एमपी के कर्मचारियों पर सैलरी संकट गहराया, आदिम जाति कल्याण विभाग में बजट की कमी!
सरकारी कर्मचारियों के घर का बजट बिगड़ा
दिवाली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन मध्यप्रदेश के कई सरकारी कर्मचारियों के घर का बजट बिगड़ गया है। आदिम जाति कल्याण विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेतन का इंतजार कर रहे हैं। कई जिलों से वेतन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वेतन मद सरकारी बजट का वह हिस्सा है, जो कर्मचारियों के वेतन के लिए निर्धारित होता है।
बजट की कमी से अटका वेतन
रायसेन जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावास कर्मचारी परेशान हैं। करीब डेढ़ सौ छोटे कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं मिला है। जिला संयोजक मोहित भारती ने इसकी वजह बजट की कमी बताई है। उनके मुताबिक, बजट मिलते ही कर्मचारियों का भुगतान करा दिया जाएगा।
वेतन में देरी से कर्मचारियों के सामने घरेलू खर्च चलाने का संकट है। दैनिक वेतनभोगियों को काम के हिसाब से मेहनताना मिलता है। इसलिए भुगतान में देरी का असर उन पर ज्यादा पड़ता है। अब कर्मचारियों को वेतन मिलने का इंतजार है।
संघ की मांग और चेतावनी
मध्यप्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ ने सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की है। संघ ने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिलों के लिए बजट मांगा है। उसकी मांग है कि दिवाली पर कर्मचारियों का वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
इस संबंध में कर्मचारी भवन, गीतांजलि चौराहे पर बैठक बुलाई गई थी। इसमें संघ की केंद्रीय प्रबंध समिति और विभागीय समितियों ने हिस्सा लिया। बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा हुई। साथ ही, आंदोलन की रणनीति भी तय की गई।
पेंशनरों और आउटसोर्सिंग का सवाल
बैठक में पेंशनरों से जुड़ी मांगें भी उठाई गईं। संघ ने पेंशनरों को महंगाई भत्ते का पूरा लाभ देने की मांग की है। इसके लिए पांच लाख पेंशनरों का जिक्र किया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा अभी आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है।
प्रदेश के कुछ अन्य विभागों में आउटसोर्सिंग एजेंसियों का रवैया भी सवालों के घेरे में है। इससे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन संबंधी आदेशों का पालन प्रभावित हो रहा है। इस तरह Madhya Pradesh outsourced employees salary से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। सरकारी कामकाज में कई एजेंसियां शामिल होती हैं। इसलिए वेतन भुगतान की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
सतपुड़ा भवन में प्रदर्शन की तैयारी
मांगों पर विचार नहीं होने पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन की चेतावनी दी है। संघ ने 13 नवंबर को सतपुड़ा भवन के सामने प्रदर्शन की घोषणा की है। हालांकि, यह तारीख अभी आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुई है। प्रदर्शन का समय दोपहर 1 से 3 बजे तक बताया गया है। दिवाली से पहले फैसला नहीं होने पर आंदोलन तेज हो सकता है।
कागजी निर्देश और जमीनी हकीकत
श्रम विभाग ने त्योहारों से पहले समय पर वेतन देने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। कई जिलों में भुगतान अटका है और कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में एमपी कर्मचारी सैलरी की समय पर उपलब्धता अहम सवाल बन गई है।
कौन सबसे ज्यादा प्रभावित है?
चतुर्थ श्रेणी, दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी इससे प्रभावित हैं। इन कर्मचारियों का घरेलू खर्च वेतन पर निर्भर रहता है। इसलिए एक महीने की देरी भी उनके लिए परेशानी बढ़ा सकती है। श्रम विभाग के निर्देशों का असर जिलों में दिखना जरूरी है। इसके लिए भुगतान प्रक्रिया में तेजी लानी होगी।
FAQ
- आदिम जाति कल्याण विभाग में वेतन क्यों अटका है?
वेतन मद के लिए बजट उपलब्ध नहीं होने की वजह बताई जा रही है। रायसेन जिले में छात्रावास कर्मचारियों का दो महीने से वेतन रुका है। हालांकि, प्रदेश स्तर पर बजट की कमी का दावा पुष्ट नहीं है। - कर्मचारियों का सतपुड़ा भवन प्रदर्शन कब होगा?
संघ के मुताबिक, प्रदर्शन 13 नवंबर को प्रस्तावित है। यह सतपुड़ा भवन के सामने दोपहर 1 से 3 बजे तक होगा। हालांकि, प्रदर्शन की तारीख अभी आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुई है।