फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर बन बैठे सरकारी अफसर! रिपोर्ट न मिलने से अटके 156 से ज्यादा मामले
News In Short
- टीएंडसीपी के जॉइंट डायरेक्टर से लेकर साइबर सेल डीएसपी तक के जाति प्रमाण पत्र संदेह के घेरे में हैं।
- जनजातीय कार्य विभाग के अनुसार अनुसूचित जनजाति के लगभग 112 मामले अब भी अधर में लटके हुए हैं।
- पुलिस और जिला कलेक्टरों से समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण 156 मामले अटके हैं।
- राज्य सरकार के मुताबिक छानबीन समिति की प्रक्रिया अर्द्धन्यायिक होने से फैसला आने में देरी हो रही है।
- 10 ऐसे मामले भी हैं जिनमें बिना कोई कार्रवाई किए फाइल सीधे बंद कर दी गई।
News In Detail
मध्यप्रदेश में सरकारी तंत्र के बड़े पदों पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। प्रदेश की उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि, टीएंडसीपी के जॉइंट डायरेक्टर से लेकर साइबर सेल के उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) तक के जाति प्रमाणपत्र (फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला) जांच के दायरे में हैं। इस मुद्दे ने सरकारी महकमे में हलचल मचा दी है।
120 मामले अब भी लंबित
जनजातीय कार्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से अब तक अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 174 मामलों का समाधान किया जा चुका है, लेकिन 112 मामले अभी भी लटके पड़े हैं।
वहीं अनुसूचित जाति विकास विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 से अब तक 123 मामले हल हो चुके हैं, लेकिन 120 मामले अब भी लंबित हैं।
रिपोर्ट न मिलने से अटके पड़े मामले
156 से ज्यादा मामले केवल पुलिस और कलेक्टर की रिपोर्ट न मिलने की वजह से अटके पड़े हैं। इसके अलावा 10 ऐसे मामले भी हैं जिनमें बिना कोई कार्रवाई किए फाइल सीधे बंद कर दी गई। समिति ने उन्हें खत्म मान लिया है।
छानबीन समिति की बैठक
इस मामले पर सरकार ने 1 अगस्त 2025 को सदन में लिखित जवाब दिया था। सरकार का कहना था है कि छानबीन समिति हर हफ्ते निराकरण के लिए बैठकें कर रही है। समिति की प्रक्रिया अर्द्धन्यायिक होने के कारण, आखिरी फैसले के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की जा सकती है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में किन बड़े अधिकारियों के जाति प्रमाण पत्र की जांच हो रही है?
जांच मुख्य रूप से टीएंडसीपी के जॉइंट डायरेक्टर और साइबर सेल डीएसपी पर केंद्रित है। इनके अलावा कई अन्य श्रेणी के अधिकारियों के दस्तावेज भी संदेह के घेरे में हैं। - वर्तमान में कुल कितने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले लंबित हैं?
रिपोर्ट के अनुसार एसटी वर्ग के 112 और एससी वर्ग के 120 मामले लंबित हैं। कुल मिलाकर 232 से ज्यादा मामलों में अभी अंतिम फैसला आना बाकी है। देरी की मुख्य वजह संबंधित जिलों से जांच रिपोर्ट का समय पर न मिलना है।
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