एमपी कांग्रेस का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बहिष्कार, करेंगे मौन सत्याग्रह, टीवी डिबेट से रहेंगे दूर
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रदेश कांग्रेस का बड़ा फैसला, अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बनाएंगे दूरी।
- उज्जैन जमीन मामले में तीन दिन कांग्रेस का मौन सत्याग्रह।
- कांग्रेस प्रवक्ता अब टीवी डिबेट में नहीं दिखेंगे।
- सीएम के परिवार से जुड़े जमीन मामले में कांग्रेस का बड़ा निर्णय।
- कांग्रेस के मीडिया बहिष्कार से मध्यप्रदेश की राजनीति हुई गर्म।
उज्जैन जमीन खरीद मामले में कांग्रेस मुख्यमंत्री पर हमलावर है। पार्टी के भीतर भी नेताओं के बयानों को लेकर मतभेद हैं। कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बहिष्कार का फैसला लिया है। पार्टी तीन दिन तक मौन सत्याग्रह करेगी। प्रवक्ता किसी भी टीवी डिबेट में हिस्सा नहीं लेंगे।
उज्जैन में जमीन खरीद को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस शुरू से ही इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव को घेर रही है। लेकिन पार्टी के अंदर भी अलग-अलग नेताओं के बयान सामने आए हैं। इससे कांग्रेस के भीतर खींचतान जैसी स्थिति बन गई है। अब इसी मामले को लेकर पार्टी ने एक बड़ा फैसला लिया है।
बहिष्कार का फैसला क्यों
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का बहिष्कार करने का फैसला किया है। पार्टी का आरोप है कि ज्यादातर टीवी चैनलों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं दिखाया। न तो इस पर ठीक से खबर चली और न कोई सार्थक बहस कराई गई।
कांग्रेस का कहना है कि यह जनहित से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसके बावजूद इसे वह अहमियत नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। इसी नाराजगी के बाद पार्टी ने विरोध जताने का यह रास्ता चुना है।
पार्टी ने अगले तीन दिनों तक मौन सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई जाएगी। कांग्रेस के अनुसार यह उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का तरीका है।
पत्र में क्या कहा गया
प्रदेश कांग्रेस समिति के संगठन प्रभारी महासचिव डॉ. संजय कमले ने इस बारे में पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े कथित भूमि घोटाले पर प्रदेशभर में चर्चा हो रही है। बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया पर इससे जुड़े तथ्य और दस्तावेज साझा कर रहे हैं। लोग लगातार इस मुद्दे पर सवाल भी उठा रहे हैं।
इसके बावजूद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया यह मुद्दा जनता तक ठीक से नहीं पहुंचा रहा। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनहित के मुद्दों की जगह ध्यान दूसरी खबरों पर मोड़ा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इससे जरूरी जानकारी जनता तक नहीं पहुंच पा रही। यही वजह है कि कांग्रेस ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
डिबेट से बनाई दूरी
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से असहमति जताने का फैसला किया है। अगले तीन दिनों तक पार्टी का कोई भी अधिकृत नेता या प्रवक्ता टीवी डिबेट में हिस्सा नहीं लेगा। सिर्फ अधिकृत प्रेस वार्ताओं को इसमें छूट दी गई है। यानी बाकी सभी मंचों पर पार्टी की भागीदारी नहीं होगी।
इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोई व्यक्तिगत आधिकारिक बयान भी नहीं दिया जाएगा। पार्टी के प्रवक्ता किसी भी टेलीविजन बहस में शामिल नहीं होंगे। इस तरह अगले तीन दिन पार्टी की तरफ से मीडिया को कोई बाइट नहीं मिलेगी।
किन्हें मिला निर्देश
यह निर्देश प्रदेश कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं को भेजा गया है। इसमें विधायक, प्रदेश पदाधिकारी और सभी प्रवक्ता भी शामिल हैं। जिला अध्यक्षों, मोर्चा संगठनों और विभागों-प्रकोष्ठों को भी यह निर्देश दिया गया है। साथ ही सभी जनप्रतिनिधियों को भी इसका पालन करने को कहा गया है।
इससे साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से ले रही है। संगठन के हर स्तर पर एक जैसा रुख अपनाने की कोशिश की जा रही है। यह भी संकेत है कि पार्टी आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और आगे बढ़ा सकती है।
सोशल मीडिया पर तेज चर्चा
कांग्रेस के पत्र में सोशल मीडिया का भी खास जिक्र किया गया है। पार्टी का कहना है कि नागरिक खुद इस मामले से जुड़े तथ्य साझा कर रहे हैं। लोग दस्तावेज और सवाल भी लगातार पोस्ट कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि जनता के बीच यह मुद्दा पहले से ही गरमाया हुआ है।
ऐसे में मीडिया के रवैये पर भी सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के इस कदम से यह बहस और तेज हो सकती है कि जनहित के मुद्दों को मीडिया कितनी जगह देता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस का यह कदम कितना असर दिखाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस पर क्या रुख अपनाता है।
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