कर्मचारी चयन मंडल को पीएमओ-जीएडी के निर्देश पर जांच कमेटी बनाने से भी परहेज
News in Short
- ईएसबी की निष्क्रियता से सैकड़ों अभ्यर्थी परेशान हैं।
- 2023 परीक्षा में एक ही प्रश्न पर अलग-अलग निर्णय लिए गए।
- एकतरफा निर्णय से सैकड़ों अभ्यर्थी चयन परीक्षा से बाहर हो गए।
- ईएसबी ने एक्सपर्ट पैनल की जांच से खुद को पीछे हटा लिया।
- पीएमओ और जीएडी के निर्देशों के बावजूद ईएसबी ने कार्रवाई नहीं की।
News in Detail
गड़बड़झालों से सुर्खियों में रहने वाले मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) का रवैया अब भी नहीं बदला है। अपनी गलतियों को सुधारकर अभ्यर्थियों को राहत देने की जगह ईएसबी उसे नजरअंदाज करने पर अड़ा है।पीएमओ, जीएडी के निर्देशों को भी ईएसबी अनदेखा कर रहा है।
उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2023 के सैंकड़ों अभ्यर्थी शिकायत लेकर भटकने मजबूर हैं। दो साल पहले हुई गड़बड़ी की जांच तक नहीं कराई गई है।
वहीं ईएसबी द्वारा एक शिफ्ट से प्रश्न रद्द करने से सैंकड़ों अभ्यर्थी पात्रता से वंचित रह गए। दो साल से इस मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है लेकिन ईएसबी इसे अनदेखा कर रहा है।
ईएसबी ने निर्देशों को किया नजरअंदाज
मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में कर्मचारी चयन मंडल हमेशा विवादों में घिरा रहा है। ऐसा ही एक विवाद उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2023 से भी जुड़ा है।
इस मामले को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी दो साल से शिकायत करते भटक रहे हैं। वे अब तक जीएडी, मुख्य सचिव, सीएम से लेकर पीएमओ तक शिकायत कर चुके हैं।
मामले की जांच के निर्देश भी जारी हुए, लेकिन ईएसबी ने इन्हें भी नजरअंदाज कर दिया। यही नहीं पीएमओ, जीएडी और सीएस कार्यालय को एक्सपर्ट पैनल का हवाला देकर भ्रमित किया गया है।
दो शिफ्टों में एक सवाल पर अलग-अलग निर्णय
2023 परीक्षा में एक ही सवाल को दो शिफ्टों में अलग-अलग तरीके से पूछा गया। मीना माता से जुड़ा सवाल एक शिफ्ट में रद्द किया गया। अंग्रेजी अनुवाद पर आपत्ति के कारण नार्मलाइजेशन के सैकड़ों अभ्यर्थियों का स्कोर कम हुआ और वे पात्रता से बाहर हो गए।
इस पर जांच की गई, लेकिन कमेटी का गठन नहीं किया गया। परीक्षा में हुई चूक की जांच पर ईएसबी चेयरमैन संजय शुक्ला ने भी एक्सपर्ट पैनल की अनुशंसा का हवाला देकर प्रश्न को टाल दिया है।
चयन परीक्षा में भी शामिल होने से हुए वंचित
एकतरफा निर्णय के कारण सैकड़ों अभ्यर्थी चयन परीक्षा से बाहर हो गए। कार्तिक गिरवाल और सुदर्शन सोलंकी सहित कई अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत की, लेकिन ईएसबी ने इसे एक्सपर्ट पैनल की अनुशंसा का हवाला देकर टाल दिया। इसके बाद अभ्यर्थियों ने जीएडी, सीएम, पीएमओ से शिकायत की, लेकिन जांच नहीं हुई।
एक परीक्षा में बदला रिजल्ट, दूसरी में मनमानी
उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में एक जैसे प्रश्न पर अलग-अलग कार्रवाई की गई। एक शिफ्ट में प्रश्न को स्वीकार किया गया, जबकि दूसरी में उसे निरस्त कर दिया गया।
अभ्यर्थियों की शिकायत के बावजूद, ईएसबी ने इसकी जांच जरूरी नहीं समझी। उच्च शिक्षक चयन परीक्षा में ऐसी ही गड़बड़ी पर हाईकोर्ट को रिजल्ट बदलना पड़ा था।
एक्सपर्ट कमेटी की जांच से परहेज
ईएसबी बार-बार एक्सपर्ट पैनल की अनुशंसा को आधार बना रहा है। लेकिन अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि पीएमओ और जीएडी के निर्देशों के बावजूद जांच क्यों नहीं हो रही। अभ्यर्थियों को शक है कि नार्मलाइजेशन का लाभ कुछ खास लोगों को दिलवाने की साजिश हो रही है।
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