गुटबाजी रोकने क्षेत्रीय फार्मूला, AI ट्रेनिंग से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक… MP कांग्रेस का बड़ा प्रयोग
मध्य प्रदेश कांग्रेस अब मिशन-2028 की जमीन तैयार करने में जुट गई है। लगातार चुनावी हार और संगठनात्मक कमजोरी के आरोपों के बीच कांग्रेस ने पहली बार प्रदेशभर में आवासीय प्रशिक्षण शिविर मॉडल लागू करने का फैसला किया है।
पार्टी का दावा है कि इससे संगठन बूथ स्तर तक मजबूत होगा, लेकिन अंदरखाने सबसे बड़ा फोकस एक और चीज पर है गुटबाजी और क्षेत्रीय खींचतान को कंट्रोल करना।
यही वजह है कि कांग्रेस ने इस बार एक नया रीजनल बैलेंस फॉर्मूला तैयार किया है। जिस क्षेत्र में शिविर होगा, वहां के बड़े नेताओं को ही मंच और जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि स्थानीय असंतोष न बढ़े और सभी गुटों को प्रतिनिधित्व का संदेश जाए।
कांग्रेस के इतिहास में यह पहला मौका माना जा रहा है, जब इतने बड़े स्तर पर आवासीय प्रशिक्षण शिविरों की श्रृंखला शुरू की जा रही है। अब यह प्रयोग कितना सफल होगा, इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे।
संगठन महामंत्री संजय कामले का दावा
प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री डॉ. संजय कामले ने कहा कि यह सिर्फ प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि संगठन को आधुनिक और मजबूत बनाने का अभियान है। उन्होंने कहा कि नए पदाधिकारियों को कांग्रेस की विचारधारा, संगठनात्मक अनुशासन, डिजिटल टेक्नोलॉजी और बूथ मैनेजमेंट की जानकारी दी जाएगी।
कामले के मुताबिक पार्टी चाहती है कि कार्यकर्ता ग्राउंड से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक प्रभावी तरीके से सक्रिय हों। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान से कांग्रेस का संगठन बूथ स्तर तक पहले से ज्यादा मजबूत और एक्टिव नजर आएगा।
विंध्य से शुरुआत, फिर उज्जैन-भोपाल तक विस्तार
कांग्रेस अपने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत विंध्य क्षेत्र से करने जा रही है। पहला तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर रीवा संभाग के जिलों को केंद्र में रखकर आयोजित होगा। इसके बाद उज्जैन में शिविर, भोपाल में प्रशिक्षण कैंप और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे।
अगले डेढ़ से दो महीने में 13 हजार मंडलम
कांग्रेस 1006 ब्लॉक नगर अध्यक्षों को ट्रेनिंग देने जा रही है। इस बार पार्टी ने रणनीति में अहम बदलाव किया है। पहले प्रशिक्षण में बाहरी नेताओं को बुलाया जाता था। अब क्षेत्रीय नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
विंध्य में विंध्य के नेता, मालवा में मालवा के नेता और ग्वालियर क्षेत्र में स्थानीय चेहरे मंच पर आएंगे। भोपाल में भी क्षेत्रीय नेतृत्व को मंच दिया जाएगा। कांग्रेस मानती है कि इससे स्थानीय नेताओं में उपेक्षा की भावना कम होगी और गुटबाजी नियंत्रित रहेगी।
अंदरखाने गुटबाजी रोकने की कवायद?
कांग्रेस में लंबे समय से क्षेत्रीय खींचतान और गुटीय राजनीति बड़ी चुनौती रही है। इसलिए संगठन इस बार बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि प्रशिक्षण शिविर शक्ति प्रदर्शन का मंच बन जाए। इसलिए बड़े नेताओं को क्षेत्रवार संतुलन के साथ समान भागीदारी दी जाएगी और अलग-अलग गुटों को प्रतिनिधित्व मिलेगा।
स्थानीय नेतृत्व को भी महत्व दिया जाएगा। संगठन सृजन के साथ “संगठन संतुलन” अब कांग्रेस की प्राथमिकता बन गया है। इस बार प्रशिक्षण केवल भाषण और विचारधारा तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस अब AI और ChatGPT भी सिखाएगी।
पहली बार कार्यकर्ताओं को AI (Artificial Intelligence), ChatGPT, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया नैरेटिव और ऑनलाइन प्रचार की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। पार्टी मानती है कि भाजपा के डिजिटल नेटवर्क का मुकाबला करने के लिए टेक्नोलॉजी की समझ जरूरी हो गई है।
क्या-क्या सिखाया जाएगा?
संगठनात्मक ट्रेनिंग में डॉ. संजय कामले कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक संगठन सक्रिय करने की रणनीति बताएंगे। ललित सेन बूथ मैनेजमेंट में मतदाता सूची और BLA-2 की भूमिका समझाएंगे। लखन घनघोरिया चुनावी रणनीति में प्रबंधन की बारीकियां बताएंगे। वैचारिक सत्र में रण विजय सिंह लोचब कांग्रेस की “सर्वधर्म समभाव” और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के खिलाफ नीति समझाएंगे।
विंध्य में कौन संभालेगा कमान?
पहले प्रशिक्षण शिविर में विंध्य क्षेत्र के बड़े नेताओं को प्रमुख भूमिका दी गई है। कमलेश्वर पटेल विंध्य की राजनीतिक चुनौतियों और कांग्रेस की रणनीति पर बात करेंगे।
अजय सिंह राहुल भैया कांग्रेस के इतिहास और भाजपा सरकार की नीतियों पर सत्र लेंगे। विवेक तन्खा संविधान और कांग्रेस की वैचारिक भूमिका पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। दूसरे दिन प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।
जीतू पटवारी के मुद्दे जातिगत जनगणना, सामाजिक समरसता, भारत जोड़ो यात्रा और नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान हैं। हरीश चौधरी का फोकस कांग्रेस विचारधारा, कार्यकर्ता आधारित राजनीति और संगठन के मानवीय मूल्यों पर है।
कांग्रेस क्यों बदल रही रणनीति?
लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस को एहसास हुआ है कि सिर्फ बड़े नेताओं की राजनीति से संगठन मजबूत नहीं होगा।
पार्टी अब बूथ स्तर तक सक्रिय ढांचा बनाने की कोशिश कर रही है। साथ ही डिजिटल राजनीति और सोशल मीडिया युद्ध में भी पीछे नहीं रहना चाहती। इसी वजह से यह पूरा अभियान मिशन-2028 की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या कांग्रेस का यह नया प्रयोग सफल होगा?
मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए यह सिर्फ प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि संगठन को दोबारा खड़ा करने की परीक्षा है। चुनौती केवल कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने की नहीं है। साथ ही गुटबाजी रोकना, स्थानीय नेताओं को संतुष्ट रखना, बूथ नेटवर्क मजबूत करना, डिजिटल लड़ाई में सक्रिय होना और कार्यकर्ताओं में भरोसा लौटाना भी चुनौती है। फिलहाल कांग्रेस ने एक नया प्रयोग शुरू कर दिया है। अब यह प्रयोग संगठन को मजबूती देगा या सिर्फ “राजनीतिक कैंप मैनेजमेंट” बनकर रह जाएगा, इसका फैसला आने वाला वक्त करेगा।
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