मध्य प्रदेश में सरप्लस उत्पादन फिर भी महंगी बिजली खरीदेगी सरकार, कांग्रेस ने उठाए सवाल

Sanjay Sharma | Oct 10, 2026, 24:04 IST
एमपी बिजली खरीदी टेंडर पर कांग्रेस ने सवाल उठाए है।
मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी के शॉर्ट टर्म बिजली खरीदी के टेंडर पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने अल्पकालिक बिजली खरीदी के टेंडर के जरिए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का अंदेशा जताया है। वहीं प्रदेश में सरप्लस बिजली पैदा करने के ऊर्जा विभाग के दावों पर सरकार की घेराबंदी की है।

रबी सीजन की आपूर्ति का बहाना

एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (Power Management Company Limited) द्वारा 29 सितम्बर को 800 मेगावाट बिजली खरीदी का टेंडर जारी किया गया है। टेंडर के तहत 20 नवम्बर 2026 से 20 फरवरी 2027 के बीच अलग- अलग टाइम स्लॉट की जरूरत पर बिजली खरीद की जानी है।



यानी यह टेंडर रबी सीजन में होने वाली बिजली की खपत को देखते हुए किया गया है। पावर मैनेजमेंट कंपनी के इस टेंडर की बिडिंग की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर रखी गई है। इसमें पावर ट्रेड लाइसेंसी, बिजली उत्पादक निजी और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों, पावर डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसियों को आमंत्रित किया गया है।



बिजली कंपनी के टेंडर पर सवाल

इसी टेंडर को लेकर कांग्रेस ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी मुकेश नायक ने बिजली कंपनी के साथ ही सरकार पर सवाल दागे हैं। उनका कहना है कि हाल ही में ऊर्जा विभाग के सचिव विशेष गढ़पाले प्रदेश में 26,360 मेगावाट बिजली पैदा करने का दावा कर रहे हैं। बिजली कंपनियों ने बीते साल रबी सीजन में बिजली की खपत का आंकड़ा 19,000 मेगावाट बताया था।



उत्पादन सरप्लस फिर खरीदी क्यों ?

सरकारी दावों को मानें तो प्रदेश में 26 हजार मेगावाट से भी अधिक बिजली पैदा हो रही है। जबकि रबी सीजन में बिजली की खपत 19000 मेगावाट है। यानी रबी सीजन में भी प्रदेश में करीब सवा 7 हजार मेगावाट बिजली सरप्लस रहती है। जिसे सरकार दिल्ली मेट्रो को बेचने का भी दावा करती रही है। जब प्रदेश में सरप्लस बिजली पैदा की जा रही है फिर सरकार को रबी सीजन की आढ़ में शॉर्ट टर्म बिजली खरीदी की क्या जरूरत पड़ गई है। ऐसे में बिजली कंपनी का टेंडर कांग्रेस की आशंका को पुख्ता करता नजर आ रहा है।



शॉर्ट टर्म टेंडर में खरीदी की दर अधिक

नायक का कहना है शॉर्ट टर्म खरीदी के तहत निजी कंपनियों से ली जाने वाली बिजली की दर अधिक होती है। इसे खरीदने पर बिजली कंपनी को काफी ज्यादा कीमत चुकानी होती है और इसका भार सरकार पर पड़ता है। बिजली नियामक आयोग भी शॉर्ट टर्म बिजली खरीदी पर आपत्ति दर्ज करा चुका है। इसको लेकर आयोग द्वारा निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके बावजूद बिजली कंपनी मनमानी कर रही हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि बिजली कंपनी के अधिकारी सरकार के इशारे पर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने और कमीशनखोरी की कोशिश कर रहे हैं।



कर्ज का भार बढ़ा रही बिजली कंपनी

मध्य प्रदेश सरकार को प्रदेश चलाने के लिए हर महीने कर्ज लेना पड़ रहा है वहीं बिजली कंपनी खर्च का भार बढ़ाने के लिए ऐसे टेंडर जारी कर रही है। कांग्रेस ने सरकार से पावर मैनेजमेंट कंपनी के इस टेंडर को रद्द करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उधर बिजली कंपनी के सेवानिवृत्त सीई केएल वर्मा ने भी शॉर्ट टर्म खरीदी टेंडर पर असहमति जताई है। उनका कहना है ऐसे टेंडर से न केवल अतिरिक्त बिजली खरीदने पर सरकार को ज्यादा कीमत चुकानी होती है बल्कि इसका असर बिजली की दरों पर भी पड़ता है।

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