MP में डॉक्टरों से मारपीट पर 6 घंटे में FIR, अस्पताल प्रमुख की होगी जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब अस्पतालों में डॉक्टर या किसी स्वास्थ्यकर्मी के साथ हिंसा होने पर कार्रवाई में देरी नहीं होगी।
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए सुरक्षा से जुड़े नए निर्देश जारी किए हैं। इसमें अस्पताल प्रमुखों को कई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
सबसे अहम निर्देश यह है कि अगर ड्यूटी के दौरान किसी स्वास्थ्यकर्मी के साथ मारपीट या हिंसा होती है तो संस्थान प्रमुख को अधिकतम छह घंटे के भीतर संस्थागत FIR दर्ज कराने की कार्रवाई करनी होगी।
अस्पतालों में बढ़ेगी सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण पर जोर
सरकार ने अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई कदम सुझाए हैं। इनमें अस्पताल में आने वाले लोगों की संख्या नियंत्रित करना, सुरक्षा गार्डों की गश्त बढ़ाना और CCTV निगरानी मजबूत करना शामिल है।
निर्देश सरकारी मेडिकल कॉलेज, निजी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए जारी किए गए हैं। इसमें डॉक्टर, नर्स और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित माहौल देने पर जोर दिया गया है।
अस्पतालों में मरीज के साथ आने वाले परिजनों की संख्या भी नियंत्रित करने को कहा गया है। इसके लिए विजिटर पास व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। एक मरीज के साथ अधिकतम एक से दो परिजनों को प्रवेश देने की व्यवस्था की जाएगी।
डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा पर सख्त कानूनी कार्रवाई
अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों से मारपीट को अब मामूली विवाद मानकर कतई नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। मध्यप्रदेश के विशेष सुरक्षा कानून 2008 के तहत स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करना पूरी तरह से गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध घोषित है।
| कानून / नियम | मुख्य प्रावधान | सजा व जुर्माना |
| एमपी डॉक्टर सुरक्षा कानून 2008 | हिंसा, आपराधिक बल प्रयोग, धमकी | 3 महीने जेल + ₹10,000 जुर्माना |
| भारतीय न्याय संहिता (BNS) | सरकारी काम में बाधा व हमला | गैर-जमानती मामला, तुरंत गिरफ्तारी |
| संस्थागत एफआईआर नियम | अस्पताल प्रमुख की सीधी जिम्मेदारी | 6 घंटे के भीतर केस दर्ज होना अनिवार्य |
इस कानून के तहत पुलिस बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और उसे आसानी से जमानत भी नहीं मिलेगी। इन मामलों की सुनवाई प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से नीचे बिल्कुल नहीं होगी।
रात में डॉक्टर और नर्सों की सुरक्षा होगी मजबूत
नए निर्देशों में रात की ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल छात्रों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। अस्पताल प्रशासन को रात में सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करनी होगी।
कई अस्पतालों में हॉस्टल और अस्पताल भवन अलग-अलग जगह होते हैं। ऐसे में रात में आने-जाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने होंगे।
इसके अलावा अस्पताल परिसर के अंधेरे स्थानों पर 24 घंटे रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्किंग, हॉस्टल, आवासीय क्षेत्र और अस्पताल के अंदर-बाहर के हिस्सों में पर्याप्त लाइट जरूरी होगी।
अस्पतालों में पुलिस से सीधा संपर्क और सुरक्षा ऑडिट
सरकार ने अस्पतालों को स्थानीय पुलिस थानों से लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा है। जरूरत पड़ने पर पुलिस तुरंत अस्पताल पहुंच सके, इसके लिए व्यवस्था बनाने के निर्देश हैं।
अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच भी होगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। इसमें CCTV, सुरक्षा गार्ड, प्रवेश व्यवस्था और रोशनी जैसी सुविधाओं की जांच होगी।
CCTV निगरानी और ब्लाइंड स्पॉट पर नजर
अस्पतालों में सिर्फ CCTV लगाना ही काफी नहीं होगा। कैमरों की लगातार निगरानी और उनकी स्थिति की जांच भी करनी होगी।
जहां CCTV नहीं हैं या कैमरों की नजर नहीं पहुंच रही है, वहां नए कैमरे लगाए जाएंगे। खास जगहों पर नाइट विजन कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इमरजेंसी, ट्रायज, ICU और लेबर रूम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने को कहा गया है। इन जगहों पर प्रवेश नियंत्रण और सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए शिकायत समिति जरूरी
महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति बनानी होगी। इसमें 50 प्रतिशत महिला सदस्य और एक बाहरी NGO सदस्य को शामिल करना जरूरी होगा।
इसका उद्देश्य अस्पतालों में लैंगिक उत्पीड़न या हिंसा से जुड़ी शिकायतों का समाधान करना है।
सुरक्षा गार्डों की होगी ट्रेनिंग, निजी कर्मचारियों का सत्यापन
अस्पतालों में तैनात सुरक्षा गार्डों को विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें सामान्य सुरक्षा के साथ अस्पताल के माहौल और मरीजों से जुड़े मामलों को संभालने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसके अलावा आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन और पृष्ठभूमि जांच भी कराई जाएगी।
अस्पतालों में सुरक्षा समिति बनाई जाएगी। इसमें डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी, रेजिडेंट डॉक्टर और छात्रों को शामिल किया जाएगा।
मरीजों की मौत के बाद तनाव रोकने की तैयारी
अस्पतालों में मरीज की मौत के बाद अक्सर तनाव की स्थिति बन जाती है। इसे देखते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया गया है।
मध्यप्रदेश का सुरक्षा कानून केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। इसमें नर्स, दाई, पैरामेडिकल कर्मचारी, मेडिकल छात्र, नर्सिंग छात्र और अस्पताल के अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं।
FAQ
- मध्यप्रदेश में डॉक्टरों से मारपीट होने पर कितने समय में FIR होगी?
ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्यकर्मी के साथ हिंसा होने पर अस्पताल प्रमुख को अधिकतम छह घंटे के भीतर संस्थागत FIR दर्ज कराने की कार्रवाई करनी होगी। - डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से मारपीट करने पर कितनी सजा हो सकती है?
मध्यप्रदेश के कानून के अनुसार स्वास्थ्यकर्मी से हिंसा करने पर तीन महीने तक जेल, 10 हजार रुपए तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। - नए नियमों में अस्पतालों की सुरक्षा के लिए क्या बदलाव होंगे?
अस्पतालों में CCTV निगरानी, विजिटर पास, सुरक्षा गश्त, रोशनी व्यवस्था, पुलिस संपर्क और सुरक्षा ऑडिट जैसे कदम लागू किए जाएंगे।
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