MP में कर्मचारियों के वेतन पर सवाल, हेल्थ वर्कर्स ने की शिकायत, गुरुजियों के मानदेय पर हाईकोर्ट सख्त
उनका आरोप है कि तय दर (Rate) से काफी कम पेमेंट किया जा रहा है। कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री से जांच कराने की मांग की है।
गुरुजियों के मानदेय पर हाईकोर्ट सख्त
मध्य प्रदेश में संविदा शाला शिक्षक ग्रेड-3 के गुरुजी लंबे समय से कम मानदेय पर काम कर रहे हैं। इन्हें हर महीने केवल 5 हजार रुपए मिलते हैं। इसी मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि आज की महंगाई में 5 हजार रुपए बेहद कम हैं। प्रदेश में अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी 12 हजार 150 रुपए है। इसके बावजूद पढ़ाने वाले शिक्षकों को इसकी आधी रकम भी नहीं मिल रही है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गुरुजियों के मानदेय पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में तीन महीने के भीतर फैसला लेने को कहा है।
आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाना शोषण जैसा
यह मामला लक्ष्मण सिंह धाकड़ बनाम मध्यप्रदेश राज्य से संबंधित है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कम मानदेय को लेकर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने साल 1982 के पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स मामले का भी हवाला दिया। इसमें आर्थिक मजबूरी के कारण कम पेमेंट पर काम कराने का मुद्दा उठाया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना पेमेंट करना संविधान के अनुच्छेद 23 की भावना के खिलाफ है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता की तरह काम करना चाहिए। कर्मचारियों को उनके काम के अनुसार उचित पेमेंट मिलना जरूरी है।
अस्पताल कर्मचारियों के वेतन में भी गड़बड़ी के आरोप
शिक्षकों के मानदेय का मामला सामने आने के बीच स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भी शिकायत की है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों ने कम वेतन मिलने का आरोप लगाया है। मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के मुताबिक प्रदेश के 20 जिलों में वेतन भुगतान में अंतर है।
संघ का दावा है कि शासन की निर्धारित अकुशल श्रमिक दर 13 हजार 571 रुपए है। इसके बावजूद कर्मचारियों को हर महीने पांच हजार 500 से 11 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इस हिसाब से कुछ कर्मचारियों को निर्धारित दर से लगभग 8 हजार रुपए कम मिल रहे हैं। संघ ने साल 2019 से 2026 तक हुए पेमेंट की जांच कराने की मांग की है।
2019 में 2500 कर्मचारियों से हुई शुरुआत
कर्मचारी संघ के मुताबिक, 13 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिए भर्ती हुई थी। उस समय दो हजार 500 सफाई कर्मचारियों की सेवाएं आउटसोर्स व्यवस्था के तहत ली गई थीं। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में बड़ी संख्या में नियुक्तियां की गईं।
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए 18 हजार मल्टी टास्क वर्कर नियुक्त किए। इन कर्मचारियों को जिला अस्पतालों और सिविल अस्पतालों में तैनात किया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी इनकी सेवाएं ली गईं। इसके अलावा उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी कर्मचारियों की तैनाती की गई।
किस जिले में कितना वेतन मिलने का दावा?
कर्मचारी संघ ने अलग-अलग जिलों में मिलने वाले वेतन के आंकड़े भी दिए हैं। संघ के मुताबिक, कटनी में कर्मचारियों को पांच हजार 500 से छह हजार 500 रुपए मिल रहे हैं। उज्जैन में हर महीने सात हजार 650 रुपए दिए जा रहे हैं। सागर में कर्मचारियों को आठ हजार रुपए मंथली पेमेंट का दावा है।
भोपाल के अस्पतालों में भी वेतन अलग-अलग बताया गया है। संघ के अनुसार, भोपाल के काटजू अस्पताल में कर्मचारियों को नौ हजार रुपए मिल रहे हैं। वहीं जेपी अस्पताल में 10 हजार 840 रुपए दिए जा रहे हैं।
इन आंकड़ों के आधार पर संघ ने मिनिमम वेजेस के पालन पर सवाल उठाए हैं। हालांकि कर्मचारियों के रियल पेमेंट और लागू वेतन दर की जांच होना अभी बाकी है।
ईपीएफ में भी गड़बड़ी की आशंका
कम वेतन के अलावा कर्मचारियों ने भविष्य निधि से जुड़ी शिकायत भी की है। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कामलेन्द्र सिंह का कहना है कि कर्मचारियों के ईपीएफ में अनियमितताओं की आशंका है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने दस्तावेजों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शिकायत की है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई है। संघ ने सैलरी पेमेंट और ईपीएफ डिडक्शन की जांच की मांग की है। इसके लिए लोकायुक्त से जांच कराने का अपील की है।
FAQs
- मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने वेतन गड़बड़ी का आरोप क्यों लगाया है?
संघ ने 20 जिलों में वेतन गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री से शिकायत की है। उनके अनुसार, कर्मचारियों को मनमाने वेतन दिए जा रहे हैं और ईपीएफ से जुड़े मामलों की भी जांच की मांग की गई है। - कर्मचारियों को कितनी वेतन की कमी महसूस हो रही है?
संघ के अनुसार, कर्मचारियों को 5,500 से 11,000 रुपए के बीच वेतन मिल रहा है, जबकि कम कौशल वाले मजदूरों के लिए मिनिमम मजदूरी 13,571 रुपए तय है। - मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों के स्टाइपेंड के संबंध में क्या निर्देश दिए हैं?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों के 5,000 रुपए के स्टाइपेंड पर दोबारा विचार करने का निर्देश देते हुए कहा है कि अगर आवश्यकता हो, तो विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सकता है।