बिजली का बिल 4.80% महंगा, विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया टैरिफ
News In Short
एमपी में बिजली दरों में 4.80% की बढ़ोतरी।
बिजली कंपनियों ने 6044 करोड़ रुपए के घाटे की रिपोर्ट दी।
बढ़ी हुई दरें कंपनियों के घाटे को कवर करने के लिए।
एमपी विद्युत नियामक आयोग ने बढ़ोतरी की अनुमति दी।
पिछले साल की मामूली बढ़ोतरी के मुकाबले बड़ी वृद्धि।
News In Detail
मध्य प्रदेश की जनता को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि राज्य में बिजली की दरों में 4.80% की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। एमपी विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने 2026-27 के लिए यह वृद्धि की है।
बिजली कंपनियों ने पिछले वित्तीय वर्ष में 6044 करोड़ रुपए के घाटे का सामना किया, और इस घाटे को कवर करने के लिए बिजली दरों में यह बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल केवल 3.46% की मामूली बढ़ोतरी की गई थी, जबकि कंपनियों ने 7.52% की वृद्धि की मांग की थी।
एमपी में बिजली की दरें बढ़ी
मध्यप्रदेश में बिजली दर में 4.80% की बढ़ोतरी की गई है। एमपी विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने यह निर्णय लिया है, जिसे लेकर बिजली कंपनियों ने पहले ही घाटे की भरपाई के लिए यह बढ़ोतरी करने की मांग की थी। इस बढ़ोतरी से बिजली उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर प्रभावित होना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें अब अधिक भुगतान करना होगा।
बढ़ोतरी का कारण
बिजली कंपनियों ने बताया कि उन्हें पिछले वित्तीय वर्ष में 6044 करोड़ का घाटा हुआ है। इस घाटे को कवर करने के लिए उन्होंने MPERC से बिजली दरों में बढ़ोतरी की अनुमति मांगी थी।
कंपनियों का कहना है कि बढ़ी हुई दरों के जरिए वे अपने नुकसान को भरने की कोशिश करेंगे। पिछले साल बिजली दरों में केवल 3.46% की मामूली वृद्धि की गई थी, जबकि कंपनियों ने 7.52% की वृद्धि की मांग की थी।
कंपनियों का वित्तीय नुकसान
बिजली कंपनियों ने यह बताया कि उनकी वित्तीय स्थिति खराब हो गई है, और उनका घाटा पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। घाटे के कारण कंपनियां अपनी लागत को पूरा करने में असमर्थ थीं। इसके अलावा, बिजली खरीद की लागत में भी वृद्धि हुई है, जिससे कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
पिछले साल से ज्यादा बढ़ोतरी
पिछले साल केवल 3.46% की मामूली वृद्धि की गई थी, लेकिन इस बार 4.80% की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि अपेक्षाकृत बड़ी है, क्योंकि कंपनियों ने पिछले साल 7.52% की मांग की थी, लेकिन एमपी ERC ने इसे घटाकर 3.46% कर दिया था। अब, इस साल की बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए, यह तय किया गया है कि कंपनियों को अपने घाटे की भरपाई के लिए अतिरिक्त दरें लगानी होंगी।
उपभोक्ताओं पर असर
बिजली दरों में इस वृद्धि का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उपभोक्ताओं को अब अधिक बिल भरने होंगे, चाहे वे घरेलू उपभोक्ता हों या व्यापारिक।
यह वृद्धि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में लागू होगी, और यह उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ उत्पन्न करेगी। हालांकि, राज्य सरकार और MPERC ने यह कहा है कि उन्होंने यह कदम बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए उठाया है।
भविष्य में दरों पर निगरानी
MPERC ने यह भी कहा है कि वह बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर लगातार निगरानी रखेगा। यदि आवश्यक हुआ, तो भविष्य में और भी बदलाव किए जा सकते हैं ताकि बिजली कंपनियों की स्थिति में सुधार हो सके। राज्य सरकार ने भी आश्वासन दिया है कि वह उपभोक्ताओं की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए और कदम उठाएगी। बिजली कंपनी | बिजली टैरिफ
FAQ
- मध्य प्रदेश में बिजली की दरों में कितनी वृद्धि हुई है?
मध्य प्रदेश में बिजली की दरों में 4.80% की वृद्धि की गई है, जिसे 2026-27 के लिए एमपी विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत किया गया है। - बिजली कंपनियों ने दरों में वृद्धि क्यों की है?
बिजली कंपनियों ने 6044 करोड़ के घाटे की भरपाई के लिए MPERC से बिजली दरों में वृद्धि की अनुमति मांगी थी। - पिछले साल बिजली की दरों में कितनी वृद्धि की गई थी?
पिछले साल बिजली की दरों में केवल 3.46% की वृद्धि की गई थी, जबकि कंपनियों ने 7.52% की वृद्धि की मांग की थी।
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