पदोन्नति के बाद भी निराश 194 डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर बनने का इंतजार बढ़ा
मध्यप्रदेश में प्रभारी डिप्टी कलेक्टर से डिप्टी कलेक्टर बने 194 अधिकारी अब नाराज हैं। ग्रेडेशन लिस्ट में इन्हें सबसे नीचे रखा गया है। इससे इन अधिकारियों को तीन साल का नुकसान हो गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लंबे समय से रुकी पदोन्नति को मंजूरी दी थी। इससे 85 हजार अधिकारियों को फायदा मिला। लेकिन अब इन्हीं में से 194 डिप्टी कलेक्टर नाराज हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
मध्यप्रदेश में लंबे समय से रुकी पदोन्नति को हरी झंडी मिली थी। इससे विभिन्न विभागों के 85 हजार अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिला। इसमें प्रभारी डिप्टी कलेक्टर से डिप्टी कलेक्टर बने 194 अधिकारी भी शामिल हैं। लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग की ग्रेडेशन लिस्ट में इन्हें सबसे नीचे रखा गया है। इससे इनकी वरिष्ठता को तीन साल का नुकसान हुआ है।
ग्रेडेशन सूची में नीचे डाला गया
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 194 अधिकारियों की ग्रेडेशन लिस्ट बनाई है। यह लिस्ट कुल 704 अधिकारियों की है। इसमें इन 194 अधिकारियों को सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। ये साल 2024 बैच के हाल ही में चयनित डिप्टी कलेक्टर (प्रोबेशन) से भी नीचे हैं।
तीन साल का हुआ घाटा
ग्रेडेशन लिस्ट में नीचे आने से अधिकारी नाराज हैं। ये सभी साल 2023 में प्रभारी बने थे। लेकिन नई पदोन्नति उन्हें साल 2026 से मान्य की गई है। यानी इन अधिकारियों को तीन साल का नुकसान हुआ है। पहले ही इनकी पदोन्नति देरी से हुई थी।
अभी तक संयुक्त कलेक्टर होना था
मुख्य तौर पर यह 194 अधिकारी साल 2008 बैच के नायब तहसीलदार हैं। आमतौर पर नायब तहसीलदार से तहसीलदार और फिर डिप्टी कलेक्टर बनने में 10 से 12 साल लगते हैं। लेकिन इन अधिकारियों को डिप्टी कलेक्टर बनने में 18 साल लग गए। पहले ही पदोन्नति देरी से हुई। अब ग्रेडेशन भी साल 2026 से दी गई है।
जबकि उम्मीद थी कि ग्रेडेशन साल 2023 से मिलेगी। ऐसे में ये अधिकारी दो-तीन साल में संयुक्त कलेक्टर पद के लिए पात्र हो जाते। लेकिन साल 2026 से ग्रेडेशन मिलने से अब संयुक्त कलेक्टर बनने में इन्हें पांच से छह साल का इंतजार करना होगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह मामला सिर्फ 194 अधिकारियों तक सीमित नहीं है, यह प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति और वरिष्ठता तय करने के तरीके पर सवाल उठाता है। सालों की देरी झेल चुके अधिकारियों के लिए ग्रेडेशन में पिछड़ना दोहरा झटका है। इससे प्रदेश के राजस्व प्रशासन में मनोबल पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि यही अधिकारी आगे चलकर कलेक्टर स्तर के फैसलों में भूमिका निभाते हैं। पारदर्शी और समय पर पदोन्नति व्यवस्था प्रशासनिक स्थिरता के लिए जरूरी मानी जाती है।
लोकल कनेक्शन
यह मामला सीधे मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ा है और राज्यभर में पदस्थ अधिकारियों को प्रभावित करता है।
- ग्रेडेशन लिस्ट में 194 अधिकारियों को सबसे नीचे क्यों रखा गया?
इन अधिकारियों की डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति साल 2026 से मान्य की गई है, जबकि ये 2023 में प्रभारी बने थे। इसी वजह से 704 अधिकारियों की सूची में इन्हें सबसे निचले स्थान पर रखा गया है। - इन अधिकारियों को कितने साल का नुकसान हुआ है?
इन्हें वरिष्ठता में तीन साल का नुकसान हुआ है। इसके अलावा संयुक्त कलेक्टर पद तक पहुंचने में भी अब पांच से छह साल ज्यादा लगेंगे। - ये 194 अधिकारी मूल रूप से किस बैच के हैं?
ये मुख्यतः साल 2008 बैच के नायब तहसीलदार हैं। इन्हें डिप्टी कलेक्टर पद तक पहुंचने में सामान्य 10-12 साल की तुलना में 18 साल लग गए।