बिजली सुधार योजना पर उठे सवाल: 1710 करोड़ खर्च के बाद भी जमीन पर काम अधूरा
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में बिजली वितरण सुधार योजना पर सवाल उठे हैं।
- 16 जिलों में 3310 करोड़ रुपए की आरडीएसएस योजना चल रही है।
- अब तक इसमें से 1710 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
- जांच में 5 जिलों में कई गंभीर तकनीकी खामियां मिली हैं।
- पोल टेढ़े, अर्थिंग अधूरी और सुरक्षा उपकरण गायब मिले हैं।
योजना पर उठे बड़े सवाल
मध्य प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़ी योजना चल रही है। प्रदेश के 16 जिलों में रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम यानी आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) पर काम हो रहा है।
इस योजना की कुल लागत 3310 करोड़ रुपए है। अब तक इसमें से 1710 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वहीं, जब बिजली कंपनी ने खुद निरीक्षण किया तो हकीकत कुछ और सामने आई। कई जगह काम अधूरा और घटिया मिला है।
निरीक्षण में खुली पोल
बिजली कंपनी के निरीक्षण और उसके बाद हुई विभागीय समीक्षा बैठक में बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रदेश के 5 जिलों में कई पोल टेढ़े मिले हैं। इसी तरह कहीं अर्थिंग का काम अधूरा पाया गया। कहीं डेंजर बोर्ड और सुरक्षा उपकरण मौके पर नदारद मिले।
इतना ही नहीं, डिस्मेंटल के बाद निकाली गई पुरानी केबलें भी भोपाल जमा नहीं कराई गई हैं। यह भी सामने आया है कि कई जगह 11 केवी फीडर का निर्माण अब तक शुरू ही नहीं हुआ है।
हरदा में मिली गंभीर लापरवाही
हरदा जिले में उपकेंद्रों पर स्पार्किंग और ऑयल लीकेज की समस्या मिली है। यहां 11 केवी फीडर निर्माण के उपकरण अब भी अधूरे मिले। डिस्मेंटल की गई सामग्री भोपाल नहीं भेजी गई है। पोल झुके हुए मिले और अर्थिंग का काम पूरा नहीं हुआ। सुरक्षा उपकरण भी मौके पर नहीं मिले। यह हालात बताते हैं कि निगरानी में बड़ी कमी रही है।
बैतूल और गुना में भी खामियां
बैतूल जिले में कई पोल झुके हुए और कुछ तो जमीन पर गिरे मिले हैं। यहां स्ट्रे कंक्रीटिंग और तय रेंज का पालन नहीं हुआ। अर्थिंग अधूरी मिली और केबल सीधे जमीन पर पड़ी हुई थी। वहीं गुना जिले में डीटीआर (Distribution Transformer) के स्ट्रक्चर झुके हुए मिले। यहां मफिंग गायब पाई गई। अर्थिंग का काम यहां भी अधूरा मिला है। दोनों जिलों में हालात लगभग एक जैसे नजर आए।
राजगढ़ और रायसेन का हाल
राजगढ़ जिले में एलटी केबल का कलर कोड सही नहीं मिला। साथ ही पेंटिंग का काम भी गायब पाया गया। मफिंग न होने के साथ अर्थिंग केबल भी अधूरी मिली। क्रॉस आर्म और बेल्टिंग एंगल कई जगह नहीं लगाए गए। यहां भी कई पोल झुके हुए हालत में मिले। रायसेन जिले में निरीक्षण के दौरान पोल झुके होने की शिकायत दर्ज हुई है। इसे भी रिपोर्ट में गंभीरता से शामिल किया गया है।
और कहां मिली खामियां
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कई जगह नट बोल्ट में जंग लग चुकी है। डीटीआर पर बर्ड और एलटीडीबी बॉक्स नहीं लगे मिले। साथ ही डेंजर बोर्ड और बाउंड्री वायर भी नदारद पाए गए। यह सभी सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपकरण माने जाते हैं। इनके न होने से हादसे का खतरा बढ़ जाता है। बिजली कंपनी ने इन सभी बिंदुओं को रिपोर्ट में दर्ज किया है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी काम इतना कमजोर क्यों रहा। बिजली कंपनी इस पूरे मामले की और गहराई से जांच कर रही है। जिन ठेकेदारों ने काम किया, उन पर कार्रवाई की तैयारी है। विभागीय अधिकारी भी अब सख्ती दिखाने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में शेष जिलों की भी जांच हो सकती है। लोगों को उम्मीद है कि जल्द सुधार होगा।
FAQ
- मध्य प्रदेश की बिजली सुधार योजना पर सवाल क्यों उठे हैं
16 जिलों की 3310 करोड़ की आरडीएसएस योजना में अब तक 1710 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन निरीक्षण में 5 जिलों में टेढ़े पोल, अधूरी अर्थिंग और सुरक्षा उपकरणों की कमी मिली है।
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