मंत्री-पीएस के चलते फाइलों में उलझा 222 पदों का प्रमोशन, टैक्स विभाग में खाली पड़े पद
समझें क्या है पूरा मामला...
मध्य प्रदेश में कमर्शियल टैक्स विभाग में प्रमोशन विवाद गहरा गया है।
सीटीआई और टीए के बीच पुराना विवाद अटका हुआ है।
एसीटीओ के 222 पद खाली पड़े हैं।
जुलाई की प्रमोशन डेडलाइन भी बिना फैसले के निकल गई।
मंत्री और प्रमुख सचिव अभी तक फैसला नहीं ले पाए हैं।
मध्य प्रदेश के कमर्शियल टैक्स विभाग में प्रमोशन का मामला उलझ गया है। कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टर (सीटीआई) और टैक्स असिस्टेंट (टीए) के बीच सालों पुराना विवाद है। इस वजह से असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (एसीटीओ) के पद पर प्रमोशन रुक गया है। सरकार ने प्रमोशन की डेडलाइन जुलाई तय की थी। लेकिन यह डेडलाइन भी बिना फैसले के निकल गई।
क्या है पूरा विवाद
सीटीआई और टीए के मामले में दो विकल्प तैयार किए गए थे। इन पर फैसला विभागीय मंत्री जगदीश देवड़ा और प्रमुख सचिव अमित राठौर को लेना था। दोनों अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं। इसी वजह से एसीटीओ के 222 पदों पर प्रमोशन अटका हुआ है। विभाग में यह मामला अब बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।
सीटीआई का तर्क क्या है
इस पूरे विवाद की जड़ बहुत पुरानी है। सीटीआई का कहना है कि एसीटीओ के पद के असली हकदार वही हैं। उनका तर्क है कि टीए को गलत तरीके से बराबरी दी गई। सीटीआई की भर्ती राज्य शासन के नियमों के तहत होती है। इसके लिए एमपी पीएससी (Madhya Pradesh Public Service Commission) से प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू पास करना होता है। सीटीआई का कहना है कि यह एक कठिन प्रक्रिया है। इसकी तुलना टीए की भर्ती प्रक्रिया से नहीं की जा सकती।
टीए का पक्ष भी जानिए
टीए का पद साल 2008 में बनाया गया था। उस समय इन्हें एक वैकल्पिक परीक्षा और सीधी भर्ती से चुना गया। बाद में नियमों की व्याख्या करते हुए इन्हें सीटीआई के समकक्ष मान लिया गया। यही बात सीटीआई को नागवार गुजरी है। विभाग में सीटीआई की कुल संख्या 534 है। वहीं टीए की संख्या 488 है। यह आंकड़ा बताता है कि दोनों वर्ग काफी बड़े हैं।
192 पदों पर टीए दावेदार
सूत्रों के मुताबिक विभाग में एसीटीओ के कुल 432 पद हैं। इनमें से 222 पद फिलहाल खाली हैं। इन्हीं खाली पदों पर प्रमोशन प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि इनमें से 192 पदों पर टीए दावेदार बन गए हैं। इसके अलावा 17 पद जनजातीय वर्ग के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में सीटीआई के हिस्से सिर्फ चंद पद ही बचते हैं। यही असली विवाद की जड़ है।
मामला कोर्ट तक पहुंचा
सीटीआई का तर्क है कि टीए साल 2008 में विभाग में आए थे। अप्रैल 2013 में इन्हें सीटीआई के समकक्ष कर दिया गया। सीटीआई इसे गलत मानते हैं। उनका कहना है कि टीए का रिक्रूटमेंट मॉडल अलग है। इस वजह से वे प्रमोशन के लिए पात्र नहीं हैं।
यह मामला अब कोर्ट में भी पहुंच चुका है। विवाद सुलझाने के लिए एक कमेटी भी बनाई गई थी। लेकिन वह कमेटी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। सीटीआई इस मामले में प्रमुख सचिव को अब तक 250 प्रतिवेदन दे चुके हैं।
विभाग ने भेजे दो विकल्प
कमर्शियल टैक्स कमिश्नर की तरफ से मंत्री और प्रमुख सचिव को दो विकल्प भेजे गए हैं। पहला विकल्प यह है कि सीटीआई और टीए को मिलाकर एक सीनियोरिटी लिस्ट बना दी जाए। इसी लिस्ट के आधार पर प्रमोशन कर दिए जाएं। इसी बीच मंत्री ने एक और निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों वर्गों के कामकाज की तुलना करके देखी जाए। इसी आधार पर दूसरा प्रपोजल भी तैयार कर भेजा गया है। इसमें दोनों की भूमिका भी बताई गई है। अब इस पूरे मामले पर फैसला होना बाकी है।
सुपरसीड होगा एक पद
इस विवाद का एक दिलचस्प पहलू भी है। जून 2017 में एक नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इसके मुताबिक टीए को कराधान सहायक कहा गया। पदों की सूची में यह पद 9वें नंबर पर आता है। सीटीआई को राज्य कर निरीक्षक माना गया है। यह पद सूची में 8वें नंबर पर है। जिस एसीटीओ पद पर प्रमोशन होना है, उसे राज्य कर अधिकारी कहा जाता है।
यह पद सूची में 7वें नंबर पर आता है। अगर टीए को सीधे प्रमोट किया जाता है तो वह एक पद को सुपरसीड कर जाएगा। यानी बीच का एक पद पूरी तरह से लांघ दिया जाएगा। यही बात सीटीआई को सबसे ज्यादा आपत्तिजनक लगती है।
कितने पद खाली हैं
फिलहाल स्थिति यह है कि विभाग में प्रमोशन का पूरा मामला ठहरा हुआ है। एसीटीओ के 222 पद खाली पड़े हैं। इससे विभाग का रोजमर्रा का कामकाज भी प्रभावित हो सकता है। कर्मचारी संगठनों में भी इस देरी को लेकर नाराजगी है। अब सबकी नजर मंत्री और प्रमुख सचिव के अंतिम फैसले पर टिकी है।
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