राज्यसभा चुनाव : कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु भेजा, फोन छीने

Amresh Kushwaha | Jun 09, 2026, 13:01 IST
महेश केवट और मीनाक्षी नटराजन
MP राज्यसभा चुनाव 2026 में BJP के तीसरे उम्मीदवार के बाद कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के डर से विधायकों को चार्टर प्लेन से बेंगलुरु भेजा जा रहा है। अब विधायक 18 जून को सीधे वोट डालने आएंगे।

समझें क्या है मामला...

मध्य प्रदेश (MP) से राज्यसभा की तीन सीटों पर 18 जून 2026 को मतदान होना है। BJP ने तीसरी सीट पर मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस की उम्मीदवार पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन हैं, जो राहुल गांधी की कोर टीम की सदस्य रही हैं।



एक सीट जीतने के लिए 58 वोट चाहिए, BJP के पास 164 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। BJP दो उम्मीदवार जिताने के बाद बची हुई करीब 48 वोटों से तीसरी सीट लड़ रही है- जिसके लिए उसे 10 अतिरिक्त वोट चाहिए।



बस यही 10 सीटें बीजेपी के लिए Mission-10 बन गया है। यानी लड़ाई ये है कि कैसे तो BJP कांग्रेस खेमे के 10 विधायकों से अपने उम्मीदवार के पक्ष में वोटिंग करवा ले और कांग्रेस की चुनौती है कि कैसे उसका एक भी विधायक न टूटे…



विधायकों के फोन छीने, बेंगलुरु भेजने की तैयारी

कांग्रेस विधायकों से उनके मोबाइल फोन ले लिए गए हैं। उन्हें चार्टर प्लेन से बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट किया जा रहा है। वजह? एक चुनाव। एक सीट। और BJP की एक ऐसी चाल, जिसने पूरे समीकरण को हिलाकर रख दिया है…



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यह आपसे क्यों जुड़ा है?

राज्यसभा वही सदन है, जहां देश के बड़े कानून पास होते हैं। जो पार्टी राज्यसभा में मजबूत होती है, वह बजट से लेकर संविधान संशोधन तक हर चीज को प्रभावित कर सकती है। MP से एक सीट जीतना मतलब सिर्फ एक नेता की कुर्सी नहीं, बल्कि यह संसद में आपके राज्य की आवाज है।



क्यों पड़ी बाड़ाबंदी की जरूरत

BJP की Mission-10 नामक गुप्त रणनीति ने कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है। इसे राजनीतिक गलियारों में BJP की तीसरी चाल भी कहा जा रहा है। इस चाल का सार समझना जरूरी है।



दरअसल, कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। मीनाक्षी नटराजन को जीत के लिए 58 वोट चाहिए, यानी गणित तो ठीक है। वहीं, BJP को तीसरी सीट के लिए 10 अतिरिक्त वोट चाहिए और वे कहां से आ सकते हैं? कांग्रेस के अपने विधायकों से। इसी को क्रॉस वोटिंग कहते हैं - जब आपका अपना विधायक दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दे दे।



सोचिए, यदि कांग्रेस के सिर्फ 7-8 विधायक भी भटक गए, तो मीनाक्षी नटराजन की सीट जा सकती है।



क्या हुआ और कैसे हुआ

BJP की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार रात महेश केवट का नाम घोषित किया था। उससे पहले शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई थी और नेता एकजुटता के दावे कर रहे थे।



अब कांग्रेस ने अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए बाड़ाबंदी की तैयारी की है। इसी योजना के तहत उन्हें बेंगलुरु शिफ्ट करने की तैयारी है।



इसीलिए कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने दो चार्टर प्लेन भेजे हैं। साथ में कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष भी भोपाल आए हैं। चर्चा है कि एमपी के कांग्रेस विधायक अब 10 दिन बेंगलुरु में ही रहेंगे।



विधायकों को 18 जून के मतदान के लिए सीधे MP विधानसभा लाने की योजना है, यानी बीच में कहीं भागने का मौका नहीं। बेंगलुरु में किसी सुरक्षित होटल या रिसॉर्ट में इन विधायकों के ठहरने की पूरी व्यवस्था कर दी गई है।



यह रणनीति नई नहीं है। यह एक जानी-पहचानी राजनीतिक चाल है, जिसे रिसॉर्ट पॉलिटिक्स कहते हैं। जब पार्टी को डर हो कि विधायक टूट सकते हैं, तो उन्हें किसी दूसरे राज्य के रिसॉर्ट में बंद कर दो, ताकि विरोधी पार्टी का कोई एजेंट उन तक पहुंच न सके।



और यही वह जगह है, जहां 2020 की याद ताजा हो जाती है।



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2020 का वह जख्म

2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के BJP में जाने के बाद 22 कांग्रेस विधायक बेंगलुरु में ही ठहरे थे, लेकिन उस वक्त वे BJP के मेहमान थे। कांग्रेस सरकार गिर गई और कमलनाथ को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। उस घटना का घाव अभी तक नहीं भरा है।



इस बार कांग्रेस खुद अपने विधायकों को वहीं ले जा रही है- लेकिन बचाने के लिए।



कौन-कौन हैं इस खेल में

कांग्रेस की तरफ से प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सक्रिय हैं। कांग्रेस ने तेलंगाना और कर्नाटक के संगठनों को भी तैयार रहने के संकेत दिए हैं। BJP की तरफ से महेश केवट OBC और मछुआ समाज के प्रतिनिधि हैं।



दोनों तरफ की बात

कांग्रेस का तर्क सीधा है: हमारे पास 64 वोट हैं जो कि 58 से ज्यादा हैं। बाड़ाबंदी सिर्फ सावधानी है, कमजोरी नहीं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं।



BJP का तर्क भी है- और वह कमजोर नहीं है। BJP के पास 164 विधायक हैं। दो उम्मीदवार जिताने के बाद बचे 48 वोट और कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायक मिल जाएं, तो तीसरी सीट मुमकिन है। महेश केवट का OBC चेहरा कुछ विधायकों को आकर्षित कर सकता है।



कौन सही है? यह 18 जून को पता चलेगा।



आगे क्या होगा

18 जून को वोटिंग है। अगले कुछ दिन दोनों पार्टियों के लिए बेहद नाजुक हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि एक भी विधायक टूटे नहीं, जबकि BJP की कोशिश है कि कम से कम 10 वोट खींच लिए जाएं। यदि BJP तीसरी सीट जीत लेती है, तो MP में कांग्रेस की साख को बड़ा धक्का लगेगा। वहीं, मीनाक्षी नटराजन जीत जाती हैं, तो कांग्रेस इसे 2020 के बाद की वापसी के तौर पर दिखाएगी।



एक बात जो आप नहीं जानते थे

रिसॉर्ट पॉलिटिक्स सिर्फ भारत में नहीं होती। अमेरिका में भी quorum busting होती है, जब अल्पमत दल के विधायक किसी दूसरे राज्य भाग जाते हैं ताकि वोट न हो सके। साल 2003 में Texas के डेमोक्रेट्स Oklahoma और फिर New Mexico भाग गए थे। तब भी बात वही थी - संख्या बल से बचाव। भारत में रिसॉर्ट, अमेरिका में मोटल - तरीका अलग, डर एक जैसा।



18 जून को होगा चुनाव

राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल तय हो चुका है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून थी। नामांकन पत्रों की जांच आज यानी 9 जून को होगी और नाम वापसी की अंतिम तारीख 11 जून रखी गई है। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। यानी 18 जून की शाम तक तस्वीर साफ हो जाएगी।



मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या के अनुसार दोनों सीटें पार्टी के खाते में आना लगभग तय माना जा रहा है।



FAQ

  1. क्रॉस वोटिंग क्या होती है?
    क्रॉस वोटिंग तब होती है जब किसी पार्टी का विधायक पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार की जगह विरोधी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दे देता है। राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता, इसलिए इसे रोकना कानूनी तौर पर मुश्किल है। इसीलिए पार्टियां बाड़ाबंदी का सहारा लेती हैं।
  2. MP में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कितने वोट चाहिए?
    MP विधानसभा में 230 सदस्य हैं। तीन सीटों के लिए चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, जो गणितीय रूप से काफी हैं- बशर्ते सभी वोट एकजुट रहें।
  3. बाड़ाबंदी में विधायकों के फोन क्यों छीने जाते हैं?
    विरोधी पार्टी के नेता सीधे संपर्क करके विधायकों को प्रलोभन या दबाव दे सकते हैं। फोन छीनने से यह संपर्क टूट जाता है। यह पार्टी अनुशासन की एक चरम (extreme) रणनीति है, जो भारत में 2000 के दशक से राज्यसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में उपयोग होती है।

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