मप्र कांग्रेस का सोशल मीडिया वॉरियर अभियान, बूथ लेवल तक बनेगी डिजिटल टीम
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया वॉरियर अभियान की शुरुआत की है।
- अभियान में युवाओं, कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को जोड़ा जाएगा।
- हर विधानसभा और बूथ स्तर तक डिजिटल टीम बनाने का लक्ष्य है।
- जून अंत तक पूरी टीम तैयार करने की योजना है।
- पुराने नेशनल टैलेंट हंट की सफलता पर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं।
डिजिटल मोर्चे पर कांग्रेस का नया दांव
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) कांग्रेस अब चुनावी लड़ाई को सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी ने सोशल मीडिया को अपनी राजनीतिक रणनीति का बड़ा हथियार मान लिया है। इसी सोच के साथ "सोशल मीडिया वॉरियर अभियान" की शुरुआत की गई है। यह अभियान मप्र कांग्रेस के सोशल मीडिया एवं आईटी (Information Technology) विभाग की अगुआई में चल रहा है।
पार्टी नेताओं का दावा है कि हर विधानसभा क्षेत्र और बूथ स्तर तक एक सक्रिय डिजिटल नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। यह नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कांग्रेस की आवाज को मजबूती से रखेगा।
युवाओं को कांग्रेस दे रही सीधा मंच
कटनी में जिला कांग्रेस कार्यालय में हुई पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष एडवोकेट अमित शुक्ला ने कहा कि यह अभियान युवाओं को कांग्रेस से जुड़ने का सीधा, खुला और सरल मौका दे रहा है। उनके मुताबिक अभियान का मकसद सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को राजनीतिक संघर्ष में सकारात्मक भूमिका देना है।
सीधी जिले में भी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ज्ञान सिंह की अध्यक्षता में इसी तरह की बैठक और प्रेस वार्ता हुई। बैतूल में भी जिला कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग ने अभियान की शुरुआत की। मप्र कांग्रेस कमेटी सोशल मीडिया विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष सुमीत गुगनानी ने बैतूल में अभियान की रूपरेखा और उद्देश्य साझा किए।
किन लोगों को जोड़ना चाहती है कांग्रेस
यह अभियान सिर्फ राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए नहीं है। इसमें उन सभी को जगह दी जाएगी जो सोशल मीडिया पर किसी न किसी रूप में सक्रिय हैं। कंटेंट राइटर्स, वीडियो एडिटर्स, ग्राफिक डिजाइनर्स, कार्टूनिस्ट, कवि, गजलकार, ब्लॉगर्स, मोटिवेशनल स्पीकर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स सभी को इस अभियान में शामिल होने का न्योता है।
लोक कलाकार, सोशल वर्कर्स और एंटरटेनमेंट से जुड़े लोग भी इसका हिस्सा बन सकते हैं। फ्रीलांस पत्रकार, न्यूज एंकर और इंडिपेंडेंट रिपोर्टर्स के लिए भी एक सीधा संवाद मंच तैयार करने की बात कही गई है। महिलाओं को भी सोशल मीडिया के जरिए सक्रिय भूमिका देने की खास कोशिश है।
1 से 3 जून तक जिला स्तर पर विस्तार
प्रदेश स्तर पर अभियान शुरू होने के बाद जिला स्तर पर इसे फैलाने की योजना तेजी से लागू हुई। 1 से 3 जून के बीच जिला कांग्रेस अध्यक्षों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की जानकारी दी। इसके बाद ब्लॉक और बूथ स्तर तक आवेदन प्रक्रिया पहुंचाने का काम शुरू हुआ। आवेदन प्रक्रिया गूगल फॉर्म के जरिए की जा रही है और यह करीब एक महीने तक चलेगी। जून के अंत तक पूरी टीम को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है।
पुरानी प्रतिभाएं कहां गईं?
इस नए अभियान के साथ एक जरूरी राजनीतिक सवाल भी खड़ा हो गया है। कांग्रेस पहले भी "नेशनल टैलेंट हंट" जैसे कार्यक्रम चला चुकी है। उस कार्यक्रम में करीब 850 आवेदन आए थे, लेकिन आधे ही इंटरव्यू तक पहुंच सके। चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठे थे। यह कभी स्पष्ट नहीं हो सका कि उन चुने हुए लोगों को संगठन में कोई ठोस जिम्मेदारी मिली या नहीं। अब नया अभियान आने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या पुरानी पहल अपेक्षित नतीजे नहीं दे सकी? राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस की डिजिटल मजबूरी मान रहे हैं।
भाजपा के मुकाबले डिजिटल संघर्ष
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस को सोशल मीडिया पर भाजपा (Bharatiya Janata Party) के मुकाबले लंबे समय से कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। भाजपा का डिजिटल कैडर मध्यप्रदेश में काफी मजबूत माना जाता है। यही वजह है कि कांग्रेस पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे से आगे बढ़कर डिजिटल दुनिया के प्रभावशाली चेहरों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रही है।
पार्टी का दावा है कि यह केवल चुनावी अभियान नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए युवाओं को मंच देने की पहल है। संजय कामले और चंचलेश व्यास जैसे सोशल मीडिया विभाग के प्रदेश पदाधिकारियों ने कहा कि इस अभियान से युवाओं को संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी कोशिश होगी।
अभियान की सफलता अनिश्चित
हालांकि सवाल अब भी बना हुआ है। अगर पुराने कार्यक्रमों की समीक्षा और परिणाम सामने नहीं आते, तो नए अभियान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते रहेंगे। जब तक यह नहीं पता चलता कि बूथ स्तर पर चुने गए वॉरियर्स कितना असर करेंगे, तब तक यह कहना मुश्किल है कि यह अभियान कांग्रेस की डिजिटल ताकत बढ़ाएगा या महज एक और संगठनात्मक प्रयोग बनकर रह जाएगा। जवाब आने वाले महीनों में ही मिलेगा।
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