MP EOW की सुस्त चाल, 23 हजार से ज्यादा शिकायतें, पर कोर्ट में सिर्फ 8 चालान पेश

Aman Vaishnav | Jul 23, 2026, 14:46 IST
एमपी ईओडबल्यू
एमपी में आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली एजेंसी EOW की ढीली कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2020 से जून 2026 तक EOW को कुल 23 हजार 261 शिकायतें मिलीं, लेकिन सिर्फ 8 मामलों में ही कोर्ट में चालान पेश हो पाया।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ पर सवाल उठे हैं।
  • साल 2020 से जून 2026 तक इस एजेंसी को 23 हजार 261 शिकायतें मिलीं।
  • इनमें से सिर्फ तीन हजार 18 आवेदन जांच के लायक माने गए।
  • 756 आवेदन बिना कार्रवाई के बंद कर दिए गए।
  • पूरी अवधि में केवल 8 मामलों में अदालत में चालान पेश हो सका।

विधानसभा में उठा सवाल

दरअसल कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में यह सवाल पूछा था। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग ने जवाब दिया।ट



इसी जवाब में ईओडब्ल्यू के आंकड़े सार्वजनिक हुए हैं। आंकड़ों ने जांच एजेंसी की धीमी रफ्तार को उजागर कर दिया है।



शिकायतों का पूरा गणित

बता दें कि बीते कुछ सालों में कुल 23 हजार 261 आवेदन ईओडब्ल्यू के पास पहुंचे। वहीं जांच के बाद सिर्फ तीन हजार18 को शिकायत के रूप में दर्ज किया गया।



756 आवेदन जांच के बाद नस्तीबद्ध यानी फाइल बंद कर दिए गए। बाकी हजारों शिकायतें किस स्थिति में हैं, यह साफ नहीं है।



जिन मामलों में मिली रफ्तार

23 हजार से ज्यादा शिकायतों में से सिर्फ 8 मामले ऐसे रहे, जिनमें अदालत तक बात पहुंची। इन मामलों की कहानी अलग-अलग जिलों से जुड़ी है।



इंदौर जल कार्य घोटाला

यह मामला इंदौर नगर निगम के जल कार्य विभाग में फर्जी बिलों का था। इसकी शिकायत 2020 में मिली थी। ईओडब्ल्यू ने 12 अगस्त 2025 को अदालत में चालान पेश किया।



सतना स्वास्थ्य निर्माण मामला

वहीं सतना में सरकारी योजनाओं में पद के दुरुपयोग की शिकायत थी। 2021 में अपराध दर्ज हुआ। जांच पूरी होने पर अगस्त 2022 में चालान पेश हुआ।



भोपाल भूमि दस्तावेज मामला

इसके अलावा भोपाल में सरकारी जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप था। 2020 में शिकायत मिली, 2022 में मामला दर्ज हुआ। नवंबर 2025 में चालान पेश हुआ।



जबलपुर विकास प्राधिकरण

जबलपुर विकास प्राधिकरण की निविदाओं में गड़बड़ी की शिकायत थी। 2021 में मामला दर्ज हुआ। सितंबर 2023 में चालान पेश हुआ, अदालत में सुनवाई अभी जारी है।



ग्वालियर समिति धोखाधड़ी

ग्वालियर की एक गृह निर्माण समिति में प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी हुई। 2021 में शिकायत आई, 2023 में मामला दर्ज हुआ था। जनवरी 2026 में चालान पेश किया गया।



भोपाल सहकारिता मामला

यह मामला भोपाल की सहकारी संस्था में पद के दुरुपयोग का आरोप था। 2021 में मामला दर्ज हुआ। सितंबर 2024 में चालान पेश हुआ, बाद में जुलाई 2025 में पूरक चालान भी दिया गया।



उज्जैन निर्माण घोटाला

एक शिकायत उज्जैन में निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री इस्तेमाल की थी। 2022 में शिकायत मिली, 2023 में मामला दर्ज हुआ। जून 2025 में चालान अदालत में पेश हुआ।



रीवा नगर निगम मामला

साथ ही रीवा में फर्जी माप-पुस्तिका भरकर भुगतान लेने की शिकायत थी। 2025 में ही शिकायत, जांच और चालान तीनों पूरे हुए। दिसंबर 2025 में चालान पेश हुआ।



महेश पांडे शिकायत का पेच

एक और चर्चित मामला व्यापमं से जुड़ी गड़बड़ियों का है। यह शिकायत स्वर्गीय महेश पांडे ने दर्ज कराई थी। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने नवंबर 2025 में खुद को इस मामले में फरियादी बनाने का आवेदन दिया। ईओडब्ल्यू ने इसे मूल शिकायत से जोड़ लिया है। यह मामला अभी जांच के दौर में है।



सवालों के घेरे में जांच रफ्तार

23 हजार से ज्यादा शिकायतों में सिर्फ 8 चालान का आंकड़ा गंभीर सवाल खड़े करता है। कई मामले सालों से लंबित बताए जा रहे हैं।



जांच में देरी से पीड़ितों को इंसाफ मिलने में वक्त लग रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाता रहा है। आने वाले समय में सरकार से और जवाब मांगे जा सकते हैं।



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