MP में बिजली 20% तक महंगी करने की तैयारी: 1.83 करोड़ उपभोक्ता, दो महीने में 100 आपत्तियां भी नहीं; तीन साल में सिर्फ 207 सुझाव
दो महीने में 100 आपत्तियां भी नहीं आईं
मध्यप्रदेश में वर्ष 2027-28 की बिजली दरें तय करने की प्रक्रिया चल रही है। विद्युत नियामक आयोग उपभोक्ताओं से प्रस्तावित दरों पर आपत्तियां और सुझाव मांग रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में आयोग को 100 से भी कम आपत्तियां मिली हैं। जबकि बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ दूसरी श्रेणियों पर भी पड़ सकता है।
कुछ उपभोक्ताओं ने बिजली कंपनियों के प्रस्तावित वितरण हानि के लक्ष्य पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कुछ आपत्तिकर्ताओं ने केंद्र सरकार की आरडीएसएस (RDSS) योजना का भी जिक्र किया है। हालांकि, कम आपत्तियां आने का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ता बढ़ोतरी के प्रस्ताव से सहमत हैं। फिलहाल आयोग की प्रक्रिया जारी है और नई दरों पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
तीन साल में सिर्फ 207 आपत्तियां और सुझाव
प्रदेश में बिजली दरों को लेकर उपभोक्ताओं की भागीदारी पिछले तीन वर्षों में भी सीमित रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान विद्युत नियामक आयोग को कुल 207 आपत्तियां और सुझाव मिले हैं। अब नए टैरिफ प्रस्ताव पर भी उपभोक्ताओं और संगठनों की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदेश में करीब 1.83 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। ऐसे में प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होने पर बड़ी संख्या में परिवारों का मासिक खर्च बढ़ सकता है।
बिजली कंपनियां क्यों बढ़ाना चाहती हैं दरें?
मध्यप्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों ने घाटे और बढ़ते खर्च का हवाला देकर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। कंपनियों का कहना है कि बिजली खरीदने और वितरण व्यवस्था चलाने पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा बिजली की वितरण हानि और कमजोर वित्तीय स्थिति भी चुनौती बनी हुई है। कंपनियों ने कोयले की बढ़ती कीमतों और 18 फीसदी जीएसटी के असर का भी उल्लेख किया है। वहीं, सरकार पर बकाया राशि और बिजली बिलों की वसूली में परेशानी की बात भी सामने आई है। इन कारणों को आधार बनाकर कंपनियों ने वर्ष 2027-28 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।
बिजली 20 फीसदी महंगी हुई तो कितना बढ़ेगा बिल?
अगर विद्युत नियामक आयोग 20 फीसदी बढ़ोतरी को मंजूरी देता है, तो उपभोक्ताओं का बिजली खर्च बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए, किसी परिवार का मौजूदा मासिक बिजली बिल 1,000 रुपए है। ऐसे में पूरे बिल पर 20 फीसदी बढ़ोतरी होने पर उसे 1,200 रुपए देने पड़ सकते हैं। इसी तरह 1,500 रुपए का बिल बढ़कर 1,800 रुपए तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह सिर्फ समझाने के लिए की गई गणना है। वास्तविक बढ़ोतरी बिजली की खपत, उपभोक्ता श्रेणी, फिक्स्ड चार्ज और स्वीकृत टैरिफ पर निर्भर करेगी।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने क्या कहा?
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि वर्ष 2027-28 के लिए बिजली दरों का प्रस्ताव आया है। विद्युत नियामक आयोग अभी उपभोक्ताओं की आपत्तियां और सुझाव दर्ज कर रहा है। इसके बाद आयोग जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करेगा। ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस मामले में फैसला करेगी। फिलहाल बिजली की नई दरों को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए अभी मौजूदा दरें ही लागू हैं।
अभी प्रस्ताव है, बढ़ी हुई दरें लागू नहीं हुईं
बिजली वितरण कंपनियों ने भले ही 15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया हो, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। विद्युत नियामक आयोग आपत्तियों और जनसुनवाई के आधार पर प्रस्ताव की समीक्षा करेगा। इसके बाद तय होगा कि बिजली की दरों में कितनी बढ़ोतरी होगी या मौजूदा दरों में कोई बदलाव किया जाएगा।