एमपी एजुकेशन लोन में 45% छात्रों के आवेदन रिजेक्ट, हर दूसरे छात्र को बैंक ने किया निराश
मध्य प्रदेश में एजुकेशन लोन के लिए हजारों छात्रों ने आवेदन किया, लेकिन बैंकों की लाल कलम (आवेदन का खारिज होना) के चलते उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। लोकसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक स्थिति काफी चिंताजनक है।
प्रदेश में लोन मंजूरी की दर देश के अन्य हिस्सों खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के मुकाबले बहुत कम है। इस बारे में आंध्र प्रदेश के नरसाराओपेट से सांसद लावु श्री कृष्ण देवरायलु ने लोकसभा में सवाल उठाया। इसके जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जानकारी दी है।
45% छात्रों को कोई मदद नहीं
मध्य प्रदेश में एजुकेशन लोन के लिए छात्रों की हालत बहुत ही खराब हो रही है। बैंकों ने एक हजार 32 आवेदनों को सीधे रिजेक्ट कर दिया है। इसके अलावा एक हजार 84 आवेदन अब भी बैंकों में पेंडिंग हैं। इससे छात्रों का भविष्य असमंजस में है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो ये है कि आठ हजार 65 आवेदन बंद कर दिए गए या वापस ले लिए गए हैं। इसका मतलब यह है कि या तो प्रक्रिया बहुत ही जटिल है या फिर बैंकों की देरी ने छात्रों की उम्मीदें तोड़ दी हैं। कुल 22 हजार 728 आवेदकों में से सिर्फ 12 हजार 547 को लोन मिल पाया है। यानी करीब 45% छात्रों को कोई मदद नहीं मिल पाई है।
कम आय पर ज्यादा लोन
मध्य प्रदेश में जिन परिवारों की आय कम है उन्होंने एजुकेशन लोन का सबसे ज्यादा फायदा उठाया है। चार लाख 50 हजार तक की आय वाले नौ हजार 505 छात्रों को लोन मिल पाया है।
वहीं चार लाख 50 हजार से आठ लाख तक की आय वाले एक हजार 118 छात्रों को लोन मिला है। आठ लाख से अधिक आय वाले उच्च वर्ग के 1 हजार 924 छात्रों के आवेदन स्वीकृत हुए हैं।
पढ़ाई के दौरान 100% ब्याज सब्सिडी
चार लाख 50 हजार रुपए तक की आय वाले परिवार के छात्रों को केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी योजना (CSIS) के तहत पढ़ाई के दौरान 100% ब्याज सब्सिडी मिलती है।
इसके अलावा नई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत आठ लाख रुपए तक की आय वाले परिवार के छात्रों को 10 लाख रुपए तक के लोन पर 3% ब्याज की छूट भी मिल रही है।
लोन रिजेक्ट होने के सबसे बड़े कारण?
बैंकों द्वारा लोन रिजेक्ट करने के कई कारण होते हैं। छात्र के पैरेंट्स का क्रेडिट स्कोर खराब हो तो बैंक लोन की एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देते हैं। इसके अलावा कॉलेज या पाठ्यक्रम सरकार द्वारा तय किए गए गुणवत्तापूर्ण संस्थान की लिस्ट में नहीं आता तो भी लोन नहीं मिलता है।
आय प्रमाण पत्र या केवाईसी (KYC) डॉक्युमेंट्स में कोई गलती होने पर भी आवेदन रिजेक्ट हो जाता है। हालांकि अब सात लाख 50 हजार रुपए तक के लोन के लिए गारंटी की जरूरत नहीं है। फिर भी बैंक अक्सर सुरक्षा की मांग करते हैं।
गरीब वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
आंकड़ों से यह साफ होता है कि रिजेक्शन और पेंडेंसी का सबसे ज्यादा असर गरीब वर्ग पर पड़ता है। देश भर में इस वर्ग से सबसे ज्यादा आवेदन आते हैं। बैंकों की कड़ी शर्तों की वजह से इस वर्ग के आवेदनों में सबसे ज्यादा तकनीकी गलतियां निकलती हैं।
लोकसभा में चर्चा के दौरान एक और बात सामने आई है। बैंकों को छोटे कर्ज (एजुकेशन लोन) देने में हिचकिचाहट होती है। क्योंकि इनमें जोखिम और रिकवरी की समस्याएं ज्यादा होती हैं।
एमपी में एजुकेशन लोन के आवेदन के आंकड़े
| छात्र के परिवार की सालाना आय | 4.5 लाख तक | 4.5 लाख से 8 लाख तक | आठ लाख से अधिक | कुल |
| आवेदन की संख्या | 15 हजार 135 | चार हजार 496 | तीन हजार 097 | 22 हजार 728 |
| छात्रों द्वारा वापस लिए/बंद किए गए आवेदन | 5 हजार 714 | एक हजार 482 | 869 | 8हजार 065 |
| अस्वीकृत किए गए आवेदन | 751 | 176 | 105 | एक हजार 32 |
| स्पष्टीकरण के लिए छात्रों के पास/बैंक में पेंडिंग आवेदन | 743 | 206 | 135 | एक हजर 84 |
| स्वीकृत आवेदन की संख्या | सात हजार 927 | दो हजार 632 | एक हजार 988 | 12 हजार 547 |
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