एमपी में साइबर ठगी रोकने 51 करोड़ खर्च करेगी सरकार, बनेगा 65 सीटों वाला कॉल सेंटर, शिकायत मिलते ही तुरंत मिलेगी मदद
इस नए 65 सीटर कॉल सेंटर में शिकायत दर्ज होते ही फौरन काम शुरू हो जाएगा। सरकार ने स्टेट साइबर सेल के इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है और शुरुआत में इसे तीन साल के लिए चलाया जाएगा।
अभी क्या परेशानी आती है?
आजकल जब कोई इंसान 1930 नंबर मिलाता है, तो उसकी घंटी सीधे डायल-100 के दफ्तर में बजती है। वहां से बात घूमकर साइबर पुलिस (मध्यप्रदेश साइबर पुलिस) तक पहुंचती है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी वक्त निकल जाता है। नतीजा यह होता है कि पुलिस के कदम उठाने से पहले ही जालसाज बैंक खातों से सारा पैसा निकाल लेते हैं।
मार्च 2025 में प्रयोग के तौर पर 15 फोन उठाने वालों की 5 अलग-अलग टीमें लगाई गई थीं। इससे बहुत लोगों के पैसे डूबने से बच गए। उसी कामयाबी को देखते हुए अब यह बड़ा और पक्का सेटअप तैयार किया जा रहा है।
ई-जीरो एफआईआर और साइबर कमांडो की फौज
मध्य प्रदेश सरकार ने 25 दिसंबर 2025 से एक और बड़ी सुविधा शुरू की है। इसे ई-जीरो एफआईआर (E-Zero FIR) नाम दिया गया है। बता दें कि मध्य प्रदेश देश का ऐसा दूसरा राज्य बन चुका है जहां यह नई व्यवस्था लागू है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
- जब भी कोई व्यक्ति नेशनल पोर्टल (NCRP) या 1930 हेल्पलाइन पर एक लाख रुपए या उससे अधिक की ठगी की शिकायत दर्ज कराता है, तो CCTNS के माध्यम से राज्य साइबर पुलिस थाने में सीधे ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है।
- प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद इस केस को सीधे पीड़ित के इलाके वाले थाने में भेज दिया जाता है।
- इसके साथ ही राज्य में साइबर अपराधों की तह तक जाने के लिए साइबर कमांडो तैयार किए जा रहे हैं। अभी तक सात कमांडो अपनी ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं, जबकि 38 जवानों की ट्रेनिंग चल रही है।
24 घंटे काम करेगा स्टाफ
जानकारी के अनुसार इस पूरे प्रोजेक्ट को दिन-रात चलाने के लिए खास तैयारी की गई है। 1930 हेल्पलाइन के कॉल सेंटर में 114 आउटसोर्स कर्मचारी तैनात रहेंगे, जो तीन शिफ्टों में 24 घंटे काम करेंगे। कंप्यूटर और सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों को संभालने के लिए 5 आईटी एक्सपर्ट, 3 कॉल सेंटर मैनेजर और एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट भी लगाए जाएंगे।
वहीं दूसरी तरफ जो नया राज्य साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र बनेगा, उसमें 36 पुलिसकर्मी मुस्तैद रहेंगे। इनमें इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर दर्जे के 4 अधिकारी हर शिफ्ट में निगरानी करेंगे। इस केंद्र का सीधा काम होगा कि शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक खातों को तुरंत फ्रीज कराया। इससे पीड़ित का पैसा वापस मिल सकेगा। एडीजी अंशुमन यादव ने साफ कहा है कि इस व्यवस्था से पीड़ितों को पलक झपकते ही मदद मिलेगी। हर छह महीने में दोनों केंद्रों के काम की समीक्षा भी की जाएगी।
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति गंभीर नजर आती है। साल 2025 में पूरे भारत में 21.57 लाख शिकायतें आईं थी। जिनमें जालसाजों ने 21 हजार 902 करोड़ रुपए उड़ा लिए थे। इनमें से पुलिस सिर्फ 4 हजार 320 करोड़ रुपए ही रोक पाई थी।
मध्य प्रदेश की बात करें तो साल 2025 में 64 हजार 827 शिकायतें मिली थीं। इनमें 634 करोड़ रुपए की भारी ठगी हुई थी। पुलिस इसमें से सिर्फ 137 करोड़ रुपए ही फ्रीज करा सकी थी।
साल 2021 में जब यह 1930 सेवा डायल-100/112 के साथ मिलकर शुरू हुई थी, तो समय ज्यादा लगने से खातों को रोकने में भारी परेशानी आती थी। साल 2024 में तो केवल 47 करोड़ रुपए ही रोके जा सके थे। इसी वजह से मार्च 2025 में 15 कॉल टेकर और 5 सदस्यों वाला विशेष साइबर मिटीगेशन सेंटर बनाया गया था, जिसने पैसे बचाने में बहुत मदद की। अब इसी को बड़ा रूप दिया जा रहा है।