एमपी के राजपत्रित अफसर भ्रष्टाचार में सबसे आगे, लोकायुक्त ने किया खुलासा

Aman Vaishnav | Jul 12, 2026, 14:30 IST
एमपी के राजपत्रित अफसर
मध्य प्रदेश लोकायुक्त की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य में सिर्फ 8% राजपत्रित अधिकारियों पर 25% भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो भ्रष्टाचार के हर एक छापे में औसतन 98 लाख रुपए की कमाई उजागर हुई है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में राजपत्रित अधिकारी कुल स्टाफ का सिर्फ 8 प्रतिशत हैं।
  • लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में उनकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है।
  • 1982 से मई 2026 तक सात हजार 717 भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए हैं।
  • छापों में अब तक 949 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति मिली है।
  • हर केस में औसतन 98 लाख रुपए की संपत्ति सामने आई है।

राजपत्रित अफसर भ्रष्टाचार में 25% हिस्सा

मध्य प्रदेश में सरकारी अफसरों की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राजपत्रित अधिकारी कुल कर्मचारियों में सिर्फ 8 प्रतिशत हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में उनकी भागीदारी 25 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। यह जानकारी लोकायुक्त संगठन की रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।



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हर चौथा आरोपी बड़ा अफसर

दरअसल लोकायुक्त संगठन ने 1982 से मई 2026 तक के आंकड़े जारी किए हैं। इस दौरान भ्रष्टाचार के कुल सात हजार 717 मामले दर्ज हुए। इनमें से एक हजार 954 यानी 25 प्रतिशत आरोपी राजपत्रित अधिकारी निकले हैं।



जबकि प्रदेश में कुल छह लाख सात हजार 158 सरकारी कर्मचारियों में से राजपत्रित अफसर करीब 50 हजार ही हैं। यानी संख्या के हिसाब से वे सिर्फ 8 प्रतिशत हैं।



इसका मतलब साफ है। बड़े पद पर बैठे अफसरों में भ्रष्टाचार की दर आम कर्मचारियों से कहीं ज्यादा है। मौजूदा 50 हजार राजपत्रित अफसरों में से एक हजार 854 यानी करीब 4 प्रतिशत के खिलाफ अभी भी अलग-अलग धाराओं में मामले दर्ज हैं।



इनमें से ज्यादातर कोर्ट में विचाराधीन हैं। कुछ मामलों में फैसला आ चुका है और कुछ की जांच अभी चल रही है।



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छापों में मिली अरबों की संपत्ति

रिपोर्ट के अनुसार अब तक 962 छापों के मामले दर्ज किए गए हैं। इन छापों में कुल 949 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति उजागर हुई है।



वहीं हर केस के हिसाब से देखा जाए तो औसतन 98 लाख रुपए की संपत्ति मिली है। पिछले 20 साल में ही 789 करोड़ रुपए की संपत्ति पकड़ी गई है।



छापों के आंकड़े बताते हैं कि 2011-12 में सबसे ज्यादा 41 छापे हुए थे, जिनमें 106 करोड़ रुपए मिले थे। इसके बाद के सालों में छापों की संख्या और मिली संपत्ति में उतार-चढ़ाव देखा गया है।



राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध सर्वाधिक दर्ज अपराध

वर्षपंजीबद्ध अपराध
2013-14397
2014-15359
2015-16428
2017-18278
2019-20265

सबसे अधिक छापों वाले वर्ष

वर्षछापों की संख्यामिली संपत्ति
2011-1241106 करोड़ रुपए
2012-133075 करोड़ रुपए
2014-153992 करोड़ रुपए
2019-203149 करोड़ रुपए
2022-232318.59 करोड़ रुपए

अराजपत्रित कर्मचारियों पर भी कम नहीं मामले

सिर्फ बड़े अफसर ही नहीं, अराजपत्रित कर्मचारियों के खिलाफ भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार अराजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध पांच हजार 763 मामले दर्ज हैं। वहीं अन्य श्रेणी के कर्मचारियों पर 341 मामले दर्ज किए गए हैं।



पंजीबद्ध अपराधों में ज्यादातर मामले आय से अधिक संपत्ति, रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाने और पद के दुरुपयोग से जुड़े हैं। खास बात यह है कि ये आंकड़े सिर्फ लोकायुक्त संगठन के हैं।



इसमें आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और जिला पुलिस बल के मामले शामिल नहीं हैं। इन्हें जोड़ लिया जाए तो कुल संख्या करीब 20 प्रतिशत और बढ़ सकती है।



तीन एजेंसियां, फिर भी नहीं रुक रहा भ्रष्टाचार

बता दें कि मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार रोकने के लिए तीन प्रमुख संस्थाएं काम करती हैं। पहली जिला पुलिस बल, दूसरी लोकायुक्त और तीसरी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ। इतनी एजेंसियों के बावजूद भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही है।



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