संसद में गूंजा एमपी का जहरीला कफ सिरप कांड, सांसद विवेक तन्खा ने सरकार को घेरा,प्रदेश के 35 लाइसेंस रद्द
News in short
- छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप कांड में 35 से अधिक बच्चों की मौत का मामला राज्यसभा में उठा।
- सांसद विवेक तन्खा ने दवाओं की गुणवत्ता और नियामक खामियों पर सरकार से जवाब मांगा।
- केंद्र सरकार ने बताया कि देशभर में 1100 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं की जांच की गई।
- मध्य प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में 40 हजार से अधिक खाद्य नमूनों की जांच हुई।
- मानकों का उल्लंघन करने पर एमपी में 35 लाइसेंस रद्द किए गए।
News in detail
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत का मामला एक बार फिर संसद में गूंजा। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने दवाओं की गुणवत्ता और नियामक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। सरकार ने जवाब में बताया कि देशभर में कफ सिरप निर्माताओं पर बड़े स्तर पर जांच और कार्रवाई की गई है।
छिंदवाड़ा कांड को लेकर संसद में उठे तीखे सवाल
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप के सेवन से 35 से अधिक मासूम बच्चों की मौत का दर्दनाक मामला एक बार फिर संसद में चर्चा का विषय बना। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इस घटना को देश की दवा निगरानी प्रणाली की गंभीर विफलता बताते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि क्या इस तरह की घटनाएं दवाओं की गुणवत्ता जांच और नियामक तंत्र में बड़ी खामियों की ओर इशारा करती हैं।
केंद्र सरकार ने पेश की कार्रवाई की रिपोर्ट
सांसद के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से विस्तृत जानकारी दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि छिंदवाड़ा जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए देशभर में कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों की सघन जांच कराई गई है। सरकार के अनुसार 1100 से अधिक निर्माताओं की जांच की गई, ताकि गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
960 औषधि परिसरों का निरीक्षण, 860 से अधिक कार्रवाई
सरकार ने बताया कि दिसंबर 2022 से अब तक देशभर में 960 से अधिक औषधि निर्माण परिसरों का जोखिम आधारित निरीक्षण किया गया। इस जांच में कई जगह गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद 860 से अधिक दंडात्मक कार्रवाई की गई। इन कार्रवाइयों में कारण बताओ नोटिस जारी करना, उत्पादन पर रोक लगाना और लाइसेंस रद्द करना जैसी सख्त कार्रवाई शामिल है।
खाद्य सुरक्षा के मामलों में यूपी सबसे आगे
खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून के तहत की गई कार्रवाई में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान प्रदेश में 30,380 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इसी अवधि में 14,920 सिविल मामलों में पेनल्टी लगाई गई, जो देश में सबसे अधिक है। पिछले तीन वर्षों में राज्य में 629 आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा भी सुनाई गई है।
मध्यप्रदेश में भी मिलावटखोरों पर कार्रवाई तेज
मध्यप्रदेश में भी खाद्य और औषधि सुरक्षा को लेकर अभियान तेज किया गया है। वर्ष 2022 से 2025 के बीच राज्य में कुल 40,425 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इस दौरान 6,443 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 139 आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। नियमों का पालन न करने वाले व्यवसाय संचालकों पर कार्रवाई करते हुए राज्य में तीन वर्षों के दौरान 35 लाइसेंस रद्द किए गए हैं।
दवा सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाने का दावा
सरकार का कहना है कि दवा निर्माण और वितरण प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। राज्य सरकारों और नियामक एजेंसियों के साथ मिलकर कफ सिरप निर्माताओं की गहन जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके और आम लोगों को सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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