एमपी में दिव्यांगजनों के लिए शुरू हुई राज्य निधि योजना, मिलेंगे 10 लाख
मध्यप्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए राज्य दिव्यांगजन निधि योजना शुरू की है। खेल, कला, संगीत और नृत्य में पदक जीतने पर 3 से 10 लाख रुपए मिलेंगे। प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी यात्रा सहायता मिलेगी। इलाज और उच्च शिक्षा के लिए अलग से मदद मिलेगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल और ऑनलाइन है।
दिव्यांग खिलाड़ी देश के लिए मेडल जीतते हैं। लेकिन लंबे समय से उन्हें आर्थिक मदद के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब मध्यप्रदेश सरकार ने यह परेशानी दूर कर दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने राज्य दिव्यांगजन निधि के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस योजना के तहत अब प्रतिभावान दिव्यांगजनों को सीधे आर्थिक मदद मिलेगी।
पदक पर मिलेगी बड़ी राशि
खेल, कला, संगीत और नृत्य में पदक जीतने वाले दिव्यांगों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतने पर 10 लाख, रजत पर 7 लाख और कांस्य पर 5 लाख रुपए मिलेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण के लिए 3 लाख, रजत के लिए 2 लाख और कांस्य पदक पर 1 लाख रुपए की सहायता मिलेगी।
यह योजना पैरा स्पोर्ट्स (Para Sports) और स्पेशल गेम्स (Special Games) को भी कवर करती है। यानी हर तरह के दिव्यांग खिलाड़ी इसका फायदा उठा सकते हैं।
सिर्फ पदक नहीं, तैयारी पर भी मदद
पहले सिर्फ पदक जीतने पर मदद मिलती थी। अब प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी सरकार आर्थिक सहायता देगी। राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए 1 लाख, राष्ट्रीय स्तर के लिए 2 लाख और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए 5 लाख रुपए मिलेंगे।
यह राशि यात्रा और तैयारी के खर्च के लिए दी जाएगी। इससे आर्थिक तंगी के कारण कोई भी दिव्यांग प्रतिभा पीछे नहीं रहेगी।
इलाज और शिक्षा के लिए भी राहत
इस निधि से दिव्यांगजनों को चिकित्सा सहायता भी मिलेगी। जिन दिव्यांगजनों की या उनके अभिभावक की सालाना आय 8 लाख रुपए तक है, उन्हें कोक्लियर इम्प्लांट (Cochlear Implant) के रखरखाव, उपकरणों की मरम्मत और अन्य जरूरी मदद के लिए अधिकतम 10 लाख रुपए तक की वास्तविक राशि मिलेगी।
शोधार्थियों के लिए भी अच्छी खबर है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार (Seminar) में रिसर्च पेपर (Research Paper) प्रस्तुत करने पर साल में एक बार अधिकतम 5 लाख रुपए तक की सहायता मिलेगी। इसमें यात्रा, बोर्डिंग और पंजीकरण शुल्क शामिल है।
कैसे बनी यह योजना
लंबे समय से दिव्यांगजनों की मदद के लिए कोई व्यवस्थित तंत्र नहीं था। आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में ऐसे कई आवेदन आ रहे थे जिनका निपटारा नहीं हो पाता था।
इसे देखते हुए विभागीय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में फरवरी-मार्च में काम शुरू हुआ। प्रमुख सचिव सोनाली पोंक्षे वायंगणकर और आयुक्त केजी तिवारी ने इस निधि का पूरा रोडमैप (Roadmap) तैयार किया।
नवाचार और डिजिटल प्रक्रिया
सरकार ने नवाचार (Innovation) को भी प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। जिला कलेक्टर की अनुशंसा पर नए प्रयोगों के लिए भी इस निधि से मदद मिलेगी।
पूरी आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। पात्र दिव्यांगजन विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इससे दफ्तरों के चक्कर खत्म होंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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