मध्य प्रदेश में महंगाई भत्ते पर गतिरोध जारी, कर्मचारी-पेंशनर्स का इंतजार बढ़ा
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में डीए बढ़ोतरी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
- राज्य के कर्मचारियों को अभी 58 प्रतिशत डीए मिल रहा है।
- केंद्र सरकार जनवरी से ही 60 प्रतिशत डीए दे रही है।
- राज्य के IAS, IPS, IFS अफसरों को यह बढ़ोतरी मिल चुकी है।
- लेकिन 12 लाख नियमित कर्मचारी और पेंशनर्स अब भी इंतजार में हैं।
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए डीए यानी महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) एक बड़ा मुद्दा बन गया है। राज्य सरकार ने मार्च में डीए को 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया था। यह बढ़ोतरी अप्रैल की सैलरी से लागू हुई थी। लेकिन इसके बाद से डीए को लेकर कोई नई घोषणा नहीं हुई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों का डीए एक जनवरी 2026 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया। इससे राज्य और केंद्र के डीए में दो प्रतिशत का फासला बन गया है। यही फासला अब गतिरोध की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है।
अफसरों को मिला फायदा, कर्मचारी वंचित
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया है। मध्य प्रदेश में तैनात अखिल भारतीय सेवा यानी AIS (All India Services) के अफसरों को केंद्र सरकार के बराबर डीए मिल चुका है। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी शामिल हैं।
इन अफसरों को जनवरी से ही 60 प्रतिशत की दर से भत्ता मिल रहा है। लेकिन राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों को अब भी 58 प्रतिशत पर ही रोका गया है। इसी असमानता को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि जब अफसरों को बढ़ोतरी मिल सकती है तो आम कर्मचारियों को क्यों नहीं।
पांच महीने से अटकी है मांग
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे को लगातार उठाया है। संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने राज्य सरकार से जल्द फैसला लेने की अपील की है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई का सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ रहा है।
संघ ने साफ मांग रखी है कि डीए को 58 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाए। यह मांग बीते करीब पांच महीने से लंबित बताई जा रही है। अब जुलाई का महीना भी बीतने को है, फिर भी राज्य सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। कर्मचारियों में इंतजार को लेकर थकान और निराशा दोनों बढ़ रही हैं।
कितने लोगों पर पड़ रहा है असर
इस पूरे गतिरोध का असर मध्य प्रदेश के करीब 12 लाख लोगों पर पड़ रहा है। इनमें साढ़े सात लाख नियमित सरकारी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। साथ ही साढ़े चार लाख पेंशनर्स भी इस दायरे में आते हैं।
यह पेंशनर्स महंगाई राहत यानी डीआर (Dearness Relief) पर निर्भर रहते हैं। डीए और डीआर दोनों की दर एक साथ तय होती है। ऐसे में जब तक डीए नहीं बढ़ता, तब तक पेंशनर्स की राहत राशि भी नहीं बढ़ पाती। यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं, बल्कि लाखों पेंशनर्स परिवारों को भी प्रभावित कर रहा है।
केंद्र और राज्य में क्यों बना अंतर
दरअसल केंद्र सरकार साल में दो बार डीए की समीक्षा करती है। यह समीक्षा जनवरी और जुलाई महीने में होती है। इसका आधार अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी AICPI (All India Consumer Price Index) होता है। केंद्र ने जनवरी 2026 में यह समीक्षा समय पर पूरी कर ली थी। लेकिन राज्य सरकारें अक्सर अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार फैसला लेती हैं।
मध्य प्रदेश ने भी अपने बजट और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए फैसला टाला है। राज्य सरकार का कहना रहा है कि आने वाले समय में डीए दर को केंद्र के बराबर लाया जाएगा। लेकिन इसकी कोई तय समय सीमा अब तक सामने नहीं आई है।
नया नियम भी आया सामने
इसी बीच 17 जुलाई 2026 को एक अहम प्रशासनिक बदलाव भी हुआ है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार ने पेंशनर्स की महंगाई राहत को लेकर संयुक्त आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत अब दोनों राज्य एक दूसरे की मंजूरी के बिना अपने स्तर पर डीआर बढ़ा सकते हैं।
यह बदलाव राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की एक पुरानी जटिलता को खत्म करने के लिए किया गया। हालांकि इस आदेश में यह भी साफ किया गया है कि कोई भी राज्य केंद्र से ज्यादा दर पर डीआर नहीं दे सकेगा। जानकारों का मानना है कि इससे भविष्य में फैसले जल्दी हो सकेंगे। लेकिन मौजूदा गतिरोध पर इसका सीधा असर अभी नहीं दिख रहा।
आगे क्या हो सकता है
राज्य वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अगला फैसला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और सरकार के खजाने पर निर्भर करेगा। अगर महंगाई का दबाव इसी तरह बना रहा तो अगले 12 से 18 महीनों में एक और बढ़ोतरी संभव है।
कर्मचारी संगठनों की उम्मीद है कि यह बढ़ोतरी जल्द से जल्द हो। फिलहाल सभी कर्मचारी और पेंशनर्स सरकार के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जब तक यह इंतजार खत्म नहीं होता, तब तक असंतोष भी बना रहेगा।
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