कांग्रेस का प्रोजेक्ट M : अल्पसंख्यक महिलाओं की टीम बनाई, रैली की बजाय समुदाय में करेगी काम

Aman Vaishnav | May 09, 2026, 11:49 IST
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एमपी कांग्रेस ने अल्पसंख्यक महिलाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए 09 मई को प्रोजेक्ट M लॉन्च किया है। इसके लिए 160 महिलाओं की टीम बनाई गई है। ये धरना-प्रदर्शन में नहीं, बल्कि समुदाय में कांग्रेस का संदेश पहुंचाएंगी।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए 09 मई को प्रोजेक्ट M शुरू किया है। राज्य स्तर पर लगभग 160 महिलाओं की टीम तैयार की गई है। इसमें मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समाज की महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं रैली-आंदोलन की बजाय समुदाय में काम करेंगी। अच्छे प्रदर्शन पर निकाय चुनाव में टिकट मिल सकता है।



एमपी कांग्रेस का नया दांव

मध्य प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। पार्टी अब नई रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। इसके तहत अल्पसंख्यक महिलाओं को पार्टी से जोड़ने की खास पहल शुरू की गई है। इस पहल को प्रोजेक्ट M (माइनॉरिटी फोर्स) नाम दिया गया है।



यह कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है। जानकारी के अनुसार पिछले सात महीनों से पार्टी के अंदर इस रणनीति पर काम चल रहा था। कई चुनौतियों के बाद एक मजबूत टीम तैयार हो सकी है।



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क्या है प्रोजेक्ट M?

प्रोजेक्ट M के तहत राज्य स्तर पर लगभग इन महिलाओं का एक संगठित समूह तैयार किया गया है। यह समूह पूरे प्रदेश में अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं को कांग्रेस से जोड़ने का काम करेगा। प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने शनिवार, 09 मई को की।



कांग्रेस नेत्री आरिफा खान ने कहा कि, महिलाओं की राजनीति में सहज भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसमें ऐसी महिलाओं को जोड़ा जा रहा है, जो कुछ करना चाहती हैं। साथ ही नेतृत्व क्षमता रखती हैं और राजनीति में सक्रिय भागीदारी की इच्छा रखती हैं।



धरना-प्रदर्शन से दूर, समुदाय में करेंगी काम

कांग्रेस का मानना है कि अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं की राजनीति में भागीदारी अभी बहुत कम है। आमतौर पर चुनिंदा परिवारों की महिलाएं ही सक्रिय राजनीति में दिखती हैं। इसीलिए प्रोजेक्ट M में इन महिलाओं की भूमिका अलग तरह से तय की गई है।



ये महिलाएं कांग्रेस के धरना, प्रदर्शन या आंदोलन जैसे भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगी। इनका काम अपने-अपने समुदाय में जाकर अन्य महिलाओं को कांग्रेस से जोड़ना होगा।



साथ ही राजनीतिक भागीदारी के लिए प्रेरित करना होगा। यह तरीका काफी हद तक RSS (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) की जमीनी संगठन शैली से मिलता-जुलता है, जहां कार्यकर्ता शांत तरीके से समाज में संदेश पहुंचाते हैं।



डॉ. संजय कामले ने बताई पूरी योजना

एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने कहा कि, प्रोजेक्ट M के तहत अल्पसंख्यक वर्ग में शामिल मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समाज की महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा।



उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार महिलाओं को संविधान के अनुरूप सम्मान और उचित स्थान देने की बात करते रहे हैं।



संजय कामले ने आगे कहा छह महीने पहले अलग-अलग समाजों के साथ काम करने की योजना पर विचार शुरू हुआ था। अब एक मजबूत और संगठित टीम बनकर तैयार है।



पहली बार भोपाल आएंगी कई महिलाएं

इस प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग के लिए इन महिलाओं को पहली बार भोपाल बुलाया गया है। खास बात यह है कि इनमें से कई महिलाएं पहली बार किसी कांग्रेस कार्यालय में कदम रख रही हैं। यह अपने आप में एक बड़ा बदलाव है।



निकाय चुनाव में टिकट का मौका

प्रोजेक्ट M सिर्फ संगठन बनाने तक सीमित नहीं है। जो महिलाएं अच्छा काम करेंगी, उन्हें अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका दिया जा सकता है।



महिलाओं की क्षमता और रुचि के आधार पर पार्टी में आगे जिम्मेदारियां भी सौंपी जाएंगी। यानी यह प्रोजेक्ट महिलाओं के लिए राजनीति में करियर की एक नई राह भी खोल सकता है।



FAQ

  1. प्रोजेक्ट M क्या है और इसे किसने शुरू किया?
    प्रोजेक्ट M, मध्य प्रदेश कांग्रेस की एक खास पहल है। इसका मकसद अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं को पार्टी से जोड़ना है। राज्य स्तर पर करीब 160 महिलाओं की टीम तैयार की गई है। इसमें मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समाज की महिलाएं शामिल हैं। इसे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने लॉन्च किया। इन महिलाओं की भूमिका धरना-प्रदर्शन में नहीं, बल्कि समुदाय में काम करने की होगी।
  2. प्रोजेक्ट M से जुड़ी महिलाओं को क्या फायदा मिलेगा?
    प्रोजेक्ट M से जुड़ी महिलाओं को राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। अच्छा काम करने वाली महिलाओं को अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस का टिकट मिल सकता है। उनकी क्षमता और रुचि के आधार पर पार्टी में जिम्मेदारियां भी सौंपी जाएंगी। यह उन महिलाओं के लिए राजनीति में प्रवेश का एक व्यावहारिक रास्ता है, जो पहले कभी इस क्षेत्र में नहीं आई थीं।

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