एमपी में बिजली चोरी का संकट: 22 जिलों में हर महीने 25% बिजली हो रही बर्बाद

Manya Jain | Jul 13, 2026, 17:20 IST
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एमपी में 22 जिलों में हर महीने 25% बिजली बर्बाद हो रही है। मध्य क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान है। बिजली कंपनी ने 2028 तक लाइन लॉस घटाकर बिजली दरें कम करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।

मध्य प्रदेश में बिजली दरेंपहले से बढ़ी हुई हैं। अबलाइन लॉस और बिजली चोरी का संकट भीसामने आया है। पूर्व, मध्य औरपश्चिम क्षेत्र के 22 जिलों में हरमहीने औसतन 25 प्रतिशत बिजलीबर्बाद हो रही है।



इसका बोझआखिरकार ईमानदार उपभोक्ताओं पर पड़ताहै। बिजली कंपनी ने अब इसे कमकरने के लिए बड़ा लक्ष्य तय कियाहै।



कहां कितना है लाइन लॉस

आंकड़े बताते हैं कि मध्यक्षेत्र की हालत सबसे खराब है। यहांलाइन लॉस 29.60 प्रतिशत तकपहुंच चुका है। पश्चिम क्षेत्रमें यह सबसे कम है, सिर्फ 12प्रतिशत। पूर्व क्षेत्र में भी स्थितिचिंताजनक है, यहां आंकड़ा 26.66प्रतिशत है।



बिजली कंपनी ने वर्ष2026-27 के लिए साफ लक्ष्य रखाहै। पूर्व क्षेत्र में लाइन लॉस कोघटाकर 14 प्रतिशत तक लाया जाएगा।मध्य क्षेत्र के लिए भी यही 14प्रतिशत का लक्ष्य तय हुआहै। पश्चिम क्षेत्र को 12प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर बनाए रखनेकी कोशिश होगी। कंपनी का लक्ष्यहै कि 2028 तक लाइन लॉस औरटैरिफ, दोनों में कमी लाई जाए।



एक अप्रैल से लागू हुई नई दरें

इसी बीच एक अप्रैल सेबिजली की नई टैरिफ दरें भीलागू हो चुकी हैं। 0 से 50यूनिट तक अब 4.71 रुपए प्रतियूनिट देना होगा। 51 से 150यूनिट तक की दर 5.67 रुपएतय की गई है। 151 से 300यूनिट तक उपभोक्ताओं को 7.05रुपए प्रति यूनिट चुकानेहोंगे। वहीं 300 यूनिट सेज्यादा खपत पर 7.24 रुपए प्रतियूनिट शुल्क लगेगा। इसकेअलावा अलग-अलग श्रेणियों मेंफिक्स चार्ज भी वसूला जा रहाहै।



विकेंद्रीकरण योजना से मिलेगी राहत

लाइन लॉस कम करने के लिएबिजली कंपनी नेविकेंद्रीकरण योजना शुरू की है। हरक्षेत्र के 21 सर्कल में सेदो-दो सर्कल पर खास फोकसकिया जाएगा। इन सर्कल केकुल 42-42 वितरण केंद्रोंपर विशेष निगरानी होगी।इन केंद्रों में वेइलाके शामिल हैं, जहांउपभोक्ताओं की संख्या 2500 सेकम है। यहां बिजलीचोरी रोकने, मीटर रीडिंगसही करने और बिलिंगसुधारने पर जोर रहेगा। फिलहालऔसत बिलिंग करीब 75प्रतिशत ही हो पा रही है।



बिजली चोरी रोकने के लिएवी-मित्र ऐप की भी मदद ली जारही है। कंपनी का दावाहै कि इस विकेंद्रीकरणयोजना से 2027 तक लाइन लॉसमें बड़ी कमी आ सकतीहै।



विभाग के सामने बड़ी चुनौतियां भी

सालों से राजीव गांधीविद्युतीकरण योजना, फीडरसेपरेशन, सौभाग्य योजना औरआरडीएसएस जैसी योजनाओं परकरोड़ों रुपए खर्च हो चुकेहैं। इसके बावजूद लाइनलॉस में अपेक्षित कमीनहीं आई है। बिजली कंपनीका तर्क है कि वितरणनेटवर्क तो बढ़ा, लेकिन उसीअनुपात में मैदानी औरतकनीकी स्टाफ की भर्ती नहींहो सकी।



इस वजह सेनिगरानी, मेंटेनेंस और बिजलीचोरी रोकने की कार्रवाईप्रभावित हो रही है। बिजलीविशेषज्ञों का मानना है किसिर्फ योजनाएं बनाना काफीनहीं है। सख्त कार्रवाई,पर्याप्त तकनीकी स्टाफ कीनियुक्ति, नियमित निरीक्षणऔर आधुनिक निगरानीतंत्र की जरूरत है।



उपभोक्ताओं पर आर्थिक असर

विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों को पिछले नौ वर्षों में कुल 34,561 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। इसमें पूर्व क्षेत्र कंपनी को सबसे ज्यादा 16 हजार 188.48 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि पश्चिम क्षेत्र कंपनी को 3,767 करोड़ रुपए का घाटा दर्ज किया गया।



सिर्फ बिजली चोरी और लाइन लॉस की बात करें तो, वर्ष 2023-24 में अकेले मध्य और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्र में करीब 2 हजार करोड़ रुपए की बिजली चोरी हुई थी। इसी नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों ने टैरिफ बढ़ाया। मई में टैरिफ में 3.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी।



इस साल अप्रैल में हुई नई बढ़ोतरी के पीछे भी यही तर्क दिया गया। कंपनियों ने 6 हजार करोड़ रुपए का राजस्व घाटा बताते हुए टैरिफ में 10.19 प्रतिशत तक वृद्धि की मांग की थी, लेकिन नियामक आयोग ने सिर्फ 4.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी। इसका सीधा असर करीब 1.90 करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।



एक पूर्व बिजली इंजीनियर के मुताबिक, अगर कंपनियां बिजली चोरी और लाइन लॉस को रोक लें, तो उन्हें घाटा नहीं होगा और आम उपभोक्ताओं पर महंगा टैरिफ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में बिजली लाइन लॉस कितना है?
    मध्य प्रदेश के 22 जिलों में औसतन 25 प्रतिशत बिजली लाइन लॉस हो रहा है।
  2. बिजली लाइन लॉस कम करने के लिए क्या योजना है?
    बिजली कंपनियां विकेंद्रीकरण योजना और वी-मित्र ऐप से निगरानी बढ़ा रही हैं।
  3. लाइन लॉस का असर बिजली उपभोक्ताओं पर कैसे पड़ता है?
    लाइन लॉस और बिजली चोरी का नुकसान टैरिफ बढ़ाकर उपभोक्ताओं से वसूला जाता है।

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