एमपी के खनन फंड से 346 करोड़ का हिसाब गायब, विधानसभा में उठा सवाल

Aman Vaishnav | Jul 27, 2026, 09:02 IST
खनन प्रभावित क्षेत्रों के 346 करोड़ का हिसाब नहीं
मध्यप्रदेश में जिला खनिज प्रतिष्ठान के 346 करोड़ रुपए का कोई हिसाब सरकार के पास दर्ज नहीं है। पूर्व मंत्री और विधायक सचिन यादव द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल पर विभाग ने लिखित में यह जवाब दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए डीएमएफ मद बनाया गया है।
  • बीते तीन साल में इस मद में 346 करोड़ रुपए से ज्यादा जमा हुए।
  • लेकिन सरकार यह नहीं बता पाई कि यह पैसा कहां खर्च हुआ।
  • विधानसभा में पूर्व मंत्री सचिन यादव ने इस पर सवाल पूछा था।
  • विभाग ने लिखित जवाब में माना कि खर्च का ब्यौरा उसके पास दर्ज ही नहीं है।

पैसा जमा हुआ, हिसाब गायब

बता दें कि डीएमएफ का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं बेहतर करने के लिए हुआ था। खनन कंपनियां तय राशि इस मद में जमा करती हैं।



इसके बाद यह राशि जिलों में विकास कार्यों पर खर्च होनी चाहिए। वहीं प्रदेश सरकार के पास यह जानकारी ही नहीं है कि पैसा किस विभाग ने खर्च किया।



विधायक ने पूछा सीधा सवाल

पूर्व मंत्री और विधायक सचिन यादव ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि डीएमएफ में कितनी राशि आई और कहां खर्च हुई।



सरकार ने अपने जवाब में सिर्फ यह बताया कि तीन साल में 346 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि मिली। लेकिन यह राशि किस मद में गई, किस विभाग ने खर्च की और किन जिलों में इस्तेमाल हुई, इसका कोई जवाब नहीं मिला।



विभाग के जवाब में साफ लिखा है कि यह व्यय दर्ज नहीं है। इसका मतलब है कि राज्य स्तर पर सरकार के पास यह समेकित जानकारी मौजूद ही नहीं है।



सवाल यह उठता है कि जब पैसा जिलों को मिला, तो उसका इस्तेमाल कैसे हुआ, इसकी निगरानी क्यों नहीं हुई।



किस जिले से कितनी राशि मिली

तीन साल में डीएमएफ मद में सबसे ज्यादा राशि सीहोर जिले में जमा हुई। यहां करीब 39 करोड़ 72 लाख रुपए जमा किए गए। इसके बाद नरसिंहपुर में 26 करोड़ 20 लाख रुपए जमा हुए। कटनी जिले में यह राशि 20 करोड़ 4 लाख रुपए रही।



वहीं बालाघाट में 19 करोड़ 54 लाख रुपए और छतरपुर में 19 करोड़ 49 लाख रुपए जमा हुए। सिंगरौली में 17 करोड़ 98 लाख रुपए तथा शहडोल में 16 करोड़ 94 लाख रुपए की राशि डीएमएफ मद में गई।



सीधी जिले में 16 करोड़ 02 लाख रुपए, रायसेन में 12 करोड़ 35 लाख रुपए और दतिया में 12 करोड़ 05 लाख रुपए जमा हुए। ये प्रदेश के वो 10 जिले हैं, जहां 2022-23 से 2024-25 के बीच सबसे ज्यादा डीएमएफ राशि जमा हुई।



निगरानी की कमी बड़ा सवाल

इतनी बड़ी रकम का हिसाब न होना गंभीर सवाल खड़ा करता है। डीएमएफ फंड सीधे आम जनता की सुविधाओं से जुड़ा है। अगर यह पैसा सही जगह खर्च नहीं हुआ, तो खनन प्रभावित इलाकों का विकास रुक सकता है। पारदर्शिता की कमी से भ्रष्टाचार की आशंका भी बढ़ती है।



FAQ

  1. डीएमएफ क्या है?
    डीएमएफ यानी जिला खनिज प्रतिष्ठान खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बना फंड है। इसमें खनन कंपनियां तय राशि जमा करती हैं। यह पैसा सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं पर खर्च होता है।
  2. मध्यप्रदेश में डीएमएफ में कितनी राशि जमा हुई?
    तीन साल में करीब 346 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि जमा हुई। यह जानकारी विधानसभा में सरकार ने खुद दी। लेकिन खर्च का ब्यौरा सरकार के पास नहीं है।

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