दतिया में अकबर जमाने के मिले चांदी के चार सिक्के: इलाही महीनों और टकसालों के नाम दर्ज, कलेक्टर ऑफिस में जमा
समझें क्या है पूरा मामला
- दतिया जिले में चांदी के चार पुराने सिक्के जमीन में दबे मिले।
- ये सिक्के अकबर के दौर के बताए गए हैं।
- सिक्के भरतगढ़ इलाके के प्रीतम रजक के परिवार को निर्माण कार्य के दौरान मिले।
- परिवार ने बुधवार शाम सिक्के कलेक्टर ऑफिस में जमा कराए।
- सिक्कों को स्कैन कर पुरातत्व विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
कहां और कैसे मिले सिक्के
ये सिक्के भरतगढ़ इलाके के रहने वाले प्रीतम रजक के परिवार को उनकी जमीन पर निर्माण कार्य के दौरान मिले हैं। यानी खुदाई किसी खोज के लिए नहीं, सामान्य निर्माण के काम में हो रही थी। इसके बाद मौके पर मौजूद व्यक्ति ने सिक्के को लेकर दतिया विधायक घनश्याम सिंह के पास पहुंचे।
विधायक से कलेक्टर तक कैसे पहुंचा मामला
घनश्याम सिंह ने कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े को बुलाया। कलेक्टर ने बताया कि घनश्याम सिंह का उनके पास फोन आया था। उन्होंने कहा कि सिक्के और उन्हें पाने वाले व्यक्ति को उनके पास भेज दिया जाए। इसके बाद बुधवार शाम परिवार ने सिक्के को कलेक्टर ऑफिस में जमा करा दिया।
इतिहासकार ने सिक्कों की क्या पहचान की
इतिहासकार वसीम खान ने चारों सिक्कों की जांच की और उनकी पुष्टि की है। उन्होंने सिक्कों पर लिखी बातों, इलाही महीनों और टकसालों की पहचान की है। टकसाल वह जगह होती है, जहां सिक्के ढाले जाते हैं।
चार सिक्कों पर चार महीने और तीन शहर
वसीम खान के मुताबिक, चारों सिक्कों पर इलाही महीने और टकसाल दर्ज हैं। इनमें दो सिक्के अहमदाबाद, एक आगरा और एक लाहौर की टकसाल के बताए गए हैं।
इलाही युग और दीन-ए-इलाही क्या है
सिक्कों पर इलाही कैलेंडर की तारीखें और महीने हैं। सवाल उठता है कि इलाही कैलेंडर क्या था।
सोर्स के मुताबिक, अकबर ने 1582 में दीन-ए-इलाही शुरू किया था। यह बहुत सीमित आध्यात्मिक पंथ था। इससे जुड़ा इलाही कैलेंडर सौर महीनों पर आधारित था, जिनके नाम फारसी थे।
इतिहासकार के मुताबिक, सिक्कों पर लिखी इबारतें अकबर की नई शाही शब्दावली बनाने की कोशिश की झलक देती हैं।
सिक्कों में नई व्यवस्था कैसे दिखी
वसीम खान ने कहा कि इस नई व्यवस्था को सिक्कों पर भी अपनाया गया है। उनमें पारंपरिक इस्लामी तारीखों की जगह इलाही युग की तारीखों और महीनों के नाम इस्तेमाल हुए थे। यानी सिक्के सिर्फ पैसे नहीं थे। वे उस दौर के शासन के नए विचार के सबूत भी थे।
अब सिक्कों का क्या होगा
मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग इन सिक्कों को स्कैन करेगा। इसके बाद इन्हें विभाग की वेबसाइट पर अध्ययन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यानी सिक्कों की डिजिटल कॉपी आम लोगों और रिसर्चर तक पहुंच सकेगी।
पुरातत्व आयुक्त ने क्या कहा
आर्कियोलॉजी कमिश्नर मदन कुमार नागरगोजे ने कहा कि सिक्कों को स्कैन किया जाएगा और अध्ययन के लिए वेबसाइट पर रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि सिक्के किसी दौर का इतिहास बताते हैं। वे उस समय की धातु विज्ञान की जानकारी और डिजाइन की भी जानकारी देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटाइज किए गए सिक्के छात्रों की इंटर्नशिप और रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए सामग्री दे सकते हैं। अब देखना होगा कि सिक्कों की स्कैनिंग और वेबसाइट पर अपलोड कब तक होता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
जमीन में दबी ऐसी चीजें इतिहास का सीधा सबूत होती हैं। परिवार ने इन्हें सही जगह जमा कराया, जिससे इनके सुरक्षित रहने और अध्ययन की राह बनी है। सिक्कों से तब की भाषा, कैलेंडर और शासन के विचार का पता चलता है। डिजिटल रूप में आने पर छात्र और रिसर्चर बिना बाधा के इन्हें देख सकेंगे। अगर कभी जमीन में कुछ पुराना मिले तो उसे प्रशासन या आर्कियोलॉजिकल विभाग को सौंप देना चाहिए।
FAQs
- इन चार चांदी के सिक्कों का क्या महत्व है?
ये सिक्के अकबर के दौर के हैं और उनके अध्ययन से उस समय की भाषा, कैलेंडर और शासन के विचारों का पता चलता है। - सिक्के कहां मिले और कैसे?
सिक्के दतिया जिले के भरतगढ़ इलाके में प्रीतम रजक के परिवार को निर्माण कार्य के दौरान मिले हैं। - सिक्कों की जांच के बाद अब आगे क्या होगा?
इन सिक्कों को मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग स्कैन करेगा और फिर इन्हें विभाग की वेबसाइट पर अध्ययन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।