मध्य प्रदेश में 3 साल में ड्रग नेटवर्क खत्म करने की तैयारी, 500 से ज्यादा छात्रों वाले कॉलेजों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां
छोटे तस्करों के साथ पूरे नेटवर्क पर होगी कार्रवाई
भोपाल स्थित मंत्रालय में गुरुवार को राज्य स्तरीय एनसीओआरडी की पांचवीं बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने की। बैठक में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और नशामुक्ति अभियान को लेकर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि केवल छोटे तस्करों को पकड़ने से समस्या खत्म नहीं होगी। नशे का कारोबार चलाने वाले पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए पुलिस और दूसरे विभागों को मिलकर काम करना होगा।
सरकार ने अगले दो से तीन साल में ड्रग नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सूचना तंत्र मजबूत करने और विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
500 से ज्यादा छात्रों वाले कॉलेजों में एंटी ड्रग समितियां
प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में भी नशे के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसमें सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज शामिल होंगे। शुरुआत 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों से की जाएगी। इन संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां बनाई जाएंगी। समितियां विद्यार्थियों को नशे के नुकसान बताएंगी। शिक्षकों को भी जागरूकता अभियान में शामिल किया जाएगा।
नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देने वाले विद्यार्थियों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। यही व्यवस्था सूचना देने वाले शिक्षकों के लिए भी होगी। इन समितियों के नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी स्थानीय थाने के बीट प्रभारी को सौंपी जाएगी। इससे कॉलेज और पुलिस के बीच सीधा संपर्क बना रहेगा।
मुख्य सचिव ने नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 का प्रचार बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। इस नंबर पर नशीले पदार्थों से जुड़ी जानकारी दी जा सकती है।
2 साल में 2.74 लाख किलो मादक पदार्थ नष्ट किए
बैठक में नशीले पदार्थों के खिलाफ हुई कार्रवाई के आंकड़े भी पेश किए गए। अधिकारियों ने बताया कि मादक पदार्थों को नष्ट करने में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। साल 2025 में 2,073 मामलों से जुड़े 1 लाख 44 हजार 25 किलो मादक पदार्थ नष्ट किए गए। वहीं, 2026 में 30 सितंबर तक 2,756 मामलों में 1 लाख 30 हजार 380 किलो मादक पदार्थ नष्ट हुए।
इस तरह दोनों अवधियों में कुल 2 लाख 74 हजार 405 किलो मादक पदार्थ नष्ट किए गए हैं। इसके अलावा साल 2026 में सितंबर तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 2,986 मामले दर्ज हुए। इन मामलों में 4,091 आरोपियों से 50 हजार 933 किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए।
ड्रग बनाने वाली 18 अवैध लैब ध्वस्त
मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थ तैयार करने वाली अवैध प्रयोगशालाओं पर भी कार्रवाई की गई है। साल 2025 और 2026 के दौरान ऐसी 18 गुप्त प्रयोगशालाएं ध्वस्त की गईं। इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश पुलिस के साथ केंद्रीय एजेंसियां भी शामिल थीं। इनमें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) शामिल हैं।
बैठक में बताया गया कि साल 2025-26 के दौरान नशे से जुड़ी 811 शिकायतें मिलीं। ये शिकायतें एनसीबी के मानस पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1933 के जरिए प्राप्त हुई थीं।
ड्रग कारोबारियों की 446 करोड़ की संपत्ति अटैच
सरकार नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी संपत्तियों पर भी कार्रवाई कर रही है। बैठक में पिछले दो वर्षों की आर्थिक कार्रवाई की जानकारी दी गई। साल 2025 में एनडीपीएस एक्ट के 54 मामलों में 300 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई। वहीं, 2026 में 38 मामलों में 146 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच हुई।
इस तरह कुल 92 मामलों में 446 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने बताया कि सितंबर 2026 तक एनडीपीएस एक्ट के 201 विशेष ट्रायल मामलों की निगरानी की जा रही थी। इसी अवधि में अदालतों में लंबित आठ मामलों में दोषसिद्धि हुई।
सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र खोलने की तैयारी
सरकार नशे की लत से परेशान लोगों के इलाज के लिए सुविधाएं बढ़ाएगी। इसके तहत सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्य सचिव ने सामाजिक न्याय विभाग को इसके निर्देश दिए हैं। जिन जिलों में नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं, वहां से 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव मंगाए जाएंगे।
फिलहाल प्रदेश में सामाजिक न्याय विभाग के 31 नशामुक्ति केंद्र चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के भी 10 केंद्र संचालित हैं। बैठक में बताया गया कि नशामुक्ति अभियान में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष दो राज्यों में शामिल है। मुख्य सचिव ने इसके लिए संबंधित विभागों के काम की सराहना की।
नशामुक्ति अभियान से जुड़े 2.58 करोड़ लोग
प्रदेश में लोगों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। अब तक 30 हजार 339 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनमें करीब 2 करोड़ 58 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। सरकार के 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान को सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने देखा है। अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान को 58 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले हैं।
इसके साथ ही करीब 10 हजार युवाओं को अलग-अलग खेल गतिविधियों से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है।
कफ सिरप और केमिकल की सप्लाई पर भी रहेगी नजर
सरकार अब नशीले पदार्थ बनाने में इस्तेमाल हो सकने वाले रसायनों की सप्लाई पर निगरानी बढ़ाएगी। मुख्य सचिव ने उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को मिलकर कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत केमिकल फैक्ट्रियों से प्रीकर्सर रसायनों की अवैध सप्लाई रोकने पर काम होगा।
प्रीकर्सर ऐसे रसायन होते हैं, जिनका इस्तेमाल दूसरे रासायनिक पदार्थ तैयार करने में होता है। इनमें से कुछ का उपयोग अवैध नशीले पदार्थ बनाने में भी किया जा सकता है। अधिकारियों को औद्योगिक क्षेत्रों और संबंधित संगठनों की जानकारी आपस में साझा करने को कहा गया है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके अलावा कोडीन आधारित कफ सिरप के उत्पादन, सप्लाई और वितरण पर निगरानी रखी जाएगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को केंद्र सरकार से समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग को कफ सिरप की आपूर्ति और वितरण नेटवर्क की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
15 दिन में जांच रिपोर्ट देने की तैयारी
नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच तेज करने पर भी जोर दिया गया है। मुख्य सचिव ने फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य जांच के लिए भेजे जाने वाले नमूनों की रिपोर्ट 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराना है। इससे जांच प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करने में मदद मिलेगी।
मुख्य सचिव ने नशे की तस्करी से जुड़ी सूचना देने वालों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सूचना देने वालों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की बात कही। इसके साथ ही संबंधित अधिकारों को राज्य स्तर से जिला स्तर तक देने पर जोर दिया गया। इससे स्थानीय स्तर पर फैसले लेने और कार्रवाई करने में आसानी हो सकती है।
बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी शामिल थे।