एमपी में सरकारी नौकरी के नियमों में बदलाव! अब विभाग नहीं खुद ईएसबी लेगा मेडिकल टेस्ट

Aman Vaishnav | Jun 01, 2026, 10:56 IST
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एमपी कर्मचारी चयन मंडल अब सरकारी भर्तियों को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने जा रहा है। अब नियुक्ति पोर्टल पर उम्मीदवारों के नंबर और दस्तावेज दिखेंगे। साथ ही ईएसबी खुद ही मेडिकल टेस्ट भी कराएगा ताकि समय पर जॉइनिंग मिल सके।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • ESB सरकारी भर्तियों को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने जा रहा है।
  • नए नियुक्ति पोर्टल पर चयनित उम्मीदवारों के नाम और उनके सभी जरूरी दस्तावेज दिखाए जाएंगे।
  • अभ्यर्थियों को अब उन सभी परीक्षाओं के रिजल्ट एक ही जगह मिल जाएंगे जिनमें वे शामिल हुए थे।
  • अब उम्मीदवारों का मेडिकल टेस्ट भी सीधे ईएसबी खुद ही कराएगा।
  • जांच पूरी होने के बाद ईएसबी की सिफारिश पर ही विभागों द्वारा नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी खबर है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MP ESB) अब सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को बदलने जा रहा है।



इस पूरी चयन प्रक्रिया को अब डिजिटल रूप दिया जा रहा है। इससे इसमें पूरी पारदर्शिता लाई जा सकेगी। साथ ही किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं बचेगी।



नियुक्ति पोर्टल पर दिखेगी हर छोटी-बड़ी जानकारी

नए डिजिटल सिस्टम के तहत एक खास नियुक्ति पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इस पोर्टल पर सिलेक्टेड कैंडिडेट्स से जुड़ी हर जानकारी सबके सामने होगी।



पोर्टल पर क्या-क्या देखा जा सकेगा?

चयनित अभ्यर्थियों के नाम: परीक्षा में पास होने वाले सभी उम्मीदवारों के नाम पोर्टल पर रहेंगे।



परीक्षा का पर्सेंटाइल: संयुक्त अर्हता परीक्षा में उम्मीदवारों को कितने पर्सेंटाइल अंक मिले हैं, इसे भी सार्वजनिक किया जाएगा।



जरूरी दस्तावेज: कैंडिडेट्स की योग्यता से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज भी पोर्टल पर प्रदर्शित किए जाएंगे।



इस नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। अभ्यर्थियों को अपनी सही स्थिति जानने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।



साथ ही उन्हें आसानी से सारी जानकारी एक ही जगह मिल जाएगी। साथ ही उम्मीदवार जिन-जिन परीक्षाओं में शामिल हुए हैं, उन सबके रिजल्ट भी उन्हें एक ही स्थान पर देखने को मिल जाएंगे।



ईएसबी खुद कराएगा मेडिकल टेस्ट

अब तक की व्यवस्था में परीक्षा पास करने के बाद संबंधित विभाग उम्मीदवारों का मेडिकल टेस्ट कराता था। इस पुरानी व्यवस्था में दो बड़ी दिक्कतें आती थीं।



  1. विभाग मेडिकल टेस्ट कराने में बहुत लंबा समय लगा देते थे। इससे उम्मीदवारों को जॉइनिंग लेटर के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था और वे परेशान होते थे।
  2. दिव्यांग अभ्यर्थियों के मामले में भी कई बार शिकायतें सामने आईं कि उनका मेडिकल टेस्ट सही तरीके से नहीं किया गया।

क्या बदलाव हुआ है?

अब आगे होने वाली सभी भर्तियों में उम्मीदवारों का मेडिकल टेस्ट सीधे ईएसबी द्वारा कराया जाएगा। इससे पूरी प्रक्रिया सख्ती के साथ और बिल्कुल सही समय पर पूरी हो सकेगी।



पोर्टल से दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन

चयनित उम्मीदवारों के सभी शैक्षणिक और अन्य जरूरी कागजातों की जांच अब नियुक्ति पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ही की जाएगी।



किन-किन चीजों की होगी जांच?

  • आवेदन करते समय उम्मीदवार ने जो न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता भरी थी, उसकी जांच होगी।
  • अन्य आवश्यक योग्यताओं और सर्टिफिकेट्स को परखा जाएगा।
  • रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों के जाति प्रमाण पत्र की बारीकी से जांच की जाएगी।
  • EWS उम्मीदवारों के लिए जरूरी नियम: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों के पास दस्तावेज सत्यापन की तारीख पर एक वैध प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है।

हरी झंडी के बाद मिलेगा जॉइनिंग लेटर

इस नए नियम के तहत अब विभागों की मनमानी नहीं चलेगी। जब उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन और मेडिकल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद कर्मचारी चयन मंडल योग्य उम्मीदवारों की एक प्रोविजनल लिस्ट तैयार करेगा।



यह सूची संबंधित विभागों को भेजी जाएगी। इस सूची के आधार पर और ईएसबी की सिफारिश मिलने के बाद ही संबंधित विभाग उम्मीदवारों के नियुक्ति आदेश जारी करेंगे।



जॉइनिंग के बाद दोबारा वेरिफिकेशन

नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद सभी सफल अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली यानी IFMIS पोर्टल पर किया जाएगा।



यह रजिस्ट्रेशन तभी पूरा होगा जब फॉर्म भरते समय किए गए आधार प्रमाणीकरण के आधार पर उम्मीदवार का पुनः सत्यापन सफलतापूर्वक हो जाएगा।



इस नई व्यवस्था से क्या सुधार होगा?

इस एकीकृत डिजिटल प्रणाली को लागू करने के पीछे कई मुख्य उद्देश्य हैं।



मुख्य उद्देश्यइससे होने वाला फायदा
पारदर्शिता बढ़ानाभर्ती प्रक्रिया में कोई धांधली या पक्षपात नहीं हो सकेगा।
कागजातों की प्रामाणिकताफर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वालों पर लगाम लगेगी।
समय की बचतमेडिकल और वेरिफिकेशन में लगने वाला समय बचेगा। इससे समय पर नियुक्तियां मिलेंगी।
व्यवस्थित और आधुनिक सिस्टमपूरी भर्ती प्रक्रिया तकनीक पर आधारित और आसान बन जाएगी।
विभागों को सुविधासरकारी विभागों को भी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने में कोई परेशानी नहीं होगी।

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