असली डॉक्टर की डिग्री चुराकर 15 साल तक नौकरी करता रहा मुन्ना भाई, BMO बना, तब जाकर खुली पोल
बालाघाट फर्जी डॉक्टर मामला
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिस्टम में सुनील कुमार नाम के दो डॉक्टर काम कर रहे थे। दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग जिलों में थी। इसके बाद भी उनके कागजों की हर एक जानकारी हूबहू एक जैसी थी।
- पहला डॉक्टर: सुनील कुमार सिंह, जो बालाघाट जिले के बिरसा में बीएमओ पद पर काम कर रहा था।
- दूसरा डॉक्टर: डॉक्टर सुनील कुमार, जो देवास में पूरी ईमानदारी से पदस्थ हैं।
- दस्तावेजों में समानता: दोनों के कागजों में नाम सुनील सिंह, पिता का नाम मोहन सिंह और जन्म की तारीख 1 फरवरी 1978 दर्ज थी।
- डिग्री और कॉलेज: दोनों की एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री एपीएसयू रीवा (APSU Rewa) कॉलेज की थी।
सबसे बड़ी बात यह थी कि दोनों डॉक्टर असल जिंदगी में एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे।
2009 से शुरू हुई नौकरी
बता दें कि आरोपी सुनील सिंह ने साल 2009 में सिस्टम में सेंध लगाई थी। उसने बालाघाट के बिरसा ब्लॉक स्थित पीएचसी दमोह में नौकरी शुरू की थी। इसके बाद साल 2012 से वह बिरसा में संविदा डॉक्टर के रूप में काम करने लगा।
साल 2023 में वह प्रमोट होकर बीएमओ यानी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर बन गया। जब वह इस बड़े पद पर बैठा, तब उसकी डिग्री को लेकर शिकायतें और सवाल उठने लगे। उस समय जांच भी हुई लेकिन तत्कालीन सीएमएचओ (Chief Medical and Health Officer) ने उसे क्लीन चिट दे दी थी। वहीं दूसरी तरफ देवास में पदस्थ असली डॉक्टर सुनील कुमार ने तीन बार पेश होकर अपने असली दस्तावेज साबित किए।
मेडिकल काउंसिल की जांच में उड़े अफसरों के होश
जब जांच राज्य स्तर पर पहुंची और मेडिकल काउंसिल (Medical Council) ने कागजात खंगाले, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।
- आरोपी के दस्तावेजों में उसका गृह जिला कभी मुरैना, कभी रीवा तो कभी बालाघाट लिखा हुआ था।
- आरोपी डॉक्टर के पास परमानेंट रजिस्ट्रेशन का कोई रिकॉर्ड नहीं था। उसने सिर्फ प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के कागज जमा कर रखे थे।
- उसने देवास में पदस्थ असली डॉक्टर के कागजात की नकल करके अपने सारे फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
सीएमएचओ डॉ. शत्रुघन दहिया ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट और सभी दस्तावेज देखने के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोपी ने देवास के एक डॉक्टर के असली दस्तावेजों की नकल करके फर्जी कागजात बनाए थे।
राज्य स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर बिरसा पुलिस ने सुनील सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है। साथ ही पुलिस ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है।
ये खबर क्यों जरूरी है?
यह मामला सरकारी भर्ती प्रक्रिया और स्वास्थ्य विभाग की जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक व्यक्ति कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे 15 साल तक सरकारी डॉक्टर बना रहा। इसके बाद बीएमओ जैसे पद तक पहुंच गया।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतने सालों तक उसकी डिग्री और पहचान की सही जांच क्यों नहीं हुई। यह मामला इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि डॉक्टरों की योग्यता और पहचान का सीधा संबंध मरीजों की सेहत और सुरक्षा से है।