एमपी में तीन फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, पांच लाख में MBBS की डिग्री लेकर कर रहे थे सरकारी नौकरी

Aman Vaishnav | May 18, 2026, 10:29 IST
mp damoh fake mbbs doctors arrested
एमपी के दमोह और जबलपुर में फर्जी MBBS डिग्री के सहारे तीन डॉक्टर नौकरी कर रहे थे। ये आरोपी असली डॉक्टरों की तरह सरकारी सिस्टम की नाक के नीचे बैठकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे।

मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के सरकारी संजीवनी क्लिनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे लोगों का इलाज कर रहे फर्जी डॉक्टर का खुलासा हुआ है।



कोतवाली पुलिस ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है। ये आरोपी असली डॉक्टरों की तरह सरकारी सिस्टम की नाक के नीचे बैठकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे। पुलिस ने इन्हें कोर्ट से रिमांड पर लिया है। अब इनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है।



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कैसे हुआ इस फर्जीवाड़े का खुलासा?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब CMHO को इन डॉक्टरों के दस्तावेजों पर शक हुआ। शक गहराने के बाद CMHO ने तुरंत एक कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने जब डॉक्टरों की डिग्री और उनके मेडिकल रजिस्ट्रेशन की बारीकी से जांच की तो सामने आया कि सारे दस्तावेज पूरी तरह से नकली हैं।



इसके बाद सीएमएचओ ने एक जांच प्रतिवेदन तैयार किया और पुलिस में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। दमोह के पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने बताया कि CMHO की ओर से मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है।



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आरोपी डॉक्टरों के नाम और उनकी सच्चाई

पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपी पढ़े-लिखे तो हैं, लेकिन उनके पास वो डिग्री नहीं है जो सरकारी नौकरी के लिए जरूरी थी।



इस सरकारी भर्ती के लिए MBBS की डिग्री अनिवार्य थी, जबकि आरोपियों के पास दूसरी पैथी की डिग्रियां मिली हैं।



  • कुमार सचिन यादव (ग्वालियर): यह आरोपी दमोह में अपनी सेवाएं दे रहा था। इसके पास से बीएचएमएस या बीडीएस की डिग्री मिली है।
  • राजपाल गौर (सीहोर): यह आरोपी भी दमोह के सरकारी संजीवनी क्लिनिक में फर्जी तरीके से डॉक्टर बनकर तैनात था।
  • अजय मौर्य (जबलपुर): सचिन यादव से पूछताछ के दौरान इसका नाम सामने आया। अजय मौर्य जबलपुर के चेरीताल इलाके में बने संजीवनी क्लिनिक में पिछले ढाई साल से मरीजों का इलाज कर रहा था। पुलिस ने इसे भी हिरासत में ले लिया है।

5 से 10 लाख रुपए में बिक रही हैं डिग्रियां

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने एक बहुत बड़ा और डराने वाला खुलासा किया है। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने ये फर्जी डिग्रियां और मेडिकल रजिस्ट्रेशन पांच से छह लाख रुपए देकर तैयार करवाए थे।



पुलिस को जो फर्जी दस्तावेज और डिग्रियां बरामद हुई हैं, वे साल 2023 की हैं। अब पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि आखिर इन फर्जी डिग्रियों को बनाने वाला मुख्य मास्टरमाइंड कौन है। इसका जाल कहां-कहां फैला हुआ है।



आरोपियों पर लगीं गंभीर धाराएं

सरकारी नौकरी पाने और लोगों की जिंदगी को खतरे में डालने के आरोप में कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा है।



इन तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही आम लोगों की जान जोखिम में डालने से जुड़ी कई गंभीर धाराओं के मामले में भी दर्ज किया गया है।



दमोह एसपी आनंद कलादगी ने यह भी आशंका जताई है कि इस मामले में अभी कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस रैकेट से जुड़े कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं।



इनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। आने वाले दिनों में कई और फर्जी डॉक्टर पुलिस की रडार में आ सकते हैं।



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