MP में कोचिंग सेंटरों पर सख्ती! वेबसाइट पर बतानी होगी फीस, CCTV और काउंसलिंग भी जरूरी

Amresh Kushwaha | Oct 25, 2026, 07:52 IST
मध्यप्रदेश में कोचिंग सेंटरों के लिए नए नियम।
मध्य प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के लिए नए नियम तैयार किए गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने इन नियमों का प्रारूप जारी किया है। इसका नाम मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 है। प्रस्तावित नियमों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर दिया गया है। कोचिंग सेंटरों को अपनी वेबसाइट पर जरूरी जानकारी देनी होगी।

इसमें फीस, शिक्षकों की योग्यता और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण शामिल होगा। विद्यार्थियों के लिए CCTV और मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग की व्यवस्था भी करनी होगी।



90 दिन में कराना होगा रजिस्ट्रेशन

प्रस्तावित नियमों के अनुसार कोचिंग संचालकों को 90 दिन में आवेदन करना होगा। रजिस्ट्रेशन तीन साल के लिए मान्य रहेगा। इसके बाद उसका नवीनीकरण कराना होगा।



एक रजिस्ट्रेशन दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। एक संस्थान की कई ब्रांच हैं तो हर ब्रांच अलग मानी जाएगी। प्रत्येक ब्रांच के लिए अलग रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होगी।



वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी

हर कोचिंग सेंटर को अपनी वेबसाइट बनानी होगी। इस पर विद्यार्थियों और अभिभावकों को जरूरी जानकारी मिलेगी।



  • संस्थान की स्थापना का वर्ष और शिक्षकों की संख्या।
  • शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के नाम।
  • मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता का विवरण।
  • कोचिंग में कराई जाने वाली परीक्षाओं की तैयारी।
  • फीस की पूरी जानकारी (Fee Structure)।
  • विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं।
  • दाखिला छोड़ने और फीस वापसी की नीति (Refund Policy)।
  • पिछले वर्षों के कोर्स और विद्यार्थियों की संख्या।
  • संस्थान के खुलने और बंद होने का समय।
  • सुरक्षा व्यवस्था और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया।
  • मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन की जानकारी।

इससे अभिभावक दाखिले से पहले अलग-अलग कोचिंग सेंटरों की जानकारी देख सकेंगे।



CCTV लगेंगे, लेकिन निजता रहेगी सुरक्षित

कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाने होंगे। कैमरे परिसर में निर्धारित उचित स्थानों पर लगाए जाएंगे। शौचालय और चेंजिंग रूम में कैमरों से रिकॉर्डिंग नहीं होगी। परामर्श कक्ष में भी रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होगी।



संस्थानों में बैठने की पर्याप्त जगह होनी चाहिए। साफ पेयजल और सफाई की व्यवस्था भी जरूरी होगी। प्राथमिक उपचार और आपातकालीन सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे। सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था करनी होगी। आने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रखना होगा। सुरक्षा इंतजामों की नियमित समीक्षा की जाएगी।



शिक्षक बनने के लिए ग्रेजुएशन जरूरी

कोचिंग सेंटर में पढ़ाने वाले ट्यूटर का स्नातक होना जरूरी होगा। प्रस्तावित नियमों में यही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय की गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए नियुक्तियों पर भी शर्तें रहेंगी। कुछ व्यक्तियों को शिक्षक या सहायक कर्मचारी नहीं बनाया जा सकेगा।



मानसिक स्वास्थ्य के लिए मिलेगी मदद

परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव रहता है। इसे देखते हुए काउंसलिंग की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। कोचिंग सेंटरों को योग्य मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता रखने होंगे। नियमित परामर्श सत्र और करियर मार्गदर्शन की व्यवस्था करनी होगी। अभिभावकों से भी विद्यार्थियों की समस्याओं पर बातचीत की जाएगी। संस्थानों को राज्य सरकार की मानसिक स्वास्थ्य नीति के अनुसार काम करना होगा।



जरूरी हेल्पलाइन नंबर

  • टेली-मानस: 14416
  • उमंग: 1800-11-5246
  • आपातकालीन सहायता: 112
  • चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098

जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं

कोचिंग सेंटर विद्यार्थियों के साथ भेदभाव नहीं कर सकेंगे। धर्म, जाति, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव प्रतिबंधित रहेगा।



मूलवंश या अन्य आधारों पर भी अलग व्यवहार नहीं किया जा सकेगा। इन आधारों पर विद्यार्थियों के अलग बैच नहीं बनाए जा सकेंगे।



पढ़ाई में प्रदर्शन के आधार पर भी अलग बैच बनाने से बचना होगा। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए परिसर में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।



शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहना होगा।



शिकायत के लिए लगेंगी पेटियां

विद्यार्थियों की शिकायतें सुनने के लिए अलग व्यवस्था होगी। कोचिंग सेंटरों में प्रमुख स्थानों पर शिकायत और सुझाव पेटियां लगेंगी।



इन पेटियों को नियमित अंतराल पर खोला जाएगा। विद्यार्थी लिखित या ऑनलाइन माध्यम से भी शिकायत कर सकेंगे।



जिला स्तर पर शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य शिकायतों के समाधान की व्यवस्था तैयार करना है।



कलेक्टर की अध्यक्षता में होगी निगरानी

कोचिंग सेंटरों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति बनेगी। इसके अध्यक्ष कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट होंगे। समिति में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी भी रहेंगे।



पंजीयन के लिए अलग अधिकृत प्राधिकारी की व्यवस्था होगी। राज्य स्तर पर भी निगरानी समिति बनाई जाएगी। यह समिति नियमों के पालन की समीक्षा करेगी। सरकार को जरूरी मानकों पर सलाह देगी। इसके साथ वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेगी।



कोचिंग सेंटरों के लिए नए नियमों का प्रारूप
कोचिंग सेंटरों के लिए नए नियमों का प्रारूप-II
कोचिंग सेंटरों के लिए नए नियमों का प्रारूप-III

रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर अपील कर सकेंगे

किसी कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन अस्वीकार या रद्द किया जा सकता है। नवीनीकरण अस्वीकार होने या पंजीयन निलंबित होने पर भी अपील का अधिकार रहेगा। संबंधित आदेश की सूचना मिलने के 30 दिन में अपील करनी होगी। यह अपील संभागायुक्त के सामने की जा सकेगी। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक सुनवाई के बाद 45 दिनों में अपील निपटाई जाएगी।



विद्यार्थियों और अभिभावकों को क्या फायदा?

नए नियमों से कोचिंग सेंटरों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। अभिभावकों को दाखिले से पहले फीस और सुविधाओं की जानकारी मिल सकेगी। शिक्षकों की योग्यता और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी भी उपलब्ध होगी। विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता और करियर मार्गदर्शन मिल सकेगा।



फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग ने इन नियमों का प्रारूप जारी किया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह लागू हो चुके नियम मानना सही नहीं होगा। अंतिम नियम लागू होने पर कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाने का लक्ष्य है।

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