एमपी फर्जी डॉक्टर कांड: फिर नौ फर्जी डॉक्टर पकड़ाए, नकली रजिस्ट्रेशन से पाई सरकारी नौकरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- दमोह में 3 नकली डॉक्टरों के पकड़े जाने के बाद पूरे मध्य प्रदेश में जांच चल रही है।
- इस जांच के दौरान 9 और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।
- इन सभी पर फर्जी कागजात के दम पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है।
- MPMC के वेरिफिकेशन में इन डॉक्टरों की धोखाधड़ी और जालसाजी का खुलासा हुआ है।
- इन सभी 9 डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
संजीवनी क्लीनिक कांड के बाद खुला फर्जीवाड़े का खेल
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे से एक बहुत हैरान करने वाली खबर सामने आई है। हाल ही में दमोह के चर्चित संजीवनी क्लीनिक मामले में तीन फर्जी डॉक्टरों का पर्दाफाश हुआ था।
इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में जांच बिठाई थी। अब इसी जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। राज्यभर में चल रही इस छानबीन के बाद 9 और डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
इन डॉक्टरों पर मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल के फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का आरोप है। साथ ही ये डॉक्टर्स सरकार से सैलरी के रूप में शासकीय धन भी वसूलते रहे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) द्वारा शुरू की गई इस राज्यव्यापी जांच ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
इन 9 डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
NHM के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. राकेश बोहरे ने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी। मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल के वेरिफिकेशन में इन डॉक्टरों के सर्टिफिकेट पूरी तरह से नकली पाए गए हैं।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इन 9 डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी पाए गए हैं।
| क्रमांक | फर्जी रजिस्ट्रेशन वाले डॉक्टर्स |
| 1 | डॉ. आकाश चंदेलकर |
| 2 | डॉ. मोहर सिंह |
| 3 | डॉ. कमल किशोर |
| 4 | डॉ. मोनिका |
| 5 | डॉ. अरुण कुमार |
| 6 | डॉ. शांति साहू |
| 7 | डॉ. सोनम यादव |
| 8 | डॉ. बुद्धिमान |
| 9 | डॉ. पवन सोलंकी |
मासूम मरीजों की जान से खिलवाड़
इस तरह के मामलों का आम जनता और समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है। जब फर्जी लोग डॉक्टर बनकर सरकारी अस्पतालों या क्लीनिक में बैठते हैं, तो सीधे तौर पर मासूम मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ होता है।
इससे सरकारी व्यवस्था और डॉक्टरों के प्रति लोगों का भरोसा कम होता है। हालांकि इस तरह की सख्त कार्रवाई से जनता के बीच यह संदेश भी जाता है कि गलत काम करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।
इससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता दोबारा कायम करने में मदद मिलती है।
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