साइबर ठगी के पैसों का पूरा नेटवर्क खंगालेगी एमपी पुलिस, 4086 म्यूल बैंक खातों की जांच के लिए 28 दिन का टारगेट
मध्य प्रदेश पुलिस का ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0
बता दें कि साइबर ठगों के लिए ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजना सबसे बड़ा हथियार होता है। इसी नेटवर्क को तोड़ने के लिए मध्य प्रदेश साइबर पुलिस ने यह कार्रवाई शुरू की है। इस अभियान का नाम ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0 (Operation Matrix 2.0) रखा गया है। इसके तहत साइबर ठगी के पैसों का पूरा रास्ता खंगाला जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि रकम को इधर से उधर करने में कौन-कौन शामिल रहा।
इस ऑपरेशन के तहत 4 हजार 86 म्यूल बैंक खातों की गहराई से जांच होगी। साथ ही इस अभियान को 28 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
म्यूल बैंक खाते का मतलब समझें
म्यूल बैंक खाता वह होता है, जिसमें साइबर ठगी का पैसा आता है और फिर दूसरे खातों में भेज दिया जाता है। ठग इन खातों के जरिए रकम के असली स्रोत को छिपाने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि ऐसे खाते पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं।
ठगी की रकम कई बैंक खातों से होकर आगे बढ़ती है। हर ट्रांसफर के साथ पैसे का असली रास्ता पकड़ना मुश्किल होता जाता है। इसी वजह से पुलिस अब इन खातों की पूरी कड़ी को जोड़कर जांच करना चाहती है।
पहले से चिन्हित खातों की होगी जांच
प्रदेश के अलग-अलग जिलों और साइबर जोन कार्यालयों को पहले ही 4 हजार 86 म्यूल बैंक खातों की जानकारी दी गई थी। इन खातों की पूरी जानकारी बैंकों से जुटाने के लिए 45 दिन का समय दिया गया था। अब इसी प्रक्रिया के बाद दूसरे चरण में इन खातों की गहराई से जांच की जाएगी।
ग्वालियर जोन में 101 खाते चिन्हित
राज्य साइबर पुलिस ग्वालियर जोन के प्रभारी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि ग्वालियर जोन में ऐसे 101 खाते चिन्हित किए गए हैं। इससे साफ है कि यह अभियान प्रदेश के सभी जोन में एक साथ चलाया जा रहा है।
खाताधारकों के साथ मददगारों की भी पहचान
पुलिस सिर्फ खाताधारकों तक ही सीमित नहीं रहेगी। उन लोगों की भी पहचान की जाएगी, जिन्होंने साइबर ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में मदद की। फिलहाल इन सभी को संदिग्ध माना जा रहा है। किसी के दोषी होने का फैसला अदालत में ही होगा।
दूसरे संदिग्ध खाते भी जांच के दायरे में
यह अभियान सिर्फ पहले से चिन्हित 4 हजार 86 खातों तक सीमित नहीं रहेगा। किसी जिले या साइबर जोन कार्यालय को दूसरे संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की जानकारी मिलती है, तो उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा। ऐसे खातों से जुड़े लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिलों और जोन को सौंपी गई जिम्मेदारी
सभी जिलों और राज्य साइबर जोन कार्यालयों को तय समय में खातों की जांच पूरी करनी होगी। साथ ही संदिग्धों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के नतीजे भी सामने लाने होंगे। अभियान कितना सफल रहा, इसका आकलन इन्हीं नतीजों के आधार पर किया जाएगा।
यह खबर क्यों जरूरी है?
साइबर ठगी में आम लोगों की मेहनत की कमाई पलक झपकते गायब हो जाती है। म्यूल बैंक खाते इस ठगी का बड़ा जरिया बनते हैं, इसलिए इन पर सख्ती जरूरी है। खातों की कड़ी टूटती है, तो ठगों तक पहुंचना आसान होगा। साथ ही आम नागरिकों को भी सतर्क रहने का संदेश मिलता है कि अपना बैंक खाता किसी को न दें।