MP कांग्रेस में ‘जिलाध्यक्ष संकट’: इस्तीफों की सियासत, गुटबाजी के बीच नेतृत्व घिरा
मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन को लेकर अंदरूनी हलचल अब खुलकर सामने आ रही है। जिलाध्यक्षों के इस्तीफे, कमजोर परफॉर्मेंस और बढ़ती गुटबाजी ने प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिलचस्प यह है कि जहां इस्तीफों की चर्चा तेज है, वहीं कुछ नेता इन खबरों से किनारा भी कर रहे हैं।
‘शक्ति प्रदर्शन’ के बाद खुली संगठन की परतें
प्रदेशभर में 4 दिन तक चला कांग्रेस का संगठनात्मक अभियान बाहर से मजबूत दिखा, लेकिन जमीनी रिपोर्ट ने तस्वीर बदल दी। कई जिलों में कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान और गुटबाजी साफ नजर आई। यानी मंच पर एकजुटता और मैदान में बिखराव—दोनों तस्वीरें साथ-साथ दिखीं।
कमजोर परफॉर्मेंस पर सख्ती, बदलाव के संकेत
प्रदेश नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा की है। इसमें कई जिलों का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर पाया गया। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली से मंजूरी मिलते ही कमजोर परफॉर्मेंस वाले जिलाध्यक्षों पर कार्रवाई हो सकती है। यानी संगठन में बड़ा फेरबदल अब दूर नहीं।
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इस्तीफों की चर्चा बनाम नेताओं के वर्जन
इस्तीफों को लेकर संगठन में अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है। ओंकार सिंह मरकाम (डिंडोरी) से जब इस्तीफे की पेशकश पर सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ तौर पर इससे इनकार कर दिया। उनका जवाब था—“आपको किसने बताया?”
वहीं मुकेश पटेल (आलीराजपुर) ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वे विधानसभा क्षेत्र में पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे, इसलिए पद छोड़ना उचित समझा। इन बयानों से साफ है कि इस्तीफों के पीछे कारण भी अलग-अलग हैं और सियासी संदेश भी।
कुछ जगह तय हटना, कुछ जगह खाली पद
सिंगरौली में कांग्रेस जिलाध्यक्ष का हटना लगभग तय माना जा रहा है। कुछ जिलों में पद पहले से ही खाली पड़े हैं। इससे संगठन की रफ्तार प्रभावित हो रही है और कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इन जिलाध्यक्षों पर एक्शन की चर्चा तेज
संगठन सर्जन के बाद जिन नामों पर कार्रवाई की चर्चा है, उनमें शामिल हैं:
- रायसेन – देवेंद्र पटेल
- हरदा – मोहन साई
- धार – स्वतंत्र जोशी
- आगर मालवा – विजयलक्ष्मी तंवर
- उमरिया – इंजीनियर विजय कुमार
- मऊगंज – हीरालाल कोले
- रतलाम – शांतिलाल वर्मा
- ग्वालियर ग्रामीण – प्रभुलाल जौहरे
इन नामों को लेकर प्रदेश संगठन में मंथन तेज हो गया है।
नेतृत्व पर उठते सवाल: आखिर वजह क्या?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिलाध्यक्षों के इस्तीफे और बदलाव की नौबत क्यों आ रही है?
- क्या प्रदेश नेतृत्व की पकड़ कमजोर पड़ रही है?
- क्या गुटबाजी पर लगाम नहीं लग पा रही?
- क्या फैसलों में देरी से असंतोष बढ़ रहा है?
ये सवाल अब संगठन के भीतर ही गूंजने लगे हैं।
जमीनी हकीकत: गाइडलाइन से ज्यादा गुट हावी
कई जिलों से यह फीडबैक मिला है कि संगठन तय नियमों के बजाय गुटों के हिसाब से चल रहा है। यही वजह है कि जिलाध्यक्षों पर दबाव बढ़ रहा है और कुछ नेता खुद ही पद छोड़ने या दूरी बनाने का रास्ता चुन रहे हैं।
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संगठन सृजन के बाद बड़ा ऑपरेशन तय
मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन सर्जन के बाद बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी है। कमजोर प्रदर्शन, गुटबाजी और नेतृत्व पर सवाल—इन सबके बीच कई जिलाध्यक्षों की कुर्सी खतरे में है। अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश नेतृत्व इस संकट को कैसे मैनेज करता है, क्योंकि यह सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि संगठन को फिर से खड़ा करने की असली परीक्षा है।