एमपी की अदालतों में मुकदमों का अंबार, 66 जजों पर एक लाख से ज्यादा केस पेंडिंग, हर पांचवें केस में 3 माह बाद की तारीख
प्रदेश की जिला अदालतों में लंबित मामलों का दबाव
मध्य प्रदेश की जिला अदालतों में 21 लाख से अधिक केस पेंडिंग हैं। इनमें 2 लाख 72 हजार 435 मामले अत्यधिक लंबी तारीख वाले हैं। ऐसे मामलों में अगली सुनवाई तीन महीने से ज्यादा बाद तय होती है। इस व्यवस्था को न्यायिक भाषा में एक्सेसिव डेट केस (Excessive Date Case) कहा जाता है। पक्षकार अदालत आकर केवल अगली लंबी तारीख लेकर लौट रहे हैं।
एक्सेसिव डेट मामलों में पहले स्थान पर इंदौर
लंबी तारीख वाले मामलों में पूरे प्रदेश में इंदौर पहले नंबर पर है। इंदौर में 67 हजार 108 मामलों में तीन महीने से अधिक की तारीख दी गई। इस सूची में 26 हजार 611 मामलों के साथ भोपाल दूसरे स्थान पर आता है। भोपाल जिला अदालत में कुल एक लाख 48 हजार केस अभी लंबित पड़े हैं। यानी यहां हर पांचवें केस में तीन महीने बाद की तारीख मिलती है।
जजों के खाली पद बने सुस्त न्याय व्यवस्था की वजह
मुकदमों के भारी अनुपात में जजों की गंभीर कमी बड़ी वजह बन चुकी है। भोपाल जिला न्यायालय में कुल 112 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं। इसके विपरीत वर्तमान समय में यहां केवल 66 जज ही पदस्थ हैं। कोर्ट में जजों के 46 पद पूरी तरह खाली पड़े हुए हैं। हर अदालत पर औसतन 4 से 6 हजार मुकदमों का बोझ है। करीब 20 प्रतिशत मामले पांच साल से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं।
मध्य प्रदेश के टॉप-5 जिले जहां पेंडिंग केसों की भरमार
| जिला | कुल पेंडेंसी | एक्सेसिव डेट केस | फीसदी |
| इंदौर | 2 लाख 47 हजार 560 | 67 हजार 180 | 27% |
| भोपाल | 1 लाख 48 हजार 928 | 26 हजार 611 | 18% |
| रीवा | 1 लाख 1 हजार 19 | 17 हजार 901 | 18% |
| जबलपुर | 1 लाख 47 हजार 756 | 12 हजार 459 | 8% |
| ग्वालियर | 93 हजार 335 | 4 हजार 349 | 5% |
भोपाल की टॉप 5 कोर्ट जहां मिल रही लंबी तारीखें
भोपाल की कई अदालतों में लंबी तारीखों वाले मुकदमों की संख्या काफी अधिक है। सिविल जज सीनियर डिवीजन शरद जायसवाल की कोर्ट में 2188 ऐसे केस हैं। सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय पाठक की कोर्ट में 1924 मामले दर्ज हैं।
वहीं पलक मनीष राय की कोर्ट में यह संख्या 1647 दर्ज की गई। सिविल जज जूनियर डिवीजन आकांक्षा उछारिया की अदालत में 1541 मामले हैं। सिविल जज प्रियंक दुबे की अदालत में 1404 ऐसे केस लंबित हैं।
उच्च अदालतें करती हैं एक्सेसिव डेट मामलों की निगरानी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस दीपक अग्रवाल ने नियम स्पष्ट किए हैं। यदि अगली सुनवाई तीन माह बाद तय हो तो सिस्टम दर्ज करता है। कंप्यूटर सिस्टम ऐसे मामलों को खुद एक्सेसिव डेट केस श्रेणी में डालता है। जिस जिले में यह संख्या अधिक हो वहां न्याय धीमा माना जाता है। हाई कोर्ट इसी डेटा के आधार पर निचली अदालतों की निगरानी करता है।
FAQ
- मध्य प्रदेश की जिला अदालतों में कितने मामले लंबित हैं?
मध्य प्रदेश की जिला अदालतों में 21 लाख से अधिक मामले पेंडिंग हैं। - एक्सेसिव डेट केस का क्या अर्थ है?
एक्सेसिव डेट केस वह मामले होते हैं जिनकी अगली सुनवाई की तारीख तीन महीने से अधिक की होती है। - भोपाल की अदालतों में लंबी तारीखों वाले मामलों की संख्या कितनी है?
भोपाल की जिला अदालत में कुल एक लाख 48 हजार केस लंबित हैं, जिनमें से 26 हजार 611 मामलों में लंबी तारीख दी गई है।