डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के OSD पर एक करोड़ लेने का आरोप, 930 करोड़ की ठगी के आरोपी के बयान से मचा हड़कंप

Sourabh Bhatnagar | Oct 09, 2026, 11:59 IST
इसमें सफेद शर्ट में डिप्टी सीएम और ब्लैक कपड़े में OSD हैं।
मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा गंभीर आरोपों में घिर गए हैं। करीब 930 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के कथित बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। बयान की एक कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें शराब की दुकानों के ठेके दिलाने के बदले पैसे लेने का आरोप है।
Deepam Raichura,OSD Madhya Pradesh Deputy CM Jagdish Devda, become embroiled serious allegations. fresh controversyerupted following alleged statement Mohit Gogia.

गोगिया ने फर्जी बैंक एफडीआर मंजूर कराने में मदद का दावा भी किया है। वहीं, ओएसडी दीपम रायचूरा ने उनपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।



मोहित गोगिया के बयान में क्या है?

करीब 930 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के कथित बयान में कई दावे किए गए हैं। इनमें डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के OSD दीपम रायचूरा का नाम भी शामिल है।



वायरल हो रही बयान की कॉपी के मुताबिक गोगिया की मुलाकात दीपम रायचूरा से कराई गई थी। यह मुलाकात तनुज सेठी नाम के व्यक्ति ने कराई थी।



गोगिया ने दावा किया है कि तनुज सेठी ने रायचूरा को आबकारी विभाग का सहायक आयुक्त बताया था।



इसके बाद दीपम रायचूरा ने उसकी मुलाकात दीपक दुबे से कराई थी। कथित बयान के मुताबिक रायचूरा ने बताया कि दीपक दुबे उनका पूरा काम देखते हैं।



इसी मुलाकात के बाद शराब की दुकानों के ठेकों को लेकर बातचीत आगे बढ़ने का दावा किया गया है।



शराब दुकानों का ठेका दिलाने के बदले मांगे पैसे?

मोहित गोगिया के कथित बयान में साल 2024-25 के शराब ठेकों का जिक्र है। इसमें भोपाल के टीटी नगर इलाके की दो शराब दुकानों की बात कही गई है।



गोगिया का दावा है कि ये दोनों दुकानें जसवंत कुमार के नाम पर दिलाई गई थीं। इस काम के बदले कुल एक करोड़ रुपए के भुगतान का आरोप लगाया गया है।



बयान में दावा किया गया है कि इस रकम में से 50 लाख रुपए नकद दिए गए थे। बाकी 50 लाख रुपए बैंक खाते में ट्रांसफर कराने की बात कही गई है।



इस मामले में OSD दीपम रायचूरा की भूमिका होने का आरोप लगाया गया है। हालांकि अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।



शालीमार फोर्ट लेजा के फ्लैट में दिए 50 लाख

कथित बयान में 50 लाख रुपए नकद देने की जगह भी बताई गई है। गोगिया के मुताबिक यह रकम भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित एक फ्लैट में ली गई थी।



यह फ्लैट शालीमार फोर्ट लेजा में बताया गया है।



गोगिया ने आरोप लगाया है कि दीपक दुबे ने इसी फ्लैट में 50 लाख रुपए नकद लिए थे। कथित बयान में यह रकम दीपम रायचूरा के लिए लेने का दावा किया गया है।



इसके अलावा बाकी 50 लाख रुपए को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं।



बयान के मुताबिक यह रकम आईएसबीटी के पास स्थित एक होटल मालिक के बैंक खाते में ट्रांसफर कराई गई थी।



यानी कथित बयान में एक करोड़ रुपए के भुगतान का दावा किया गया है। इसमें नकद रकम और बैंक ट्रांसफर दोनों का जिक्र है।



फर्जी बैंक एफडीआर मंजूर कराने का भी आरोप

यह मामला सिर्फ शराब की दुकानों के ठेके तक सीमित नहीं है। कथित बयान में फर्जी बैंक एफडीआर का मुद्दा भी उठाया गया है।



दरअसल शराब की दुकानों का ठेका लेने के लिए बैंक गारंटी की जरूरत होती है। इसके लिए बैंक से जुड़े जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।



गोगिया ने दावा किया है कि शराब के ठेके के लिए फर्जी बैंक एफडीआर का इस्तेमाल किया गया था।



आरोप है कि इन दस्तावेजों को गलत तरीके से स्वीकृत कराने में दीपम रायचूरा ने मदद की थी।



यह आरोप इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मामला सरकारी ठेकों से जुड़ा है। हालांकि फर्जी एफडीआर मंजूर कराने में किसकी क्या भूमिका थी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।



बिना लाइसेंस शराब दिलाने का भी दावा

मोहित गोगिया के कथित बयान में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। यह आरोप बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने से जुड़ा है।



गोगिया ने दावा किया है कि उसकी शराब की दुकानों से शराब की बिक्री में मदद की जाती थी।



कथित बयान के मुताबिक उसे बिना लाइसेंस शराब दिलाने में भी सहयोग मिलता था। इस काम में भी दीपम रायचूरा की भूमिका होने का आरोप लगाया गया है।



गोगिया के कथित बयान में एक मोबाइल नंबर का भी जिक्र है। उसका दावा है कि इसी नंबर पर रायचूरा उससे बातचीत करते थे।



बयान में फोन कॉल और चैट के जरिए संपर्क होने की बात कही गई है। हालांकि इन बातचीत का कोई सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है।



सोशल मीडिया पर वायरल हो रही बयान की कॉपी

मोहित गोगिया के कथित बयान की कॉपी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें आबकारी विभाग से जुड़े अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।



सबसे बड़ा आरोप शराब के ठेके के बदले पैसे लेने का है। इसके अलावा फर्जी एफडीआर और बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने के दावे भी हैं।



हालांकि वायरल बयान में दर्ज बातें फिलहाल आरोप और दावे ही हैं। इन्हें किसी जांच एजेंसी या अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता है।



आरोपी मोहित गोगि​या के बयान की वायरल कॉपी।

दीपम रायचूरा बोले- सभी आरोप झूठे

डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के OSD दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि मोहित गोगिया से उनका नाम जोड़कर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं।



रायचूरा ने बताया कि जब वे भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त थे, तब गोगिया से लाइसेंसधारी के तौर पर मुलाकात हुई होगी। इसके अलावा उनका गोगिया से कोई संबंध होने की बात उन्होंने नहीं मानी। रायचूरा ने साफ कहा कि रिश्वत लेने के सभी आरोप झूठे हैं।



जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, SIT जांच की मांग

इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी सामने आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।



पटवारी ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा। सरकार को निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लानी चाहिए। इससे ही सरकार की विश्वसनीयता साबित होगी।



उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाने की मांग की है।



जीतू पटवारी ने रखीं ये 6 मांगें

  • हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में स्वतंत्र SIT बनाई जाए।
  • शराब ठेकों, बैंक FDR और पैसों के कथित लेन-देन की जांच हो।
  • 50-50 लाख रुपए के भुगतान और संबंधित बैंक खातों की जांच की जाए।
  • जांच पूरी करने के लिए समय-सीमा तय की जाए।
  • जांच में हुई कार्रवाई की जानकारी जनता को दी जाए।
  • जांच में जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

OSD कौन होते हैं और क्या काम करते हैं?

OSD का मतलब होता है ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (Officer on Special Duty)। आसान भाषा में समझें तो OSD वह अधिकारी होता है, जिसे किसी मंत्री या बड़े अफसर के साथ खास कामों के लिए रखा जाता है।



OSD का मुख्य काम मंत्री और सरकारी विभागों के बीच तालमेल बनाना होता है। मंत्री के पास आने वाली जरूरी फाइलों की जानकारी रखना भी उसका काम है। इसके अलावा बैठकों की तैयारी करना और अधिकारियों से संपर्क करना भी उसकी जिम्मेदारी होती है।



यदि कोई व्यक्ति मंत्री के पास शिकायत लेकर आता है, तो OSD उसे संबंधित विभाग तक पहुंचा सकता है। वह सरकारी योजनाओं और विभागों में चल रहे कामों की जानकारी भी मंत्री को देता है।

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