एमपी में अकेलेपन के साए में बुजुर्ग, अपनों से दूर होने पर बढ़ रही मुसीबतें
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के शहरों और कस्बों में बुजुर्ग घरों में अकेले रहने को मजबूर हैं।
- एमपी में 57% परिवारों में बुजुर्गों का पुराना संयुक्त परिवार वाला सहारा छिन गया है।
- साल 2036 तक देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बढ़कर 23 करोड़ हो जाएगी।
- देश के 78% बुजुर्गों के पास बुढ़ापे में पेंशन का कोई सहारा नहीं है।
- बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों में मध्य प्रदेश देश में सबसे ऊपर है।
आज प्रदेश के शहरों और कस्बों में हालात बदल रहे हैं। आज के समय में घरों में या तो बुजुर्ग दंपती अकेले रह रहे हैं या फिर सिर्फ एक बुजुर्ग।
इनके बच्चे शहर से बाहर हैं या फिर विदेश में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में जब दवा लानी हो, या कोई काम हो तो बुजुर्ग किससे मदद मांगे? यह तस्वीर आज हमारे समाज के एक बहुत बड़े और दर्दनाक बदलाव को दिखाती है।
अकेले पड़ते बुजुर्ग, टूटते संयुक्त परिवार
आखिर माता-पिता जिंदगी के आखिरी पड़ाव में अपने ही घरों में अकेले क्यों पड़ते जा रहे हैं? इसका जवाब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS) की मध्य प्रदेश रिपोर्ट में मिलता है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में अब 57% परिवार न्यूक्लियर यानी एकल हो चुके हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर 10 में से 6 घर ऐसे हैं, जहां बुजुर्गों को संभालने वाला पुराना संयुक्त परिवार का सहारा अब मौजूद नहीं है।
आंकड़ों की नजर से बुजुर्गों की स्थिति
भविष्य में यह संकट और कितना बड़ा होने वाला है, इसे हम केंद्र सरकार, नीति आयोग और अन्य सर्वे के इन आंकड़ों से आसानी से समझ सकते हैं।
| मुख्य बिंदु | सर्वे और रिपोर्ट के आंकड़े |
| 2036 तक बुजुर्गों की आबादी | देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या करीब 23 करोड़ हो जाएगी, जो कुल आबादी का 15% होगी। |
| बीमारी का संकट | देश के 75% बुजुर्ग लंबे समय से चल रही किसी न किसी बीमारी से परेशान हैं। |
| शारीरिक और मानसिक अक्षमता | 40% बुजुर्ग शारीरिक अक्षमता और 20% मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी से जूझ रहे हैं। |
| पेंशन का सहारा नहीं | नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 78% बुजुर्गों के पास पेंशन की कोई सुविधा नहीं है। |
बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन उनके साथ रहने वाले परिवार के लोग कम होते जा रहे हैं। अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए अपनी दवा, बीमारी की जांच, बिजली का बिल और राशन का इंतजाम करना एक संकट बनता जा रहा है।
उन्हें हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। जबकि उन्हें नियमित देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत है।
अपराधियों के निशाने पर अकेले बुजुर्ग
वहीं अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए सिर्फ बीमारी और आर्थिक तंगी ही मुसीबत नहीं है। उनकी जान-माल पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। NCRB Report 2024 के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं।
बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश एक बार फिर पूरे देश में सबसे ऊपर आ गया है।
- साल 2024 में मध्य प्रदेश में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के पांच हजार 875 मामले दर्ज किए गए थे।
- इससे पहले साल 2023 में यह संख्या पांच हजार 738 थी। यानी अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।
- साल 2024 में अकेले मध्य प्रदेश में बुजुर्गों की हत्या के 144 मामले दर्ज हपए थे। साथ ही गंभीर चोट पहुंचाने के 376 मामले दर्ज हुए हैं।
FAQ
- मध्य प्रदेश में बुजुर्गों के अकेले होने की मुख्य वजह क्या है?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS) के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब 57% परिवार एकल यानी न्यूक्लियर हो चुके हैं। संयुक्त परिवारों के टूटने और बच्चों के नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहरों या विदेश चले जाने की वजह से बुजुर्ग घरों में अकेले रहने को मजबूर हैं। - मध्य प्रदेश में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध की क्या स्थिति है?
बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों में मध्य प्रदेश देश में सबसे ऊपर है। साल 2024 में यहाँ बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के 5,875 मामले दर्ज किए गए, जिनमें हत्या के 144 और गंभीर चोट पहुँचाने के 376 मामले शामिल हैं।
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