280
जबलपुर में लगभग एक हजार से ज्यादा कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। लेकिन नगर निगम के रिकॉर्ड में सिर्फ 280 ही दर्ज हैं।
इनमें इंजीनियरिंग, NEET, IAS जैसी परीक्षाओं की तैयारी होती है। लेकिन इतने सारे कोचिंग में से सिर्फ आठ से दस ने ही फायर एनओसी ली है।
आडिट रिपोर्ट में भी गड़बड़ी
बता दें कि दिल्ली हादसे के बाद के 325 होटल, अस्पताल और कोचिंग को नोटिस भेजे गए थे। 72 घंटे में फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था।
17 दिन बाद भी सिर्फ 200 संस्थानों ने रिपोर्ट जमा की है। उनमें से भी 50 फीसदी रिपोर्ट में बड़ी खामियां मिलीं। किसी के पास बिल्डिंग का नक्शा नहीं था। किसी ने इलेक्ट्रिक वायरिंग का कॉलम खाली छोड़ा।
क्या होनी चाहिए सुरक्षा
किसी भी व्यावसायिक इमारत में फायर एनओसी और उसका नियमित नवीनीकरण जरूरी है। हर मंजिल पर स्मोक डिटेक्टर और पर्याप्त अग्निशामक यंत्र होने चाहिए।
कम से कम दो अलग-अलग आपातकालीन निकास द्वार और चौड़े गलियारे होने चाहिए। इमरजेंसी लाइटिंग और एग्जिट साइन बोर्ड भी अनिवार्य हैं।
जांच का यही पैटर्न
इन चारों शहरों में एक ही कहानी दिखती है। कहीं बड़ा हादसा होता है। निगम जागता है। कुछ दिन जांच चलती है। फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।
ये खबरें भी पढ़िए...
लखनऊ की कोचिंग में लगी आग, 14 लोगों की मौत, कई घायल
दिल्ली में बड़ा हादसा, लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में लगी आग, अब तक 21 लोगों की मौत
मुरैना रेल हादसा: प्रत्यक्षदर्शी महिला बोलीं- मोबाइल के चार्जर में लगी आग, जिससे मची भगदड़
भोपाल के हलालपुरा में पटाखा दुकान में लगी आग, 70 फीट ऊंची उठी लपटें