अनुराग जैन बने नीति आयोग के CEO, अब MP में मुख्य सचिव की कुर्सी पर किसकी ताजपोशी?
जिन अटकलों की चर्चा कई दिनों से सत्ता और नौकरशाही के गलियारों में थी, आखिर उन पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को नीति आयोग का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त कर दिया गया है। इसके साथ ही लगभग साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश को अब नया मुख्य सचिव मिलेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश की सबसे अहम प्रशासनिक कुर्सी पर आखिर किसे बैठाया जाएगा?
मुख्य बातें
- केंद्र सरकार ने अनुराग जैन को नीति आयोग का CEO नियुक्त किया।
- लंबे समय से उनके दिल्ली जाने या नई जिम्मेदारी मिलने के कयास लगाए जा रहे थे।
- नियुक्ति के बाद मध्य प्रदेश में नए मुख्य सचिव की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है।
- वरिष्ठ IAS अधिकारियों के बीच दावेदारी तेज हो गई है।
- अशोक बर्णवाल, राजेश राजौरा और दिल्ली में पदस्थ पंकज अग्रवाल समेत कई नाम चर्चा में हैं।
- अंतिम फैसला केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद होगा।
कयासों पर लगी मुहर
पिछले कई सप्ताह से यह चर्चा चल रही थी कि अनुराग जैन को या तो केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी या फिर उन्हें नीति आयोग का CEO बनाया जाएगा। अब केंद्र सरकार के आदेश ने इन अटकलों को खत्म कर दिया है।
दिलचस्प बात यह भी है कि अनुराग जैन को सेवा विस्तार मिल चुका था। रिटायरमेंट के बाद उन्हें एक्सटेंशन भी दिया गया था। ऐसे में सरकार ने उन्हें नई भूमिका देकर नीति आयोग भेजने का फैसला किया।
सबसे बड़ा सवाल- MP का नया मुख्य सचिव कौन?
अनुराग जैन का कार्यकाल अगस्त में पूरा हो रहा है, लेकिन इसके पहले ही उनकी नियुक्ति नीति आयोग में हो गई है। ऐसे में जब भी वे नया दायित्व संभालेंगे, उसके फौरन बाद नए मुख्य सचिव की नियुक्ति कर दी जाएगी।
वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर कई IAS अधिकारी मुख्य सचिव पद के दावेदार माने जा रहे हैं। इनमें राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, मनु श्रीवास्तव के नाम चर्चा में हैं। दिल्ली में पदस्थ अफसरों में से किसी की लॉटरी खुलती है तो इनमें पंकज अग्रवाल, वीएल कांटाराव के नाम प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव जल्द ही मुख्य सचिव के लिए दावेदार अफसरों के नाम का पैनल लेकर दिल्ली जाएंगे। दिल्ली हाईकमान की सहमति के बाद ही प्रदेश के नए सीएस के नाम पर मुहर लगेगी।
मुख्यमंत्री की पसंद या केंद्र की मुहर?
सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि नया मुख्य सचिव मुख्यमंत्री की पसंद से बनेगा या फिर वरिष्ठता और केंद्र सरकार की सहमति के आधार पर नाम तय होगा। प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अंतिम फैसला केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।
क्या फिर दोहराएगा पुराना इतिहास?
मध्य प्रदेश की नौकरशाही पहले भी मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर ऐसे दौर देख चुकी है। पिछली बार भी अनुराग जैन के सेवा विस्तार को लेकर लंबे समय तक असमंजस रहा था।
उस दौरान नए मुख्य सचिव के नाम लगभग तय मान लिए गए थे। यहां तक कि कुछ अधिकारियों को बधाइयां और गुलदस्ते तक मिलने की चर्चा रही। लेकिन बाद में घटनाक्रम बदल गया और पूरा समीकरण पलट गया। अब एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
आगे क्या होगा?
नीति आयोग में अनुराग जैन की नई पारी शुरू होने के साथ ही मध्य प्रदेश की नौकरशाही में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रदेश का अगला मुख्य सचिव कौन होगा। क्या वरिष्ठता का फार्मूला चलेगा, मुख्यमंत्री की पसंद को प्राथमिकता मिलेगी या फिर केंद्र कोई अलग संदेश देगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। फिलहाल इतना तय है कि अनुराग जैन की दिल्ली में नई जिम्मेदारी ने भोपाल के प्रशासनिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।
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