NHM फर्जीवाड़े के बाद खंगाली जा रही फर्जी डॉक्टरों की कुंडली, डिग्री फिर जांचेंगे
पांच पाइंट में समझें पूरा मामला
- MP में फर्जी डॉक्टरों की कुंडली खंगाल रही सरकार।
- NHM में संविदा नियुक्ति फर्जीवाड़े से खुला था मामला।
- जारी करने वाले मेडिकल कॉलेजों से होगा डिग्री का मिलान।
- एनएचएम दस्तावेजों के सत्यापन में छिपा रहा अपनी गलती
- संविदा नियुक्तियों में फर्जीवाड़े की जांच करा रहा स्वास्थ्य विभाग।
मध्यप्रदेश में फर्जी डॉक्टरों का बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में संविदा नियुक्ति के फर्जीवाड़े के बाद परतें खुली हैं। अब सरकार अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की कुंडली खंगाल रही है। मेडिकल कॉलेजों से डिग्री का वेरिफिकेशन कराया जाएगा। कई जिलों में फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे। जिम्मेदार अफसर अपनी गलती छिपाने में लगे हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
NHM फर्जीवाड़े से उठा पर्दा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में संविदा डॉक्टरों की भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां दी गईं। जांच में पता चला कि कई डॉक्टरों के पास असली डिग्री ही नहीं है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर में ऐसे मामले मिले हैं। एक आरोपी ने तो MBBS की नकली मार्कशीट लगाई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अब पूरे मामले की तह तक जाने की तैयारी है। वहीं एनएचएम के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ.प्रभाकर तिवारी का कहना है अभी इस मामले में जांच चल रही है। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है उसके सामने आने पर कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
संजीवनी और पीएचसी में हुई नियुक्ति
फर्जी डिग्री और दस्तावेजों के सहारे सबसे ज्यादा नियुक्तियां संजीवनी क्लीनिक और ग्रामीण अंचलों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में की गई। कुछ नियुक्तियां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों में भी हुई थीं। सीहोर की CHC में फर्जी डॉक्टर 2 साल से तैनात था। इस दौरान वह सैकड़ों मरीजों का इलाज भी करता रहा। सागर जिले में तो संविदा पर एक युवक फर्जी सर्जन बनने में कामयाब रहा। यानी एनएचएम के जिम्मेदारों ने संविदा के नाम पर मरीजों की जान को जोखिम में डालने वालों को नियुक्तियां दे दी थीं।
अब मेडिकल कॉलेजों से होगा वेरिफिकेशन
स्वास्थ्य विभाग ने एनएचएम के तहत हुई संविदा भर्तियों के गड़बड़झाले को गंभीरता से लिया है। इसके साथ ही अब विभाग ने ऐसी सभी नियुक्तियों की जांच कराने की तैयारी कर ली है। संविदा पर बीते दो तीन सालों में नियुक्ति पाने वाले डॉक्टरों की डिग्री की दोबारा जांच कराई जा रही है। डॉक्टरों ने जिन मेडिकल कॉलेजों की डिग्री लगाई है अब उनका मिलान उन्हीं के रिकॉर्ड से कराया जाएगा। MCI और NMC के रिकॉर्ड से भी वेरिफिकेशन कराने की तैयारी है। इस आधार पर जो डिग्री फर्जी पाई जाएंगी उन डॉक्टरों पर केस दर्ज कराए जाएंगे।
फर्जीवाड़े के बाद एनएचएम में सन्नाटा
संविदा नियुक्तियों में थोकबंद फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद अफसर अपनी गलती छिपाने में जुट गए हैं। ये सभी नियुक्तियां एनएचएम के नोटिफिकेशन के आधार पर हुई थीं। वहीं वॉक इन इंटरव्यू के दौरान एनएचएम की समिति ने ही दस्तावेजों का सत्यापन किया था। ऐसे में प्राथमिक स्तर पर एनएचएम मुख्यालय में तैनात अधिकारियों की भूमिका सबसे अहम थी। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर अब तक केवल जिलों में तैनात जिला प्रबंधकों को ही निलंबित या बर्खास्त किया गया है। एनएचएम के किसी जिम्मेदार तक जांच की आंच नहीं पहुंच पाई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जीवाड़े
- 2023 में रीवा में पकड़े गए 3 फर्जी डॉक्टर
- 2024 में जबलपुर में फर्जी पैथोलॉजिस्ट चलाता मिला था लैब
- 2026 दमोह के संजीवनी क्लीनिकों में इलाज करते मिले डॉक्टर
- 2026 जबलपुर से पकड़ा गया फर्जी डिग्री से डॉक्टर बना युवक
- 2026 विदिशा जिले के संजीवनी क्लीनिक छोड़ भागे फर्जी डॉक्टर
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