एमपी में मानसून पड़ा धीमा, चपेट में आए 24 जिले, सीएम का गृह संभाग ज्यादा सूखा

Aman Vaishnav | Jul 05, 2026, 12:30 IST
एमपी के 24 जिलों सूखे की चपेट में
मध्य प्रदेश में इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य में इस बार सामान्य वर्षा का सिर्फ 90 से 94 फीसदी पानी ही बरस सकता है। सबसे ज्यादा चिंता सीएम मोहन यादव के गृह संभाग उज्जैन की है। यहां सबसे कम बारिश होने का अनुमान है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान है।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने यह चेतावनी दी है।
  • राज्य सरकार ने 24 जिलों के लिए खास कार्ययोजना बनाई है।
  • सबसे ज्यादा चिंता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह संभाग उज्जैन को लेकर है।
  • सरकार ने किसानों की मदद के लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है।

मध्य प्रदेश में बारिश को लेकर हालात इस साल सामान्य नहीं दिख रहे हैं। राज्य सरकार ने इसे हल्के में नहीं लिया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली है। साथ ही किसानों को समय रहते सचेत करने की तैयारी है।



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क्यों बनी सूखे की आशंका

मौसम विभाग ने इस बार मध्य प्रदेश में सामान्य वर्षा का सिर्फ 90 से 94 प्रतिशत ही होने का अनुमान जताया है। एक जून से एक जुलाई के बीच सामान्य तौर पर 139.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। लेकिन इस बार सिर्फ 92.4 मिमी बारिश ही दर्ज हुई। यानी करीब 47 मिमी की कमी रही।



वहीं मानसून के दूसरे चरण में भी राहत मिलने के आसार कम हैं। कई जिलों में अभी से 20 से 60 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज हो चुकी है।



अगर जुलाई और अगस्त में भी बारिश नहीं बढ़ी तो इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। इससे किसानों की आमदनी पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।



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किन 24 जिलों में सबसे ज्यादा चिंता

सरकार ने जिन 24 जिलों को लेकर खास रणनीति बनाई है, उनमें उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी शामिल है।



साथ ही अलीराजपुर, झाबुआ, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, गुना, दतिया, ग्वालियर और भिंड शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा चिंता उज्जैन संभाग के जिलों को लेकर जताई गई है।



इन सभी जिलों में कृषि गतिविधियों और बारिश की स्थिति की लगातार निगरानी होगी। जरूरत के हिसाब से अलग-अलग एडवाइजरी जारी की जाएगी।



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सरकार की सबसे बड़ी तैयारी क्या है

राज्य सरकार ने कृषि विभाग और राजस्व विभाग को मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। इन 24 जिलों के लिए विशेष एडवाइजरी पहले ही तैयार कर ली गई है।



इनमें से सात जिलों में और भी बारीक माइक्रो प्लानिंग की जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए लगातार तकनीकी निगरानी होगी।



किसानों को मौसम के अनुसार खेती करने की सलाह मोबाइल संदेश, सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों से दी जाएगी। जिला स्तर पर अफसरों को रोजाना हालात की समीक्षा करने को कहा गया है ताकि कोई भी बदलाव समय रहते पकड़ में आ जाए।



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किसानों को क्या करना होगा

सरकार किसानों को कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली फसलें अपनाने की सलाह देगी। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती का रकबा बढ़ाने पर जोर रहेगा। हर इलाके की परिस्थिति के हिसाब से किसानों को वैकल्पिक फसल चुनने में मदद मिलेगी।



रिज एंड फरो, रेज्ड बेड और डायरेक्ट सीडेड राइस जैसी वैज्ञानिक खेती तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनसे कम पानी में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है। इससे किसानों को नुकसान से बचाने की कोशिश होगी।



बीज और सिंचाई का इंतजाम कैसा होगा

सरकार ने वैकल्पिक फसलों के बीज समय पर उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसके तहत खेत तालाब और जल संरक्षण ढांचों के निर्माण व मरम्मत का काम होगा।



साथ ही मौजूद जल स्रोतों का पूरा इस्तेमाल किया जाएगा। सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि कम पानी में भी खेती जारी रह सके। इससे सूखे के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।



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सूखा पड़ा तो क्या करेगी सरकार

राजस्व विभाग ने साल 2020 की सूखा नीति के मुताबिक पूरी तैयारी कर ली है। विभाग के पास फिलहाल राहत कार्यों के लिए 20 करोड़ नौ लाख रुपए उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर और रकम भी जारी की जा सकती है।



इसले लिए सभी जिलों से क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान पहले ही बनवा लिए गए हैं। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है ताकि किसी भी हालात से तेजी से निपटा जा सके।



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