MP DMF Fund: खनिजों से मिले 3574 करोड़, गांवों को क्या मिला? सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में होगी जांच
इसमें सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी जरूरतों की जानकारी जुटाई जाएगी। इसी आधार पर अगले पांच साल की विकास योजना तैयार होगी।
प्रदेश के 55 जिलों में 3574 करोड़ की खनिज निधि
मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में जिला खनिज निधि (DMF) के तहत करीब 3574.53 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं। इसमें से लगभग 3147.10 करोड़ रुपए दस प्रमुख खनन प्रभावित जिलों में हैं। इन जिलों में सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, कटनी और बालाघाट शामिल हैं। इसके अलावा सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल भी सूची में हैं। संशोधित नियमों के अनुसार, DMF की 70 प्रतिशत राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों में खर्च करनी है। सरकार अब इस राशि से हुए कामों का वास्तविक असर जानना चाहती है।
2165 गांवों और 370 वार्डों में होगा सर्वे
पहले चरण में तीन जिलों की 981 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। इनमें 2165 गांवों का सर्वे प्रस्तावित है। साथ ही 20 नगरीय निकायों के 370 वार्डों में भी जानकारी जुटाई जाएगी।
| जिला | गांव | नगरीय निकाय | वार्ड |
|---|---|---|---|
| सिंगरौली | 730 | 3 | 75 |
| शहडोल | 859 | 7 | 142 |
| अनूपपुर | 576 | 10 | 153 |
| कुल | 2165 | 20 | 370 |
सिंगरौली के तीन, शहडोल के पांच और अनूपपुर के चार विकासखंड सर्वे में शामिल होंगे।
पुराने कामों से लोगों को कितना फायदा मिला?
निजी एजेंसी DMF से पूरे हुए विकास कार्यों की समीक्षा करेगी। इसमें देखा जाएगा कि किन गांवों में कौन-सी सुविधाएं पहुंची हैं। सर्वे में अधूरे विकास कार्यों और सुविधाओं की कमी की जानकारी भी ली जाएगी। इससे पता चलेगा कि पहले खर्च हुई राशि से स्थानीय लोगों को कितना लाभ मिला।
परिवारों की कमाई और रोजगार की भी जांच
सर्वे केवल सड़क, भवन और दूसरे निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें परिवारों की आय और रोजगार की स्थिति भी देखी जाएगी। लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की समस्याओं का भी अलग से अध्ययन होगा। इससे पता चलेगा कि किन इलाकों में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की ज्यादा जरूरत है।
पानी, स्वास्थ्य और प्रदूषण पर भी रहेगा ध्यान
खनन प्रभावित इलाकों में पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति जांची जाएगी। स्कूलों और स्वच्छता व्यवस्था की भी जानकारी ली जाएगी। खनन से होने वाले प्रदूषण और स्वास्थ्य पर उसके संभावित असर का अध्ययन होगा। जिन बस्तियों में सुविधाओं की कमी है, उनकी पहचान की जाएगी। इसके आधार पर जरूरी विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
डिजिटल मैप से मिलेगी गांवों की जानकारी
सर्वे में जुटाई गई जानकारी को GIS Mapping के जरिए डिजिटल रिकॉर्ड में रखा जाएगा। इससे पता चलेगा कि किस गांव या वार्ड में कौन-सा काम जरूरी है। पहले पूरे हुए विकास कार्यों की जानकारी भी रिकॉर्ड में शामिल होगी। इससे एक ही काम पर दोबारा खर्च होने से बचने में मदद मिलेगी। सर्वे की प्रगति देखने के लिए Digital Dashboard उपलब्ध कराने की भी तैयारी है।
हर जिले के लिए बनेगी पांच साल की योजना
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तीनों जिलों की पांच वर्षीय विकास योजना तैयार होगी। इसमें गांव, वार्ड, विकासखंड और जिला स्तर की जरूरतें शामिल होंगी। प्रस्तावित विकास कार्यों पर होने वाले खर्च का अनुमान भी लगाया जाएगा। इसके साथ हर साल का अलग Action Plan तैयार होगा। योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा भी की जाएगी। पहले चरण के बाद दूसरे खनन प्रभावित जिलों में भी ऐसी योजना बनाने की तैयारी है।
खर्च के साथ विकास का असर भी देखा जाएगा
सरकार की इस पहल में पुराने विकास कार्यों से मिले लाभ का आकलन किया जाएगा। खासकर पानी, इलाज, शिक्षा, रोजगार और परिवारों की आय में हुए बदलाव देखे जाएंगे। फिलहाल सर्वे और विकास योजना बनाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसलिए पुराने कार्यों के वास्तविक परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं। समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगा कि खनिज निधि से प्रभावित गांवों को कितना लाभ मिला।