मध्य प्रदेश में दागी आबकारी अफसर, रायचुरा, दुबे और खरे ही नहीं... महिला अधिकारी रीनी और मंदाकिनी पर भी लगे दाग

Sanjay Gupta | Nov 05, 2026, 13:44 IST
मध्य प्रदेश आबकारी विभाग में अफसरों के घोटालों, जहरीली शराब कांड और शराब माफिया की दबंगई ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
MP Excise Department Under Scrutiny Over Officer Corruption Bribery Scams Poisonous Liquor Tragedies And Deadly Liquor Mafia Attacks
मध्य प्रदेश में इन दिनों आबकारी विभाग लगातार सुर्खियों में है। मामला जहरीली शराब कांड का हो या शराब माफिया द्वारा ट्रक से टीआई को कुचलने का। इन घटनाओं के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब आबकारी विभाग के अधिकारियों पर उंगलियां उठी हैं।

हाल ही में आबकारी मंत्री और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचुरा हों या फिर जबलपुर के एसी संजीव दुबे या फिर मंदाकिनी दीक्षित, रीनी गुप्ता सभी पर कई दाग लगे हैं।



बता दें कि सागर के बाद देवास में हुए जहरीली शराब कांड ने कई लोगों की जान ले ली। इसके बाद देवास में ही शराब माफिया ने टीआई दिलीप पुरी को ट्रक से कुचल दिया। इन घटनाओं के बाद विभाग पर सवाल और गहरे हो गए हैं। आबकारी विभाग के अधिकारियों पर तस्करों और अवैध कारोबार करने वालों से मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं। अलग-अलग जांच एजेंसियों के छापों में यह बात सामने आई कि कुछ विभागीय अधिकारियों ने अवैध कारोबार के जरिए करोड़ों की संपत्ति बनाई है।



ये हैं दागदार आबाकरी अधिकारियों के नाम...

दीपम रायचुरा

हाल के दिनों में सबसे ज्यादा चर्चा आबकारी मंत्री और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचुरा की रही है। सहायक आबकारी आयुक्त रायचुरा और शराब ठेकेदार जसवंत सिंह के खिलाफ लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार की कई धाराओं में केस दर्ज किया है। यह पूरा मामला फर्जी एफडी से जुड़ा है। केस दर्ज होने के बाद दोनों को सस्पेंड कर दिया गया था।



संजीव दुबे

जबलपुर में पदस्थ सहायक आयुक्त संजीव दुबे पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। इंदौर में पोस्टिंग के दौरान साल 2015 में हुए 72 करोड़ रुपए के आबकारी घोटाले में उनकी मिलीभगत के आरोप हैं। इस मामले की जांच ईडी भी कर रही है।



केस में करीब एक दर्जन ठेकेदारों और शराब दुकान संचालकों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि फर्जी चालान बनाकर घोटाले को अंजाम दिया गया। कम रकम जमा करके उसे ज्यादा दिखाया गया और वेयरहाउस से बड़ी मात्रा में शराब उठा ली गई।



मंदाकिनी दीक्षित

देवास की तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित पर भी रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। देवास के शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने एक वीडियो बनाया और फिर आत्महत्या कर ली थी। इस वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया था कि दीक्षित हर शराब दुकान से हर महीने 1.5 लाख रुपए रिश्वत मांगती थीं। मकवाना की पांच दुकानें थीं।



ठेकेदार ने यह भी आरोप लगाया था कि दीक्षित पहले ही उनसे 20 लाख रुपए ले चुकी थीं। इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ की सिंगल बेंच ने दीक्षित के खिलाफ सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। हालांकि बाद में डबल बेंच ने सीबीआई जांच के आदेश खारिज कर दिए।



आलोक खरे

साल 2019 में लोकायुक्त ने इंदौर के तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान उनकी संपत्तियों का खुलासा हुआ, जिसने सबको चौंका दिया। जांच में खरे के पास 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति मिली थी। आय से अधिक संपत्ति के इस मामले ने बता दिया कि किस तरह से आबकारी विभाग में भ्रष्ट अधिकारी कमाई करने में जुटे हैं।



धर्मेंद्र भदौरिया

आबकारी विभाग के रिटायर्ड अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया के ठिकानों पर अक्टूबर 2025 में लोकायुक्त ने छापा मारा था। इस कार्रवाई में उनके यहां सोने का बड़ा भंडार मिला था। इसकी कीमत 10 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई थी। जांच में भदौरिया की कुल संपत्ति करीब 35 करोड़ रुपए की मिली थी।



भदौरिया के पास एक आलीशान कोठी भी मिली थी। भदौरिया मध्य प्रदेश और गुजरात की सीमा से लगे झाबुआ जिले में पदस्थ रहे थे। झाबुआ गुजरात में अवैध शराब की सप्लाई के लिए भी जाना जाता है।



पराक्रम चंद्रावत

आबकारी अधिकारी पराक्रम चंद्रावत के ठिकानों पर भी लोकायुक्त छापा मार चुकी है। इस कार्रवाई में उनके पास करोड़ों रुपए की संपत्ति मिली थी। साल 2021 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। चंद्रावत अपनी कार्यशैली को लेकर भी कई बार विवादों में रहे हैं। उनके पिता की हत्या के बाद उन्हें अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर आबकारी विभाग में नौकरी मिली थी।



रीनी गुप्ता

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले की जिला आबकारी अधिकारी रीनी गुप्ता पर भी लोकायुक्त कार्रवाई कर चुकी है। 29 अगस्त 2023 को रीवा लोकायुक्त की टीम ने उन्हें कलेक्ट्रेट स्थित उनके कार्यालय से 1 लाख 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उन्होंने शराब ठेकेदार से नई दुकान खोलने और वीआईपी कार्यक्रमों के लिए चंदा देने के नाम पर रिश्वत मांगी थी।



मध्य प्रदेश में 20 हजार करोड़ के ठेके

मध्य प्रदेश में करीब 3 हजार 500 शराब दुकानें हैं। इनके सालाना ठेके करीब 20 हजार करोड़ रुपए में दिए जाते हैं। प्रदेश में शराब महंगी होने के कारण उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से भी शराब लाई जाती है। महंगे ठेके लेने वाले ठेकेदार वेयरहाउस से शराब उठाते हैं।



इसके बाद ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसे गुजरात भेज देते हैं। देवास में टीआई की मौत के मामले में भी शराब की तस्करी का ही मामला सामने आया था। गुजरात बॉर्डर से लगे जिलों में शराब की तस्करी के लिए भी खास तरीके अपनाए जाते हैं। यहां कम आबादी वाले इलाकों की दुकानें भी महंगे दामों पर ली जाती हैं, ताकि वहां से शराब गुजरात भेजकर खपाई जा सके।



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