MP में कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी, 7 महीने से अटके महंगाई भत्ते की मांग

Jitendra Shrivastava | Jul 31, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्व की स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते व राहत की वृद्धि सात महीने से रोक रखी है। कर्मचारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • 7 महीने से अटका कर्मचारियों का महंगाई भत्ता, नाराजगी बढ़ी।
  • 10 अगस्त तक फैसला नहीं तो 18 से होगा आंदोलन।
  • राजस्व घाटे से बचने सरकार ने खर्च पर लगाई लगाम।
  • केंद्र ने बढ़ाया डीए, एमपी कर्मचारी अब भी इंतजार में।
  • आउटसोर्स कर्मचारियों ने भी मांगा 26 हजार वेतन।

मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते व राहत की वृद्धि सात महीने से रोक रखी है। वित्त विभाग का अनुमान है कि करीब 10 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्रभावित हो सकता है।



इसी वजह से सरकार ने खर्च पर नियंत्रण के कदम उठाए हैं। कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि 10 अगस्त तक फैसला नहीं हुआ तो 18 अगस्त से आंदोलन होगा। आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भी न्यूनतम वेतन और एरियर की मांग उठाई है।



मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर फिलहाल नहीं है। राज्य सरकार ने वित्तीय स्थिति को देखते हुए महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में वृद्धि पर रोक लगा रखी है। यह रोक पिछले सात महीने से जारी है।



क्यों रुकी है भत्ते की वृद्धि

वित्त विभाग का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व अधिक रहेगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात बदलने से यह अनुमान गड़बड़ा गया है। कमजोर मानसून ने भी चुनौती बढ़ाई है।



वित्त विभाग को आशंका है कि करीब 10 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्रभावित हो सकता है। इससे राजस्व अधिक होने के बजाय घाटे की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से सरकार ने खर्च नियंत्रित करने के कदम उठाने शुरू किए हैं।



कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ी

प्रदेश के कर्मचारियों को अभी 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। बढ़ती महंगाई से कर्मचारी परेशान हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दे दी है। कहा गया है कि 10 अगस्त तक अगर महंगाई राहत बढ़ाने का फैसला नहीं हुआ, तो 18 अगस्त से आंदोलन शुरू होगा।



बजट और घाटे का गणित

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 4,38,317 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था। आय की तुलना में खर्च कम रहने से 44.42 करोड़ रुपए अधिक रहने का अनुमान लगाया गया था। लेकिन इस बार राज्य को कई झटके भी लगे हैं।



छठवें वित्त आयोग की सिफारिश से राज्य को सालाना करीब 7,500 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। यह घाटा अगले पांच साल तक बढ़ता रहेगा। इसके अलावा जीएसटी (GST – Goods and Services Tax) में तीन से चार प्रतिशत की कमी आई है।



एक प्रतिशत भत्ते पर कितना खर्च

सरकार के मुताबिक कुल मिलाकर करीब 10 हजार करोड़ रुपए की आय प्रभावित हो रही है। एक प्रतिशत महंगाई भत्ता व राहत बढ़ाने पर करीब 570 करोड़ रुपए का सालाना भार आता है।



अगर जनवरी 2026 से भत्ता 50 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाता है, तो करीब 1,100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। स्वामित्व योजना में मुफ्त रजिस्ट्री से भी सरकार पर 3,800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आया है।



ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी के लिए भी राजकोष से पैसा देना होगा। इसी वजह से वित्त विभाग ने मितव्ययिता के निर्देश जारी किए हैं। इसमें नए वाहनों की खरीद, विदेश यात्रा और बड़े कार्यक्रमों पर रोक शामिल है।



कर्मचारी संघ का पक्ष

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि मार्च से जून 2026 के बीच घरेलू गैस करीब 89 रुपए महंगी हुई है। पेट्रोल के दाम भी नौ रुपए प्रति लीटर तक बढ़े हैं।



तिवारी का कहना है कि केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों का भत्ता 58 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक फैसला नहीं लिया। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को एक जनवरी 2026 से यह लाभ मिल चुका है, लेकिन राज्य के कर्मचारी इससे वंचित हैं।



आउटसोर्स कर्मचारियों की भी मांग

मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने यूपी-हरियाणा जैसी नीति और न्यूनतम 26 हजार रुपए वेतन की मांग की है।



प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह के मुताबिक कटनी में कर्मचारियों को सिर्फ 6,500 रुपए वेतन मिल रहा है। कई जिलों में चार से पांच महीने से भुगतान अटका है।



संघ ने 11 महीने का एरियर, नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण और अकारण सेवामुक्ति पर रोक की मांग भी रखी है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशभर में आंदोलन होगा।



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