मप्र में दो बच्चों का नियम खत्म होगा? जनता बताएगी अपना मन, सीएम करेंगे अंतिम फैसला
समझें क्या है मामला
- मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त 2001 से लागू है।
- मोहन सरकार इस नियम को खत्म करने पर विचार कर रही है।
- 26 मई 2026 को चीफ सेक्रेटरी (Chief Secretary) की अध्यक्षता में मीटिंग हुई।
- अफसरों ने नियम हटाने का विरोध किया और जनसंख्या नियंत्रण का तर्क दिया।
- सरकार इस मामले में अब पब्लिक का मन टटोलने की तैयारी में है।
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में बड़ा बदलाव हो सकता है। सरकारी नौकरियों में दो से ज्यादा बच्चों वाले लोग अब तक अपात्र माने जाते थे। लेकिन 25 साल इस नियम को खत्म करने की तैयारी है।
सरकार चाहती है कि तीन बच्चों वाले लोग भी सरकारी नौकरी पा सकें। सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों में यह छूट देने की बात है। इसके लिए नए सेवा भर्ती नियम बनाए जा रहे हैं। लेकिन अफसरों की एक मीटिंग के बाद मामला थोड़ा उलझ गया है।
26 मई को हुई बड़ी मीटिंग
26 मई 2026 को भोपाल में एक अहम बैठक हुई। चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन ने इस मीटिंग की अध्यक्षता की। इसमें राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मीटिंग का मकसद था- सीधी भर्ती और पदोन्नित प्रक्रिया के लिए नए सिरे से मप्र सेवा भर्ती नियमबनाना। खासतौर पर दो बच्चों की शर्त पर विचार होना था, लेकिन मीटिंग में बड़ा पेच आ गया।
अफसरों ने किया विरोध
लगभग सभी अफसरों ने यह नियम हटाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि यह नियम जनसंख्या नियंत्रण (population control) के लिए है। इस डर की वजह से सरकारी नौकरी के उम्मीदवार ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करते।
अफसरों का यह तर्क भी था कि नियम हटाया तो प्रभाव कम होगा। जो लोग सरकारी नौकरी या प्रमोशन चाहते हैं, वे इस नियम से बंधे रहते हैं। उनके मुताबिक यह नियम बड़ी भूमिका निभा रहा है।
RSS और जनसंख्या का पेचीदा तर्क
मीटिंग के दौरान एक तर्क यह भी आया। कहा गया कि यह बदलाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh यानी RSS) की इच्छा के मुताबिक किया जा रहा है।
इस पर जवाब आया कि नियम सभी वर्गों पर एक साथ लागू होगा। इससे हिंदू आबादी की जनसंख्या तो भले ही सीमित रहेगी। लेकिन एक खास तबके को अनियंत्रित तरीके से बच्चे पैदा करने की छूट मिल जाएगी।
अफसरों का मानना था कि इस स्थिति में RSS की सोच के अनुसार नतीजा नहीं मिलेगा। इसीलिए नियम हटाने पर सहमति नहीं बन पाई।
CM पर छोड़ा अंतिम फैसला
लंबी बहस के बाद एक बात तय हुई। यह पूरा मामला मुख्यमंत्री (CM) मोहन यादव पर छोड़ा गया। अफसरों ने कहा कि वे कोई एकतरफा फैसला नहीं लेंगे।
अब अफसर नए भर्ती नियमों का एक प्रारूप (Draft) तैयार करेंगे। यह प्रारूप आम जनता के सामने रखा जाएगा। जनता की राय लेकर एक तरह का जनादेश हासिल किया जाएगा।
इसके बाद ही CM तय करेंगे कि नियम हटाना है या नहीं। यह फैसला पूरी तरह नीतिगत होगा। कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।
25 साल का इतिहास: क्या रहा असर?
यह नियम 26 जनवरी 2001 को लागू हुआ था। तब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे। जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था।
25 साल में क्या-क्या हुआ?
पिछले 25 सालों में इस नियम का व्यापक असर दिखा। हजारों लोगों की नौकरियां गईं। कइयों के प्रमोशन रुक गए।
इस नियम की वजह से 30 हजार से ज्यादा शिक्षक भर्ती से वंचित रहे। दो ट्रेनी न्यायाधीशों (Trainee Judges) को सेवा से हटाया गया। तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नौकरी भी गई।
कई कर्मचारियों की वेतनवृद्धि और पदोन्नति रोकी गई। कुछ ने तो तीसरे बच्चे की जानकारी ही छिपा ली। वे डरते थे कि यह जानकारी उनकी नौकरी छीन लेगी।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है मान्यता
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस नियम को पहले ही वैध ठहरा चुका है। कोर्ट ने इसे जनसंख्या नियंत्रण के लिए तर्कसंगत शर्त माना था। इसलिए अब नियम हटाना सरकार का अपना नीतिगत फैसला होगा।
कोर्ट की मान्यता के बावजूद सरकार इसे बदल सकती है। राज्य सरकार को यह अधिकार है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए।
अन्य राज्यों में क्या है नियम?
मध्यप्रदेश अकेला राज्य नहीं है। राजस्थान (Rajasthan), हरियाणा (Haryana) और आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में भी ऐसे नियम हैं। कुछ राज्यों में यह नियम पंचायत चुनावों में लागू है। कुछ में सरकारी सेवाओं में। हर राज्य में इसका स्तर अलग-अलग है।
अगर मध्यप्रदेश नियम हटाता है तो यह बड़ा बदलाव होगा। दूसरे राज्य भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यह एक नजीर बन सकती है।
अब क्या होगा आगे?
फिलहाल गेंद CM मोहन यादव के पाले में है। अफसर प्रारूप तैयार करेंगे। फिर वह जनता के सामने रखा जाएगा। जनता की राय मिलने के बाद CM फैसला लेंगे। अगर नियम हटता है तो यह नई नीति लागू होने की तारीख से लागू होगा। पुराने मामलों पर इसका कोई असर नहीं होगा।
लाखों लोगों की नजरें इस फैसले पर टिकी हैं। जो लोग तीन बच्चों की वजह से सरकारी नौकरी से महरूम हैं, उन्हें उम्मीद है। देखना होगा CM क्या फैसला करते हैं।
FAQ
- मध्यप्रदेश में दो बच्चों का नियम क्या है?
यह नियम 26 जनवरी 2001 से लागू है। इसके तहत दो से ज्यादा बच्चों वाले लोग सरकारी नौकरी या पदोन्नति के लिए अपात्र माने जाते हैं। इसे तत्कालीन CM दिग्विजय सिंह ने जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया था। - क्या मप्र में दो बच्चों का नियम अब खत्म होगा?
अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 26 मई 2026 की मीटिंग में अफसरों ने नियम हटाने का विरोध किया। CM मोहन यादव ही अंतिम निर्णय लेंगे।
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