मोबाइल-लैपटॉप की फोरेंसिक जांच में देरी से अटके 3818 संगीन केस, अब 87 करोड़ से बनेंगी नई साइबर लैब
मध्य प्रदेश में न्याय की राह देख रहे कई पीड़ितों के लिए डिजिटल साक्ष्य सबसे बड़ा रोड़ा बन गए हैं। साल 2015 से लेकर अब तक स्टेट साइबर विंग की फोरेंसिक लैब में कुल 8 हजार 369 केस जांच के लिए भेजे गए थे।
इनमें 14 हजार 946 मोबाइल और लैपटॉप जैसे डिवाइस शामिल थे। इनमें से अब तक सिर्फ 4 हजार 551 मामलों की जांच ही पूरी हो सकी है। जबकि 3 हजार 818 गंभीर केस अभी भी लंबित पड़े हैं।
जब तक जब्त किए गए फोन या कंप्यूटर की जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं होती, तब तक पुलिस न तो ठीक से चालान पेश कर पाती है। न ही अदालत में ट्रायल आगे बढ़ पाता है।
फोरेंसिक जांच में देरी का असर
केस 1: भिंड का दुष्कर्म मामला (2022)
भिंड जिले में साल 2022 में एक महिला से ज्यादती की गई थी। आरोपी ने पीड़िता का नहाते समय वीडियो बना लिया था।
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल तो जब्त कर लिया, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी फोरेंसिक लैब इसकी जांच पूरी नहीं कर पाई। नतीजा यह है कि आरोपी को अब तक सजा नहीं मिल सकी है।
केस 2: इंदौर में दो टुकड़ों में मिली लाश (2022)
साल 2022 में इंदौर के जूनी इंदौर इलाके में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था, जिसका कमर से नीचे का हिस्सा कटा हुआ था। पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए थे।
इनसे कत्ल और सबूत मिटाने से जुड़े बड़े खुलासे होने की उम्मीद थी। मोबाइल की फोरेंसिक जांच न होने से इन डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में प्रमाणित नहीं किया जा सका है।
केस 3: ड्रग सिंडिकेट और लूटे गए मोबाइल (2021 और 2023)
साल 2021 में कोलार रोड पुलिस ने 79 किलोग्राम गांजे के साथ एक ट्रक चालक को पकड़ा था। पूरे ड्रग नेटवर्क का पता लगाने के लिए उसका मोबाइल जांच के लिए भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट आज तक नहीं आई।
वहीं साल 2023 में इंदौर क्राइम ब्रांच ने चोरी और लूट के मोबाइल नेपाल भेजने वाले गिरोह से 11 फोन और 2 लैपटॉप जब्त किए थे। इनकी जांच न होने से पूरे गिरोह का नेटवर्क और पैसों के लेन-देन का ब्योरा सामने नहीं आ पाया है।
सरकार की नई तैयारी
लगातार बढ़ते दबाव और सालों से अटकी जांच को रफ्तार देने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस और साइबर विंग ने एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत पूरे प्रदेश में तीन मुख्य स्तरों पर काम किया जा रहा है।
हर जिले में डेडिकेटेड साइबर थाने
प्रदेश के हर जिले में एक पूर्ण साइबर थाना खोला जाएगा और सामान्य थानों में 1-1 साइबर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। इसका मुख्य मकसद पीड़ितों को थाने के स्तर पर ही तुरंत तकनीकी मदद दिलाना और जिले में ही एफआईआर दर्ज करना है।
स्टेट साइबर फोरेंसिक लैब और रीजनल यूनिट्स
भोपाल में मुख्य स्टेट साइबर फोरेंसिक लैब बनेगी और सभी संभागों में रीजनल यूनिट्स तैयार की जाएंगी। इसके लिए 532 नए पदों की मांग की गई है ताकि वर्षों से अटके 3,818 मामलों के डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेज हो सके और अदालतों में ट्रायल न लटके।
1930 हेल्पलाइन कॉल सेंटर का विस्तार
साइबर ठगी से निपटने के लिए 65 सीटों वाला आधुनिक कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। इसमें 115 कर्मचारी तैनात होंगे। इसका मकसद ठगी होते ही गोल्डन ऑवर में पीड़ितों का पैसा खातों और वॉलेट्स में फ्रीज करवाना है।
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