किसान संघ का अल्टीमेटम : 23 अप्रैल को बड़ा फैसला, सरकार नहीं जागी तो फिर दोहरा सकते हैं 2017 जैसे हालात
मध्य प्रदेश में किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। भारतीय किसान संघ ने साफ संकेत दे दिए हैं कि 23 अप्रैल को इंदौर में होने वाली प्रदेश टोली की बैठक में बड़ा आंदोलन तय किया जा सकता है। चेतावनी भी उतनी ही सख्त है- अगर सरकार ने समय रहते फैसले नहीं लिए तो प्रदेश में 2017 जैसे हालात बन सकते हैं।
क्या होने वाला है 23 अप्रैल को?
- इंदौर में भारतीय किसान संघ की अहम बैठक
- प्रदेश और प्रांत स्तर के बड़े पदाधिकारी होंगे शामिल
- आंदोलन की रूपरेखा पर अंतिम निर्णय संभव
- गजेंद्र सिंह समेत राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी
जमीनी हालात: किसान क्यों भड़के हुए हैं?
प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। देरी से खरीदी शुरू होने और व्यवस्थाओं की खामियों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। छोटे से लेकर बड़े किसान तक स्लॉट बुकिंग नहीं कर पा रहे, जिससे उपज मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही।
आक्रोश के बड़े कारण
- समर्थन मूल्य पर खरीदी में देरी
- स्लॉट बुकिंग में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें
- सैटेलाइट सर्वे में खसरों का गलत सत्यापन
- नरवाई जलाने के नाम पर कार्रवाई और जुर्माना
- एक महीने तक खरीदी लेट होने से आर्थिक दबाव
मैदान में उतर चुके हैं किसान
किसानों ने कई जिलों में धरना, प्रदर्शन और चक्का जाम शुरू कर दिए हैं। यह संकेत है कि असंतोष अब संगठनात्मक स्तर से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुका है। किसान संघ का कहना है कि हालात अगर ऐसे ही रहे तो आंदोलन तेज और व्यापक हो सकता है।
2017 का साया क्यों दिखाया जा रहा है?
किसान संघ ने साफतौर पर 1 से 10 जून 2017 के आंदोलन का हवाला दिया है। उस समय: “गांव बंद” जैसे आह्वान हुए थे। दूध और सब्जियां सड़कों पर फेंकी गई थीं। मंदसौर में 6 जून को पुलिस फायरिंग में किसानों की मौत हुई थी। पूरे मालवा क्षेत्र में आंदोलन उग्र हो गया था। अब चेतावनी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो वैसी ही स्थिति दोबारा बन सकती है।
किसान संघ का सीधा संदेश
प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने साफ कहा है कि किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है।
मुख्य मांगें:
- स्लॉट बुकिंग की तारीख 10 मई तक बढ़े
- खरीदी की अंतिम तिथि 20 मई की जाए
- सभी पंजीकृत किसानों की उपज खरीदी की गारंटी
- सैटेलाइट सत्यापन को तत्काल अमान्य किया जाए
- पटवारी गिरदावरी के आधार पर प्रक्रिया शुरू हो
सैटेलाइट सर्वे पर सबसे बड़ा विवाद
किसान संघ का आरोप है कि सैटेलाइट डेटा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा। मालवा प्रांत के पदाधिकारियों ने इसे “किसानों को परेशान करने वाला सिस्टम” बताते हुए तत्काल बंद करने की मांग की है।
नेतृत्व का प्लान: बड़ा फैसला तय
23 अप्रैल की बैठक में कमल सिंह आंजना, राजेंद्र पालीवाल, महेश चौधरी समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल होंगे। संकेत साफ हैं—अगर सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो आंदोलन की रणनीति घोषित कर दी जाएगी।
प्रदेश में किसान मुद्दे अब प्रशासनिक फाइलों से निकलकर सड़क पर आ चुके हैं। 23 अप्रैल की बैठक सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि आगे की लड़ाई की दिशा तय करेगी।
सरकार के सामने चुनौती साफ है—या तो तुरंत समाधान निकाले, या फिर एक और बड़े किसान आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे।
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