प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन पर फैसला जल्द, MP में कर्मचारी कल्याण की होगी बैठक
मध्य प्रदेश में जल्द कर्मचारी कल्याण पर बड़ी समीक्षा बैठक होगी। मुख्यमंत्री खुद इसकी अध्यक्षता करेंगे। बैठक से पहले सभी विभागों से पांच अहम मुद्दों पर डेटा मांगा गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी विभागों को एक नोट भेजा है। इसमें कर्मचारी कल्याण से जुड़े पांच विषयों पर जानकारी मांगी गई है। ये विषय हैं अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, सीधी भर्ती, अनुशासनात्मक कार्यवाही और पेंशन प्रकरण।
हर विभाग को अपने यहां लंबित मामलों की संख्या देनी होगी। सामान्य प्रशासन विभाग सारा डेटा जुटाकर मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत करेगा।
क्यों हो रही यह हलचल?
सरकारी दफ्तरों में हजारों कर्मचारी बरसों से अपनी फाइल का इंतजार कर रहे हैं। किसी की अनुकंपा नियुक्ति अटकी है। किसी की पदोन्नति सालों से लंबित है।
अब मुख्यमंत्री कार्यालय ने सीधे हस्तक्षेप का फैसला किया है। सोचिए, जिस कर्मचारी की फाइल बरसों से अटकी है। उसके लिए यह खबर कितनी बड़ी है।
बैठक की तारीख अभी तय नहीं है। नोट में सिर्फ इतना लिखा है कि यह बैठक निकट भविष्य में होगी। लेकिन तैयारी अभी से शुरू करने को कहा गया है। अब इंतजार सिर्फ तारीख का बचा है।
अनुकंपा नियुक्ति पर क्या मांगा
अनुकंपा नियुक्ति क्या है? किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य को नौकरी मिलती है। विभाग, संभाग और जिला स्तर पर लंबित मामलों की संख्या मांगी गई है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि मामले क्यों अटके हुए हैं।
पदों के मापदंड होंगे आसान?
नोट में नियमों को और युक्तियुक्त बनाने पर सुझाव भी मांगे गए हैं। यानी अनुकंपा नियुक्ति के मौजूदा नियम और मापदंड बदल सकते हैं। इससे कई परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है। यह उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है। वे सालों से इंतजार में हैं।
पदोन्नति के पेंडिंग केस पर नजर
दूसरा बड़ा मुद्दा है पदोन्नति यानी प्रमोशन। संवर्ग यानी कैडर, एक जैसे पद वाले कर्मचारियों का समूह होता है। हर संवर्ग के हिसाब से लंबित मामलों की गिनती मांगी गई है। विभाग, संभाग और जिला स्तर पर अलग-अलग डेटा देना होगा।
क्यों अटकी है प्रमोशन प्रक्रिया?
नोट में बचे काम को समयसीमा के साथ पूरा करने को कहा गया है। अगर कोई नीतिगत अड़चन है तो उसकी जानकारी भी देनी होगी। यह सीधा सवाल है कि प्रमोशन कहां और क्यों अटका है। आप सोच रहे होंगे, आखिर प्रमोशन में इतना समय क्यों लगता है?
खाली पदों पर सीधी भर्ती तैयारी
तीसरा मुद्दा सीधी भर्ती का है। पहले से खाली पदों को गिना जाएगा। साथ ही हाल की पदोन्नतियों से बने खाली पद भी जुड़ेंगे। सभी विभागों को भर्ती का पूरा रोडमैप देना होगा।
और यहीं से असली तस्वीर सामने आती है। जितने पद खाली होंगे, उतने युवाओं को नौकरी का मौका मिल सकता है। यह बेरोजगार युवाओं के लिए सीधा असर डालने वाला फैसला है।
अनुशासनात्मक जांच पर सख्ती
चौथा मुद्दा अनुशासनात्मक कार्यवाही का है। विभागीय जांच के लंबित मामलों की संख्यात्मक जानकारी मांगी गई है। यह जानकारी सबसे पुराने मामले से शुरू होगी।
पुराने मामलों की लिस्ट मांगी
तय समयसीमा से ज्यादा समय तक लंबित मामलों के कारण बताने होंगे। साथ ही समाधान के सुझाव भी मांगे गए हैं। आप सोच रहे होंगे, आखिर इतनी देरी क्यों होती है। जवाबदेही तय करने की यह पहली सीढ़ी मानी जा रही है।
पेंशन के अटके मामलों पर नजर
पांचवां और आखिरी मुद्दा पेंशन प्रकरण का है। सेवानिवृत्ति के बाद संवर्गवार लंबित पेंशन मामलों की संख्या मांगी गई है। विभाग, संभाग और जिला स्तर पर यह डेटा देना होगा। कारण और समाधान दोनों बताने होंगे। रिटायर हो चुके कर्मचारियों के लिए यह मुद्दा सबसे संवेदनशील है।
जीएडी को मिली नोडल जिम्मेदारी
सामान्य प्रशासन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इसे संक्षेप में जीएडी (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) कहा जाता है। वह सभी विभागों से जानकारी जुटाएगा। फिर बैठक के लिए पूरा प्रस्तुतिकरण तैयार करेगा। यह नोट अपर मुख्य सचिव नीरज मण्डलाई ने जारी किया है।
लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है। हर विभाग को तय समय में सटीक डेटा देना होगा। अगर जानकारी अधूरी आई तो दिक्कत बढ़ेगी। देर से आई तो भी बैठक की तैयारी अटक सकती है।
मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की नजर अब इस बैठक पर टिकी है। क्योंकि इसी बैठक से तय होगा कि उनकी अटकी फाइल कब आगे बढ़ेगी।
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