डिप्टी CM के पूर्व OSD पर FIR, 2.75 करोड़ की फर्जी FDR से शराब ठेका लेने का आरोप

Sumit Kumar | Oct 24, 2026, 20:21 IST
डिप्टी सीएम के पूर्व OSD समेत दो के खिलाफ लोकायुक्त ने FIR दर्ज की।
मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी दीपम रायचूरा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भोपाल में शराब दुकान के ठेके से जुड़े मामले में लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज की है। रायचूरा पर 2.75 करोड़ रुपए की कथित फर्जी एफडीआर के जरिए ठेका दिलाने में मदद करने का आरोप है। हरियाणा के शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को भी आरोपी बनाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला भोपाल में वर्ष 2024-25 के शराब दुकान ठेके से जुड़ा है। उस समय दीपम रायचूरा सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर पदस्थ थे। आरोप है कि शराब ठेका हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए गए। ठेके की सुरक्षा राशि के तौर पर एफडीआर जमा कराई गई थी।



इस एफडीआर की राशि 2 करोड़ 75 लाख 33 हजार 335 रुपए थी। इसके साथ बैंक की कथित फर्जी सत्यापन रिपोर्ट भी लगाई गई थी। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में इन दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने की बात कही गई है।



पूर्व ओएसडी पर क्या आरोप हैं?

दीपम रायचूरा पर अपने पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने ठेके की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को नजरअंदाज किया। इससे शराब ठेकेदार को फायदा पहुंचाने में मदद मिली।



लोकायुक्त ने हरियाणा के झज्जर निवासी ठेकेदार जसवंत सिंह को भी आरोपी बनाया है। आरोपों के अनुसार ठेका हासिल करने के लिए कथित फर्जी एफडीआर का इस्तेमाल किया गया। मामले में दोनों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी।



लोकायुक्त डीजी ने कराई गोपनीय जांच

लोकायुक्त संगठन के महानिदेशक योगेश देशमुख ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच में एफडीआर और उससे जुड़ी सत्यापन रिपोर्ट की पड़ताल की गई।



लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में रायचूरा और जसवंत सिंह की भूमिका सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद दोनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए।



एसपी की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

लोकायुक्त महानिदेशक के निर्देश के बाद एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई हुई। भोपाल संभाग के लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पाटीदार ने शिकायत की।



इसके आधार पर विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन भोपाल में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें दीपम रायचूरा और जसवंत सिंह को आरोपी बनाया गया है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।



अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच

लोकायुक्त की जांच केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी। मामले से जुड़े अन्य अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जाएगी। जांच में ठेका आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल होगी। एफडीआर की सत्यता और बैंक की सत्यापन रिपोर्ट भी जांची जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि कथित फर्जी दस्तावेज कैसे स्वीकार किए गए।



इसके अलावा ठेका मंजूर करने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है।



फिलहाल मामले में एफआईआर दर्ज हुई है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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