आंदोलन से पहले ही एमपी पुलिस ने किसान नेताओं को किया हाउस अरेस्ट, 15 सूत्रीय मांगों पर मचा घमासान

Aman Vaishnav | May 04, 2026, 11:06 IST
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मध्य प्रदेश में किसान अपनी 15 मांगों को लेकर भोपाल आने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच आरोप है कि प्रशासन ने कई नेताओं को नजरबंद कर दिया है। पुलिस ने इन नेताओं के घरों के बाहर सुबह से ही पहरा लगा दिया है।

मध्य प्रदेश में किसान नेताओं ने अपनी समस्याओं को लेकर भोपाल आने का प्लान बनाया है, लेकिन प्रशासन ने इससे पहले ही उनका रास्ता रोकने की कोशिश की है।



राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के सदस्य फंदा टोल नाके (सिहोर-भोपाल के बीच) पर इकट्ठा होकर राजधानी जाने वाले थे। पुलिस ने आंदोलन को शुरू होने से पहले ही रोकने की कोशिश की है।



किसान नेताओं को किया हाउस अरेस्ट

जानकारी के अनुसार देवास और रतलाम समेत कई जिलों के प्रमुख किसान नेताओं को उनके घरों से बाहर निकलने से पहले ही हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया गया है। महासंघ ने मुख्यमंत्री को एक 15 सूत्री ज्ञापन भेजा है। इसमें किसानों की समस्याओं का हल जल्द से जल्द मांगा गया है।



30 जिलों से भोपाल आ रहे थे कार्यकर्ता

किसान मजदूर महासंघ के युवा अध्यक्ष त्रिलोक सिंह गोठी ने बताया कि हमारे संगठन के किसान नेता और कार्यकर्ता करीब 30 जिलों से भोपाल आ रहे थे।



सुबह से ही पुलिस उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दे रही है। भोपाल, देवास, सीहोर, सिवनी, हरदा, बालाघाट, रतलाम, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर और कई जिलों में पुलिस ने हमारे प्रतिनिधियों को घरों में ही रोक लिया है।



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किसान मजदूर महासंघ की मुख्य मांगें

  • गेहूं की सरकारी खरीदी में जो भी रुकावटें आ रही हैं, उन्हें तुरंत ठीक किया जाए।
  • जिन किसानों ने गेहूं की खरीदी में देरी की वजह से मंडी में फसल बेच दी, उन्हें 'भावांतर योजना' का पैसा दिया जाए।
  • जिन किसानों पर पराली जलाने के मामले दर्ज हैं, वे वापस लिए जाएं और सैटेलाइट रिपोर्ट को गलत माना जाए।
  • सहकारी संस्थाओं में कर्ज चुकाने की आखिरी तारीख गेहूं की खरीदी के बाद तय की जाए, और डिफाल्टर किसानों को फिर से लोन की सुविधा दी जाए।
  • आग या प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान को 100% मानते हुए किसानों को राहत राशि और फसल बीमा का फायदा मिले।
  • केन-बेतवा प्रोजेक्ट के चलते आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को रोका जाए और उनकी सभी मांगें पूरी की जाएं।
  • खेती की चीजों के दाम 'सी-250' (लागत फार्मूले) के आधार पर तय हों, और मंडी में इससे कम दाम पर फसल न बिके। साथ ही खलघाट आंदोलन के दौरान प्रशासन द्वारा किए गए वादे पूरे किए जाएं।
  • किसानों को सरकार की नीतियों की वजह से सही दाम नहीं मिला, इसलिए सभी किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए।
  • दूध का दाम 12 रुपए प्रति किलो फैट किया जाए, और सरकार द्वारा घोषित 5 रुपए प्रति लीटर बोनस राशि जल्द दी जाए।
  • सरकारी रिकॉर्ड में जो गलतियां हैं, उन्हें ठीक किया जाए क्योंकि अधिकारी किसानों के आवेदनों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
  • किसानों की जमीन से हाईटेंशन बिजली लाइन, रेलवे लाइन या पाइपलाइन न निकाली जाए, और अगर जरूरी हो, तो बाजार रेट से 10 गुना ज्यादा मुआवजा दिया जाए।
  • बिजली विभाग की मनमानी और किसानों को परेशान करने की हरकतों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
  • गर्मी में उगाई गई मूंग की पूरी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाए।
  • फार्मर आईडी' और 'ई-टोकन' के तहत खाद बांटते समय उसकी मात्रा फसल की जरूरत के हिसाब से बढ़ाई जाए।
  • हर जिले में खाद, कीटनाशक और मिट्टी की जांच के लिए सरकारी लैब बनाई जाए।

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